कर्नल सोफिया कुरैशी तो याद होंगी आपको
Operation Sindoor के वक़्त वो जांबाज़ ऑफिसर जो मीडिया की ब्रीफिंग करती थीं
उनको मध्यप्रदेश के BJP मंत्री विजय शाह ने “आतंकियों की बहन” कहा था
क्या आप जानते हैं कि ऐसी गलीच बात के लिए उनके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी सुप्रीम कोर्ट ने दे दी
लेकिन उस आदेश के बावजूद पूरी मध्यप्रदेश कैबिनेट ने इसकी मंजूरी नहीं दी - *उन्होंने decide किया कि विजय शाह के ख़िलाफ़ केस नहीं चलेगा*
🔹क्या यह सेना के शौर्य का अपमान नहीं है?
🔹क्या यह नारी शक्ति की अवमानना नहीं है?
🔹क्या यह सुप्रीम कोर्ट की खुली तौहीन नहीं है?
BJP के ढोंगी आईन्दा महिलाओं के सम्मान पर मुँह मत खोलना
मोदी जी कोरी बकवास ही करते फिरेंगे या कोई एक्शन भी लेंगे?
योगी जी हिंदू मुसलमान और घृणा के चक्कर में हमारे “स्वतंत्रता सेनानियों”का अपमान मत कीजिए।
मौ.मो.अली जौहर के नाम पर तो आपके प्रेरणा पुरुष अटल-आडवाणी जी ने 1978 में “डाक टिकट” जारी किया,उनका निधन 1931 में ही हो चुका था,तो पाकिस्तान बनाने के लिये मौ.मो.अली जौहर कैसे ज़िम्मेदार थे?
I wonder if BJP spokespersons realise how they come across on camera. It’s not about looks,
it’s the arrogance, the mocking smile, the contemptuous body language and the vile words.
The sheer shamelessness is hard to miss.
छात्राओं ने अधिकारियों से पूछा, क्या हम जानवर हैं जो बिना तेल मसाला प्याज की सब्जी खाते हैं, क्या तुम खा सकते हो??
स्कूल के क्लास रूम में पानी टपकता है, स्कूल में बाथरूम नहीं है, एक रूम में सभी को नहाना पड़ता है, छात्राओं के इन सवालों पर अधिकारियों की घिग्घी बंध गई थी।
इस साहसिक रिपोर्ट के लिए इस स्वतंत्र पत्रकार को सलाम , सोचिए आधा शरीर डूबे हुए पुल पर कैसे कोई बच्चा पढ़ने जाएगा
और सरकार यूट्यूबर पर मुकदमे करा रही है , धन्य है व्यवस्था
Indian government forces used lethal weapons, including pellet-firing shotguns, grenades, batons and electric shock devices against demonstrators in Gen Z protests that rocked the national capital last month.
Here's what what Amnesty report reveals https://t.co/JcqOOJhYHP
शहर तो बारिश में डूबते रहेंगे ,
बच्चे तो रोते बिलखते रहेंगे,
आप ये बताइए आपने वंदे मातरम् के कितने छंद गाये,
मनुस्मृति पर चर्चा करिए,
सावन में किसने कहां मछली खाई उसका जवाब लीजिए..
The Gen-Z movement is not merely about paper leaks. It is an upsurge against the deeper maladies of our country - education, employment, environmental degradation, and the failures of accountability.
हीही हीही
लौट कर सब कर्म इनके ऊपर खुद वापिस आएगा, जो जो ये बोले हैं उस उस पर शर्मिंदा होंगे, यही ईश्वरीय विधान है
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप, अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।"