@bstvlive Spreading false news
except Loco pilots all get 25% increment without any noise
But after a huge year long protest Loco pilots cheated with 14.25% and you are beating a drum don't spread false news 🗞️
पहली बात तो ये कि यह कविता एक सांस में पढ़ जाइए!!
और दूसरी बात ये कि इसके रचनाकार का नाम मुझे पता नहीं है-फेसबुक/व्हाट्सऐप से मेरे पास आई है, इसलिए लिखने वाले क्रेडिट आकर ले जाएँ।
---------------------------------------------
हम ज़्यादा खाते हैं — इसलिए बीमार हैं
दिन में तीन बार खाना
मानव इतिहास के सबसे बड़े धोखों में से एक है।
कोई डॉक्टर यह साफ़-साफ़ नहीं कहेगा।
कोई मेडिकल पाठ्य-पुस्तक इसे स्वीकार नहीं करेगी।
क्योंकि यह झूठ
अनेक उद्योगों को ज़िंदा रखता है।
इस भ्रम को समझने के लिए
हमें 1750 से पहले लौटना होगा।
अंग्रेज़ों से पहले।
घड़ी के शासन से पहले।
उस समय से पहले
जब भोजन आज्ञाकारिता बना दिया गया।
भारत समय से नहीं — सूर्य से खाता था
भारत ने कभी
घड़ी देखकर खाना नहीं खाया।
यहाँ भोजन होता था—
सूर्य के अनुसार,
ऋतु के अनुसार,
श्रम के अनुसार,
और सबसे महत्वपूर्ण—भूख के अनुसार।
अधिकांश भारतीय
एक ही मुख्य भोजन करते थे।
कभी-कभी दो।
तीन कभी नहीं।
भोजन प्रायः
देर सुबह या दोपहर में होता था।
सूर्यास्त के बाद
भारी भोजन लगभग नहीं होता था।
उपवास कोई दंड नहीं था
उपवास
सज़ा नहीं था।
वह संस्कृति था।
वह जैविक बुद्धि था।
वह आध्यात्मिक अनुशासन था।
एकादशी।
प्रदोष।
नवरात्रि।
चातुर्मास।
ऋतु-आधारित व्रत।
भूख से डर नहीं था।
भूख का सम्मान था।
भोजन स्थानीय था — जीवन से जुड़ा था
खाद्य पदार्थ
ताज़ा थे।
स्थानीय थे।
ऋतु के अनुरूप थे।
मोटे अनाज—
ज्वार, बाजरा, रागी।
कंद-मूल।
दालें।
देशी घी, दूध।
वन-आधारित भोजन।
चावल और गेहूँ
देवता नहीं थे।
रोग थे।
लेकिन मेटाबोलिक रोग नहीं थे।
मोटापा दुर्लभ था।
मधुमेह लगभग अदृश्य था।
हृदय रोग जीवन-शैली नहीं बने थे।
शरीर दुबले थे।
मांसपेशियाँ कार्यशील थीं।
किसानों के शरीर
जिम के बिना सिक्स-पैक थे।
फिर अंग्रेज़ आए
और उन्होंने
सिर्फ़ भूमि पर क़ब्ज़ा नहीं किया।
उन्होंने
समय को उपनिवेश बनाया।
भोजन को उपनिवेश बनाया।
चयापचय (Metabolism) को उपनिवेश बनाया।
उन्हें चाहिए थे
अनुमानित मजदूर।
अनुमानित घंटे।
अनुमानित उत्पादकता।
इसलिए उपवास हटाना पड़ा।
अनियमित भोजन हटाना पड़ा।
भोजन की स्वायत्तता खत्म करनी पड़ी।
धीरे-धीरे, चुपचाप
एक नया ढाँचा खड़ा किया गया—
सुबह = नाश्ता
दोपहर = भोजन
रात = रात का खाना
यह स्वास्थ्य मॉडल नहीं था।
यह कर वसूली का मॉडल था।
अगला वार: खाद्य संप्रभुता की हत्या
हर भारतीय घर
कभी एक खाद्य इकाई था।
स्व-संरक्षित।
स्व-निर्भर।
स्व-पोषित।
इसे नष्ट करना ज़रूरी था।
विविध अनाज हटाए गए।
चावल और गेहूँ थोपे गए।
क्यों?
आसान भंडारण।
आसान परिवहन।
आसान कर।
आसान नियंत्रण।
रसोई बाज़ार बन गई।
खेती नक़दी फसल बनी।
खाना निर्भरता बन गया।
1947 आया — आज़ादी आई, पर व्यवस्था नहीं बदली
सरकार ने
अंग्रेज़ी मॉडल को देखा
और मुस्कुराई—
“कितनी शानदार कर मशीन है!”
फिर आई
हरित क्रांति।
1950–60 का दशक।
गेहूँ और चावल
सीमेंट की तरह जम गए।
MSP का नशा दिया गया।
मोटे अनाज ग़ायब हो गए।
विविधता मर गई।
किसान संप्रभु नहीं रहे।
वे आपूर्तिकर्ता बन गए।
फिर दूसरा उद्योग फूटा — बीमारी
कार्बोहाइड्रेट-भारी आहार आए।
और साथ आए—
मधुमेह।
उच्च रक्तचाप।
हृदय रोग।
मोटापा।
बीमारियाँ अनुमानित थीं।
मरीज़ स्थायी थे।
बीमा फला-फूला।
अस्पताल बढ़े।
दवाइयाँ फूटीं।
सरकार फिर मुस्कुराई—
भोजन कर।
दवा कर।
अस्पताल कर।
बीमा कर।
नागरिक
बैटरियाँ बन गए।
खाओ।
काम करो।
दवा लो।
कर दो।
दोहराओ।
काग़ज़ों में उम्र बढ़ी — जीवन नहीं
लोग अधिक नहीं जी रहे।
वे केवल
ज़्यादा समय तक ज़िंदा रखे जा रहे हैं।
गोलियों पर।
इंजेक्शन पर।
रिपोर्ट्स पर।
स्वस्थ रहने के लिए नहीं—
कर देने के लिए ज़िंदा।
यह स्वास्थ्य नहीं है।
यह सभ्यतागत पतन है।
और हम अब भी
इस मैट्रिक्स में फँसे हैं।
असल प्रश्न यह नहीं है…
“आप बीमार क्यों हैं?”
असल प्रश्न है—
जब आप दिन में तीन बार खाते हैं,
तो लाभ किसे होता है?
माँ कुश्ती मेरे से जीत गई मैं हार गई माफ़ करना आपका सपना मेरी हिम्मत सब टूट चुके इससे ज़्यादा ताक़त नहीं रही अब।
अलविदा कुश्ती 2001-2024 🙏
आप सबकी हमेशा ऋणी रहूँगी माफी 🙏🙏
@TRAI@DoT_India@JM_Scindia
Dear sir
A large number of users are in need of
mobile calling plan only,
No need of any data in basic future 🤳 phone
So please guide operator for at least one plan which have calling plan only.
Thanks.
@dominos@dominos_india
30 minutes delivery promise fails.
Raised concerns on same day but not resolved till now. Concerns id
#7501106 on 7th dec given.
Today's concerns id #7589591
Make complaint on App also.
No one is resolving.
Plz do needful.
R/sir
10 day given for TRE 2 form fill.
In those many circular issued.
Finally in 6 to 8 BCA r eligible it is ok,
But u have not clarify about those who r eligible a/c to new notice of 6 to 8, but filled form earlier.
If he done fresh then who bear financial loss.
@atulpmail
Chandrayaan-3 Mission:
🇮🇳Chandrayaan-3 is set to land on the moon 🌖on August 23, 2023, around 18:04 Hrs. IST.
Thanks for the wishes and positivity!
Let’s continue experiencing the journey together
as the action unfolds LIVE at:
ISRO Website https://t.co/kL1ncOCjPY
YouTube https://t.co/92aHKFUvzd
Facebook https://t.co/Q3K7buUYqg
and DD National TV
from 17:27 Hrs. IST on Aug 23, 2023.
@DDNational@PIB_India
#Chandrayaan_3
#Ch3
A message: https://t.co/kTf67mWBRv
@LnTFSOnline @RBI@jagograhakjago
Taken loan of 52,000 & got Repayment Schedule of 54,805.
I hv contacted local authorities & mail to highr auth no one ready to solve my problem.
For details please chk my loan and mail
Ajay kr
T02424041022023409
Case id #15876668
Gro #15876666