#सच्चे_समाजसुधारक_संतरामपालजी
Saint Rampal Ji Maharaj through satsang teaches us not to consume tobacco products while actors and actresses in films promote consuming such products for money.
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
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‘‘गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’’:-
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है
Tattvadarshi Sant Rampal Ji
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पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान किसने कहा?
जानने के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा।
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पवित्र श्रीमद्भगवद गीता जी का ज्ञान ब्रह्म-काल ने महाभारत के युद्ध के मैदान में अर्जुन को सुनाया था। इसी का प्रमाण गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में है।
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‘‘गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’’:-
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है
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��ुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ।
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गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’’:-
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है
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#गीताजी_का_ज्ञान_किस��े_बोला
गीता जी अध्याय 18 श्लोक 43 में गीता ज्ञान दाता ने क्षत्री के स्वभाविक कर्मों का उल्लेख करते हुए कहा है कि “युद्ध से न भागना” आदि-2 क्षत्री के स्वभाविक कर्म हैं। इससे सिद्ध हुआ कि गीता जी का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नहीं बोला।
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#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला सभी संत कहते हैं कि गीता जी का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने बोला, लेकिन श्रीमद भगवत गीता अध्याय 11 के श्लोक 32 में काल भगवान कह रहा है कि मैं सर्व लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ काल हूँ। इस समय लोकों को नष्ट करने के लिए आया (प्रकट हुआ) हूँ।
पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान किसने कहा?
जानने के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा।
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#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला श्रीमद्भगवत गीता अ.7 श्लोक 12 से 15 में कहा गया है कि तीनों गुणों (रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शिव) की पूजा करने वाले राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, दुष्कर्म करने वाले मूर्ख इन तीनों से ऊपर मुझ ब्रह्म की पूजा भी नहीं करते।
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीता अध्याय 18 श्लोक 43 में गीता ज्ञान दाता ने क्षत्री के स्वभाविक कर्मों का उल्लेख करते हुए कहा है कि “युद्ध से न भागना” आदि-2 क्षत्री के स्वभाविक कर्म हैं। इससे सिद्ध हुआ कि गीता जी का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नहीं बोला।
जिस समय काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण जी के शरीर से बाहर निकलकर अपना विराट रूप दिखाया, वह बहुत प्रकाशमान था। अर्जुन भयभीत हो गया तथा श्री कृष्ण उस विराट रूप के प्रकाश में ओझल हो गया था। इसलिए पूछ रहा था कि आप कौन हो?
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5, अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने को नाशवान ��ानि जन्म-मरण के चक में सदा रहने वाला बताया है। कहा है कि हे अर्जुन ! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके है। तू नहीं जानता, मैं जानता हूँ।
आज आप जानिए पवित्र सद्ग्रंथो से कि #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला ?
पवित्र गीता जी को बोलने वाला काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) है, न कि श्री कृष्ण जी। क्योंकि श्री कृष्ण जी ने पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ तथा बाद में कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ। श्री कृष्ण जी काल नहीं हो सकते।(1/2)
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीता अध्याय 18 श्लोक 43 में गीता ज्ञान दाता ने क्षत्री के स्वभाविक कर्मों का उल्लेख करते हुए कहा है कि ‘‘युद्ध से न भागना’’ आदि-2 क्षत्री के स्वभाविक कर्म हैं। इससे सिद्ध हुआ कि गीता जी का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नहीं बोला। क्योंकि श्री कृष्ण जी स्वयं क्षत्री होते हुए कालयवन के सामने से युद्ध से भाग गए थे। व्यक्ति स्वयं किए कर्म के विपरीत अन्य को राय नहीं देता। न उसकी राय श्रोता को ठीक जचेगी। वह उपहास का पात्र बनेगा। यह गीता ज्ञान ब्रह्म(काल) ने प्रेतवत् श्री कृष्ण जी में प्रवेश करके बोला था। भगवान श्री कृष्ण ��ूप में स्वयं श्री विष्णु जी ही अवतार धार कर आए थे।
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