महिला प्रोटेस्टर के मुंह पर थप्पड़ मारा जाता है, उसके कपड़े फाड़े जाते हैं। उसके बाद भी दिल्ली पुलिस नहीं रुकती। घसीटते हुए उसे बस में ले जाती है।
ये सब ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए हो रहा है।
इनके जैसे 2-4-10 पत्रकार अगर और आ गए जंतर मंतर में तो नोएडा के बहुत से पत्रकार स्टूडियो छोड़कर भाग जाएंगे! 🔥
राजीव तलवार जी की पत्रकारिता सबसे अलग है बोले तो नंबर 1 💀
देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
ज्यादा बोलोगे तो झोला लेकर भाग जाएगा विदेश 🤡
रंड वा है भाग गया तो पकड़ भी नहीं पाओगे !
इसके कई साथी पहले से भाग चुके हैं !
इसके कई दोस्त विदेश में घर भी बना चुके हैं !
कई लोग विदेश की नागरिकता भी ले चुके हैं ?
मा का गहना चुराया था बचपन में 😁😁
मुंबई में महाकुंभ लग गया है-पहले ही दिन।
जंतर मंतर जहां से खत्म हुआ था शिवाजी पार्क वहीं से शुरू हो गया है।
@abhijeet_dipke में गजब कोऑर्डिनेशन क्षमता है।
ये लड़का आंदोलनों में प्रयोग की तमाम परिभाषा बदल दे रहा है।
सबके साथ मिलकर बड़े काम कर दिखा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अब चुनाव आयोग जैसा तानाशाही वाला सिस्टम बन चुका है!
2019 में जब जस्टिस सूर्यकान्त और गवई को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया था, तो कॉलेजियम का लेटर लंबा-चौड़ा होता था—सीनियरिटी, योग्यता, आचरण, SC/ST प्रतिनिधित्व, हाई कोर्ट का बैलेंस… सब लिखा जाता था। सदस्यों के नाम भी।
अब? सिर्फ तीन लाइन और नाम। बाकी सब गायब।
जस्टिस पंचोली को 56 सीनियर जजों को ठिकाने लगाकर लाया गया। नागरत्ना ने विरोध किया, लेकिन लेटर में न डिसेंट लिखा, न कारण। बाकी चार ने समर्थन किया… और चुप्पी।
CJI सूर्यकान्त खुद कहते हैं—आंतरिक चर्चा बाहर आएगी तो जजों की गरिमा खराब होगी। तो फिर प्लस पॉइंट क्यों नहीं बताते? 56 जजों को पीछे छोड़ने वाली वो “अमृत योग्यता” क्या थी?
ज्ञानेश कुमार वाला खेल याद है? एक आदमी का राज, बाकी चुप। क्या कॉलेजियम में भी वही हो रहा है?
पारदर्शिता की बात करते हो, खुद अंधेरे में फैसले लेते हो। जनता का विश्वास कैसे बचेगा?
#SupremeCourt #Collegium #TransparencyFail
@SauravDassss@advocatebsmalik
Paul's point is simple:
The moment you think you have fully "arrived" or mastered the spiritual walk, you stop moving forward. what is behind:
Letting go of both past failures (guilt) and past achievements (pride/status).
अभिजीत दीपके ने अमित शाह को खुली चुनौती दी है कि 20 जुलाई की तरह इसबार लाठी चलाने की ग़लती मत कर देना, नहीं अब तुम्हें इस्तीफा देना पड़ जाएगा।
साथ ही कहा है-गुंडा बनना है तो इस्तीफा देकर बनो, गृहमंत्री रहकर नहीं।