मुझे आज तक ये समझ नहीं आता कि नेताओं के लिए लोग आखिर एक दूसरे से लड़ते क्यों है?
जब की वही निर्लज नकारा नेता को सामने वाले को गले लगाने में 2 मिनट भी नहीं लगता बस कार्यकर्ता लड़ते रहते है राजनीति का हिस्सा कभी ना बने नेताओं को बोले कि वो खुद लडले
अगर उतने ही ताकतवर है तो
सपा के कुछ जाती विशेष के कार्यकर्ता इतने धूर्त और मक्कार है कि आज वो आजम खान जो इतने सालों से जेल में है उन्हें निकालने केलिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया पर यही आजम खान अगर कल बीजेपी ज्वाइन कर ले तो ये उन्हें गद्दार फलाना वगैरह कहने लगेंगे
आजम खान ने समाजवादी पार्टी के लिए क्या कुछ नहीं किया अपनी पूरी जिंदगी लगादी फिर भी वो जेल में है और अखिलेश ने बकायदा 24 के लोकसभा चुनाव में उनके सहयोगी को टिकट न देकर किसी बाहरी मोहिबुल्लाह नदवी को टिकट दे दिया सोचिए उनपर क्या बीती होगी
डंके की चोट पे कह सकता हु कि आम राजपूत/क्षत्रिय का राजा महाराजा से कोई लेना देना नहीं है ना आज है ना कभी पहले हुआ करता था राजा महाराजा अलग है और आम राजपूत एक किसान कौम है ये केवल एक भ्रम में रहते है कि वो भी रॉयल है कोई रॉयल नहीं है आप आप केवल सेवक हो सब मौज तो उनकी है
आज के दिन बंगाल में सबसे ज्यादा दुखी बंगाल बीजेपी के मूल कार्यकर्ता है जिन्होंने संघर्ष किया लाठिया खाई इतने सालों तक उनका उत्पीड़न हुआ और जो सांसद और विधायक उनको हैरान परेशान करते थे वो सब आज दीवार फांदकर भाजपा में आ गए है टीएमसी और ममता नहीं हारी हारे बीजेपी के कार्यकर्ता है
आज की तारीख में कोई नहीं चाहता कि वो बीजेपी का मूल कार्यकर्ता बने क्योंकि अब बीजेपी में आगे बढ़ना है तो किसी दूसरी पार्टी से दीवार फांदकर आने में ही उनका फायदा है क्योंकि बीजेपी के मूल कार्यकर्ताओं को तो केवल लाठी और संघर्ष ही करना है असली पद दूसरे दल से आयती को ही मिलना है
मायावती जी के सामने अखिलेश यादव की हैसियत शेर के सामने चूहे जितनी है मायावती जी खुद के दम पे बनी और उनके कारण ही आज यूपी और बिहार में बहुत अंतर है वरना बिहार में लालू यादव और यूपी में मुलायम यादव ने गुंडाराज स्थापित करने में कुछभी कमी नहीं रखी थी मायावती जी असली लीडर है
अगर राहुल जी ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को नहीं निपटाया तो लिख कर लेलो कांग्रेस पार्टी हमेशा हमेशा के लिए भारत से समाप्त हो जाएगी हर हाल में जब तक कांग्रेस यूपी और बिहार में अपना बड़ा बेस नहीं बनाती तब तक सत्ता में नहीं आ सकती क्योंकि सपा का बेस कांग्रेस का ही वोटर है
आज भले ही ममता दीदी की हालत जैसी भी हो लेकिन महिलाओं के लिए उनसे बेहतर नेता आज भी हमारे देश में कोई नहीं है आज जहां हम किसी भी जगह महिलाओं को राजनीति में नहीं देखते उन्होंने हर जगह 40% महिलाओं को राजनीति में जगह दी है वो भी ऐसी महिलाएं जिनका कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं था
मुझे भविष्य में एक ऐसी सरकार की भी उम्मीद है जो वक्फ प्रॉपर्टी को सरकार अपने कब्जे में ले और उनमें प्रधानमंत्री आवास के नाम पर गरीबों को मुफ्त प्लॉट या फ्लैट का आवंटन किया जाए इससे देश की 10% जो लोगों के पास अपने पक्के घर नहीं है उसकी समस्या हल हो जाएगी
सिर्फ एक परिवार के लोगों के यूपी के 6 जिलों में सांसद है आप सोचिए 6 जिलों में उन्हें कोई काबिल नेता या इंसान नहीं मिला और 6 के 6 जिले मुस्लिम बाहुल्य जिले है एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है वहां से हिंदू के साथ मुस्लिम का भी हक वोट लेकर खा गए है ये लोग
लोग आपको वोट क्यों देंगे? जब आपको केवल राजनीति में अपने परिवार के लोगों को ही लाना है शायद अभी तक ये विपक्षी पार्टियां समझ नहीं पाई कि आपके इसी रवैये कि वजह से ही लोग भाजपा को वोट देते है लोग अब परिवार वादी पार्टियों से ऊब चुके है वह उनको अपना कोई भविष्य नजर नहीं आता
भाजपा ने सपा को 2014,2017,2019,2022
चार चुनावों में बुरी तरह मतलब की जमानत जप्त टाइप हराया है 2024 का चुनाव सपा कांग्रेसने बारीक अंतर से बीजेपी को हराया अभी उनको पता नहीं है भाजपा और चाणक्य की ताकत 2027 आते आते एक थी सपा ऐसा हाल हो जाएगा
अतीक और मुख्तार की औकात एक टुच्चे बदमाश गुंडे से ज्यादा नहीं थी ये तो यूपी के कुछ नमूने टाइप के नेताओं ने उसे बना दिया वरना यूपी में तब कोई अच्छी सरकार होती तो ये कब के किसी चौक चौराहे पर निपट गए होते
ये तो वोट बैंक ने नेता बना दिया वरना ऐसे लोगों की कोई हैसियत नहीं होती कहीभी
मोदी जी अपने परिवार के फर्स्ट जनरेशन नेता है इस से पहले उनके परिवार का कोई मुखिया या पंचायत का सदस्य तक नहीं था वैसा ही अमित शाह साहब का है वो भी मेहनत से बने नेता है कोई विरासत नहीं अटल जी हो आडवाणी जी जोशी जी भैरोसिंह कल्याणसिंह राजनाथसिंह इनके परिवार का कोई राजनीति में नहीं था
मोदी जी को हराना बिल्कुल आसान है लेकिन ये जो विरासत की पॉलिटिक्स वाले लोग है जैसे कि राहुल गांधी,अखिलेश,तेजस्वी,उमर अब्दुल्ला,अभिषेक बनर्जी,सुखबीर बादल,हनुमानबेनीवाल,उद्धवठाकरे,सुप्रिया सुले येकोई संघर्ष से बने हुए नेता थोड़ी है किसी बाप के बेटा बेटी है और ये नहीं हरा सकते मोदीको
अखिलेश यादव अगर मुलायम सिंह यादव के बेटे ना होते तो क्या वे कभी जिंदगी में इस मुकाम तक पहुंच पाते जहां वे है और आम यादव आज 6-7 जिले जहां से वो सांसद विधायक और mlc या जिलापंचायत बन सकता था उस पर एक विशेष परिवार का आज कब्जा है वहां पे दूसरे परिवारों के लिए कोई राजनीतिक अवसर नहीं
ओम प्रकाश राजभर जी में एक विशेष टैलेंट है और वो दूसरे किसी में नहीं है उनका टैलेंट ये हैं कि वो 30-40 जातियों के नाम एक स्वर में बिना रुके बोल लेते है और नासा समेत पूरी दुनिया इस पे रिसर्च कर रही है कि वो ऐसा बोल कैसे सकते है इतनी ज्यादा तेज मेमोरी आखिर खाते क्या है
राजा भैया जब मायावती जी की सरकार में 2 साल से ज्यादा जेल में रहे तो उन्होंने कभी भी जेल से बाहर आने के बाद ये नहीं कहा कि हमारे ऊपर अत्याचार हुए ये हुआ वो हुआ जबकि मुख्तार और आजम खान जेल जाने से पहले ही सहम गए थे कि ये हो जाएगा हमारी जान को खतरा है मतलब सत्ता का जिगर था असली नहीं