बिहार के लोग IAS-IPS बन कर दूसरे राज्यों को चला रहे, बिहार के लोग संपादक बनकर ज्यादातर चैनल-अख़बार चलाकर नैरेटिव सेट कर रहे। बिहार के लोग उद्यमी बनकर दूसरे राज्यों में छाए हैं। लेकिन, बिहार की राजनीति आज भी 90 के दशक के चाल से चल रही है। अधिकतर नेता, आज भी लकीर के फ़क़ीर ही बने बैठे हैं। बैठेंगे तो भोज-भात के आगे बात ही नहीं करेंगे। ऐसे में जब पढ़े-लिखे प्रशांत किशोर, सूबे में घूम-घूमकर देसी मुद्दों पर आवाज़ बुलंद करने लगे तो रोज़ी-रोटी की चाह में बिहार से बाहर रहने वाले हर वर्ग के बिहारी सोचने लगते थे कि कुछ भी हो….बात तो ये आदमी सही ही करता है। लेकिन, विधानसभा चुनाव में उन्हें अपनी विचारधारा की सरकार भी उन्हें चाहिए थी तो किसी ने श्रद्धा के अनुसार एनडीए तो किसी ने महागठबंधन को वोट किया। उन्हें लगता था कि पीके को देना, वोट ख़राब करना है। बिहारियों की नज़र में पीके बेचारा बनकर रह गए। लेकिन, जैसे ही उपचुनाव का मौका मिला, उस जनता ने नई बटन पर वोट डालने का प्रयोग कर दिखाया। ताकि प्रशांत को कम से कम इतना मिल जाए कि वो बिहार में डटे रहें और उनके मुद्दों को उठाते रहें। अब बिहार की जनता के पास केंद्र और राज्य की डबल इंजन की सरकार है, जो पिछड़ापन दूर कर सकती है और साथ ही सरकार पर दबाव रखने के लिए विपक्ष में एक मजबूत नेता भी।
इस देश के निष्पक्ष चुनाव नहीं होते, सब कुछ सेट है.
BJP जो सीट चाहती है, वो जीतती है - जो सीट चाहती है, वो हारती है.
EVM से लेकर चुनाव आयोग तक, सब कुछ सेट है.
पीके के मुकाबले भाजपा ने कमजोर चेहरा उतारा उसके बाद भी 44 हजार से ज्यादा वोट इसके प्रमाण हैं कि कोर वोटरों ने पूरी तरह से भाजपा का साथ नहीं छोड़ा. भाजपा के वोटरों में उदासीनता भी हार की एक प्रमुख वजह रही.
भाजपा को 44 हज़ार वोट से ज़्यादा मिल रहा है।
पिछली बार दूसरे नंबर पर रही राजद तीसरे पर खिसक गई है
भाजपा को हराने के लिए सारे विरोधी वोटर एकजुट हो गए। यह नैरेटिव पूरी तरह सही नहीं है कि कोर वोटर की वजह से बीजेपी की हार हुई। कोर वोटर ने सम्मानजनक वोट दिलाया है। जो वोट माहौल देखकर जुड़ता था, वह विकल्प की तलाश में पीके की तरफ़ गया। कोर वोटर में भी कुछ अलग -अलग कारणों से खिसके होंगे।
भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट ही हार गई। बांकीपुर से प्रशांत किशोर जी बड़े मार्जिन से जीत गए। उनको बहुत-बहुत बधाई।
भाजपा की ज़मीन पूरी तरह से खिसक चुकी है। चंदा चोरी, पेपर लीक, E20... मोदी सरकार के प्रति लोगों में गहरा असंतोष है। अहंकार टूटता जा रहा है। देश की जनता ने बदलाव का संकेत दे दिया है।
ना कभी झुका था ना झुका हूँ और ना झुकूँगा .शुक्रवार को पप्पू यादव सनातन के अपमान पर पूछे गए सवालों से बौखला कर इंटरव्यू छोड़कर भाग गए थे . अब मुझे 10 करोड़ का मानहानि का नोटिस थमा रहे है . नोटिस का जवाब दिया जाएगा . मेरे सवाल तथ्य पर आधारित थे .हमारे एडिटर चीफ दिलीप कुमार सिंह ने भी साफ़ कर दिया है कि फैक्ट्स के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा .
#pappuyadav
#SanatanaDharma
#सनातन_धर्म #सनातन_सभ्यता_संस्कृति
@livetimes_news
कालनेमियों से अंतिम सांस तक लड़ेंगे
संत, सनातन पर आघात करने वाले और राममंदिर लूटने वाले कालनेमियों ने
हम पर हमला कराया!
हम अपने सरकारी आवास पर प्रेस से बात
कर रहे थे तो BJP RSS संरक्षित कालनेमि ने
यह हमला कराया। हम हनुमान जी की राह पर
चलेंगे कालनेमियों को खदेड़ेंगे! जय सियाराम!
देखिए !
प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान इस तरह हुआ सांसद पप्पू यादव पर हमले की कोशिश… हमलावर दबोचा गया। सांसद सुरक्षित
इस तरह सांसद के घर में घुस कर हमला काफ़ी बड़े सवाल पैदा करता है!
सांसद पप्पू यादव पर किसी ने जूता फेंक दिया. सांसद जी और उनके समर्थक कह रहे हैं कि चाकू से जानलेवा हमला हुआ है. सांसद जी Z+ सुरक्षा मांग रहे हैं. बाकी आप स्वयं समझदार हैं...!!
सामान्य अपराधी होता तो सजायाफ्ता दंपत्ति के हाथों में कठोर हथकड़ियां होती. सजा पाने वाले पति-पत्नी सत्ता के हिस्सेदार हैं. इसलिए आम अपराधी की तुलना में विशेष अपराधी हैं. लेकिन अपराधी हैं. बेगूसराय के माथे पर एक और कलंक..!!
यह दृश्य देख जन्मना और अब आस्था से #हिन्दू होने के नाते मेरे मन में पहला सवाल उठेगा..
■ भगवा तो #निवृति के मार्ग का जीवन अनुशासन है? #सत्ता_भोग को लालायित ये कमजर्फ भगवा पहन कर क्या संदेश देना चाहते हैं?
यह वह स्वभाविक प्रतिक्रिया है जो #मौन साधे असंख्य हिंदुओं की है। भले सार्वजनिक मंच पर कोई विरोध ना करे।
@RahulGandhi जी एक नेक सलाह है, अपने आसपास जमा भीड़, चापलूसों को #मौन_भारत समझने की भूल ना करें।
वैसे कठिन दिनों में मेरी माँ ने मुझे पालते समय बहुत दिन तक घर में बर्तन स्वयं साफ़ किए और मुझे बताया भी कि कोई काम बड़ा छोटा नहीं है । न बर्तन न घर न फ़र्श की सफ़ाई। हर काम भगवान का रूप है ।
जो बर्तन साफ़ करते है मैं उनका भी सम्मान करता हूँ।
खैर भाजपा ने तो मुझे नाज़ और प्यार से कार्यालय में भोजन दिया एक परिवार की तरह।
और भाजपा ने कभी भी मेरे से ताहिर हुसैन जैसे आतंकी का character witness बनने के लिए नहीं कहा। यह चलन तो वन पे वन फ्री टाइप पार्टियों का होता है !