जब वयक्तिव बदलता है तो विचार बदलते हैं,,
जब विचार बदलते हैं तो मानसिकता बदलती है,,
जब मानसिकता बदलती है तो कर्म बदल जाते हैं,,
जिस दिन कर्म बदल गये तो समझ�� धर्म बदल गया ,,
क्योंकि कर्म ही धर्म है,,
विकास दूबे के गुर्गे अमर दूबे की मात्र सात दिन की जबरदस्ती की विधवा पत्नी,,
जो अमर दूबे से सादी नही क��ना चाहती थी ,,
क्या उसका हाथ विकास द्वारा किये गये पुलिस हत्या कांड में हो सकता है,,
जो उसको जेल भेज दिया गया, और विकास दूबे की हर काम की हमराह उसकी पत्नी को थाने से ही बरी कर ,