केन्द्र सरकार ने मई 2016 में अपनी आंबेडकरवादी नीतियों पर चलते हुए यौन अपराधों की शिकार अनुसूचित जाति व जनजाति की महिलाओं के लिए कानून में बदलाव किया था, जिसके तहत छेड़छाड़, पीछा करने या दुष्कर्म के प्रयास जैसे यौन अपराधों में मेडिकल टेस्ट का 20 वर्ष पुराना प्रावधान रद कर दिया गया था।
इसकी जानकारी कितने लोगों को है? सच-सच बताइए?
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बिहार चुनाव में पति ने पत्नी को दिया टिकट, ससुर ने बहू को दिया टिकट, समधी ने समधन को दिया टिकट, मामा ने भांजे को दिया टिकट! यही आधुनिक लोकतंत्र है!
पांच साल में स्नातक की डिग्री पाता, पलायन का दंश भोगता, ट्रेन में धक्के खाता, अन्य प्रदेशों के विकास के लिए मजदूर बना दिया गया बिहारी आखिर यह सब कब समझेगा?
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गृहमंत्री ने अपने बोल-वचन से साबित कर दिया कि चुनाव आयोग कठपुतली है! संवैधानिक संस्था होते हुए भी चुनाल आयोग का सभी निर्णय मोदी सरकार ले रही है और इसकी मंत्री जी सार्वजनिक घोषणा भी कर रहे हैं!
नरक चतुर्दशी की बधाई! अपने जीवन को नरक बनाने वालों को पहचानिए!
मोदी सरकार द्वारा 2015 में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किया गया था, जिसके बाद यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे क्रूरतम और एकतरफा कानून बन गया है! 2018 में इस पर सुप्रीम कोर्ट का वह निर्णय भी इस सरकार ने पलटा, जिसमें कहा गया था कि बिना जांच के SC/ST act में किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी!
नीचे का SS देखिए! यह नितिन मेसराम है। यह हिंदू धर्म और खासकर सवर्णों का भयंकर विरोधी एक नव-बौद्धवादी-आंबेडरवादी है! सरकार ने SC/ST act को क्रूर बनाने के लिए जो संशोधन का मसौदा तैयार करने वाली समिति का निर्माण किया था, उसमें इस नितिन मेसराम को शामिल किया था!
यह 2015 की बात है, जब हम सभी की आंखों पर कथित 'हिंदू हृदय सम्राट' की 'अंध-समर्थन' की पट्टी बंधी थी! लेकिन 'पसमांदा सुल्तान' आरंभ से ही स्पष्ट थे कि उन्हें क्या करना है?
वैसे आज रूप चौदस (छोटी दिवाली) है। पुराणों के अनुसार इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। आज की रात्रि यम देवता के लिए दीपदान किया जाता है और इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध भी किया था। अपने जीवन को नरक बनाने वालों को पहचानिये और भगवान श्रीकृष्ण के बताए रास्ते पर चलिए! आप सभी को नरक चतुर्दशी की ढेर सारी बधाई! जयश्री कृष्ण 🙏।धन्यवाद।
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सपरिवार आप सभी को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं! माता लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर बनी रहे, गणेश जी महाराज आपकी बुद्धि को हमेशा सनातन धर्म में लगाए रखें और भगवान श्रीराम आपको लक्ष्य साधने की शक्ति दें। जय माता लक्ष्मी 🪔
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सामान्य वर्ग अब भाजपाइयों को वोट देना बंद करे! इन्होंने देश में आरक्षण और जातिवाद का जहर घोल रखा है। हिंदुओं की एक जाति के विरुद्ध दूसरी जाति के मन में वैमनस्यता पैदा कर रहे हैं। हिंदू द्रोही हैं भाजपाई।
नव-बौद्धवादियों अर्थात् आंबेडकरवादियों के लिए "नीला कबूतर" आदि शब्द कोई हिंदू न लिखें! भाजपा की मप्र सरकार इस पर FIR दर्ज कर रही है। मप्र पुलिस ने FIR में साफ-साफ लिखा है कि सभी की सोशल मीडिया पोस्ट पर पुलिस की नजर है। समाचार समाप्त हुए। धन्यवाद।
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न केवल पूर्णिया (बिहार) में, बल्कि पूरे भारत में कोई भी हिंदू पाठशाला ऐसी नहीं है जो हिंदू छात्रों को रामायण, भगवद्गीता या अन्य हिंदू धार्मिक ग्रंथ औपचारिक रूप से पढ़ाए, जैसा कि मदरसे और कॉन्वेंट मुस्लिम व ईसाई छात्रों को उनके धार्मिक ग्रंथ पढ़ाते हैं। इसका कारण यह है कि भारतीय संविधान, जिसे हिंदू-विरोधी माना जाता है, हिंदुओं को उन समान अधिकारों से वंचित करता है जो मुसलमानों और ईसाइयों को प्राप्त हैं। वास्तव में, हिंदुओं को शिक्षा के संवैधानिक मौलिक अधिकार से वंचित किया गया है, क्योंकि अनुच्छेद 30 यह अधिकार केवल अल्पसंख्यकों (मुसलमानों और ईसाइयों) को प्रदान करता है।
दुर्भाग्यवश, जहाँ मुसलमान और ईसाई हिंदुओं के साथ होने वाले इस भेदभाव को समझते हैं, वहीं परम मूर्ख हिंदू स्वयं इस अन्याय के प्रति पूरी तरह अनभिज्ञ और उदासीन रहते हैं।
जन्म लेते ही अपने बच्चे को SC/ST Act और इस एक्ट की क्रूरता की जानकारी देना शुरू कर दीजिए, अन्यथा कोई ठीक नहीं कि पहली कक्षा में ही आपके बच्चे को इस एक्ट में फंसाने की कोई साजिश रच ले!
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Pic-1 एक नं लाकर भी राजस्थान में मिल गई मजिस्ट्रेट की नौकरी।
Pic-2 100% नंबर लाकर भी नहीं मिली नौकरी।
जोर-शोर से कहो, आरक्षण जिंदाबाद!
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उप्र पुलिस ने एक आतंकवादी को पकड़ा है! यह आतंकवादी एक छोटा बच्चा है, जिसने डॉ भीमराव आंबेडकर के एक पोस्टर पर दाढ़ी-मूंछ बनाने का अपराध किया है। इसे फांसी पर लटकाया जाए; तभी न्याय होगा, पिछड़े, दलित, नव-बौद्धवादी समाज के साथ! है कि नहीं?
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20 साल पहले जिसे अपने हाथों से लगाया था उस पेड़ के कटने के बाद फूट-फूट कर रोई माता जी,
सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल है लोग इसे प्रकृति के प्रति प्यार और भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं,
मामला छत्तीसगढ़ के सर्रागोंदी गांव का है, ग्रामीणों का आरोप है कि एक जमीन व्यापारी के इशारे पर इस पेड़ को काटा गया है, ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया, अब मामला प्रशासन की जानकारी में है।
RSS और CIA के संबंध-
अटल बिहारी वाजपेयी के 1960 के दशक में अमेरिकी कार्यक्रमों से जुड़ाव, और Atlantic Council व ACYPL के बीच संबंधों पर केंद्रित है। मैं इसे तथ्यों और परोक्ष संकेतों के आधार पर विश्लेषण करूंगा, जैसा कि आपने कहा कि परोक्ष तथ्य ही काफी हैं।
RSS में CIA की भूमिका (1950 से संबंध)
RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और CIA के बीच 1950 के दशक से संबंधों की बात अक्सर वैचारिक संरेखण और Cold War के संदर्भ में उठती है। 1947 में भारत की आजादी के बाद, Cold War शुरू हुआ, जिसमें अमेरिका और सोवियत संघ ने नव-स्वतंत्र देशों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। RSS, जो हिंदू राष्ट्रवाद पर आधारित थी और कम्युनिज़्म का कट्टर विरोधी था, अमेरिकी नीतियों के लिए एक संभावित सहयोगी बन सकती थी। 1948 में गांधी की हत्या के बाद RSS पर प्रतिबंध लगा, लेकिन 1950 के दशक में ये धीरे-धीरे मुख्यधारा में वापस आई। इस दौरान CIA ने भारत में कम्युनिस्ट प्रभाव को रोकने के लिए कई संगठनों पर नजर रखी और कुछ को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया।
परोक्ष तथ्य:
1950 के दशक में CIA ने भारत में खुफिया नेटवर्क बनाया, खासकर तिब्बत और चीन के खिलाफ। तिब्बती प्रतिरोध को समर्थन देने के लिए CIA ने भारत में बेस बनाए (जैसे चारबटिया, ओडिशा में U-2 जासूसी विमान संचालन)। RSS, जो सीमा क्षेत्रों में सक्रिय थी, संभवतः इस संदर्भ में CIA के रडार पर आई।
RSS के तत्कालीन सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर ने 1950-60 के दशक में पश्चिमी देशों से संपर्क बढ़ाने की कोशिश की, जो अमेरिकी हितों से मेल खाता था। हालांकि, कोई ठोस दस्तावेज़ नहीं है कि CIA ने RSS को सीधे फंड या निर्देश दिए।
1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण (JP) के आंदोलन में RSS की भागीदारी, जिसे अमेरिकी खुफिया तंत्र ने इंदिरा गांधी के सोवियत-झुकाव वाले शासन के खिलाफ देखा, एक और परोक्ष संकेत है। CIA ने JP के आंदोलन को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने की संभावना जताई थी।
निष्कर्ष: CIA और RSS के बीच सीधा संबंध सिद्ध नहीं है, लेकिन वैचारिक समानता (anti-communism) और भू-राजनीतिक संदर्भ में परोक्ष संपर्क संभव है। CIA ने RSS को एक उपयोगी सहयोगी के रूप में देखा होगा, खासकर कम्युनिज़्म के खिलाफ, पर इसका प्रमाण ज्यादातर परिस्थितिजन्य है।
अटल बिहारी वाजपेयी और 1960 के अमेरिकी कार्यक्रम
अटल बिहारी वाजपेयी, जो RSS के प्रचारक थे और बाद में जनसंघ के नेता बने, ने 1960 के दशक में अमेरिकी कार्यक्रमों से जुड़ाव दिखाया। विशेष रूप से, 1960 में वे U.S. State Department के International Visitor Leadership Program (IVLP) का हिस्सा बने। ये एक ऐसा प्रोग्राम था जिसमें उभरते हुए वैश्विक नेताओं को अमेरिका आमंत्रित किया जाता था, ताकि वे अमेरिकी मूल्यों, लोकतंत्र और विदेश नीति से परिचित हों। वाजपेयी उस समय जनसंघ के युवा नेता थे और उनकी यह यात्रा उनके राजनीतिक करियर के शुरुआती चरण में हुई।
IVLP का संदर्भ: ये Cold War के दौरान अमेरिका की soft power रणनीति थी। इसमें नेताओं को अमेरिकी जीवनशैली और नीतियों से प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। वाजपेयी की यात्रा से ये संकेत मिलता है कि अमेरिका उन्हें एक संभावित प्रभावशाली नेता के रूप में देख रहा था।
CIA कनेक्शन?: IVLP सीधे State Department चलाता था, लेकिन CIA अक्सर ऐसे कार्यक्रमों में रुचि लेती थी, क्योंकि ये भविष्य के सहयोगियों को पहचानने का मौका देते थे। कोई ठोस सबूत नहीं है कि वाजपेयी CIA के सीधे संपर्क में थे, पर उनकी प्रोफाइल—RSS से जुड़े, anti-communist—CIA के लिए आकर्षक रही होगी।
परोक्ष तथ्य: वाजपेयी की 1960 की यात्रा के बाद, जनसंघ ने पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने की नीति अपनाई, जो अमेरिकी हितों से मेल खाती थी। ये संयोग नहीं हो सकता कि उनकी यात्रा के बाद वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ज़्यादा सक्रिय हुए।
Atlantic Council और ACYPL का संबंध
Atlantic Council एक अमेरिकी थिंक टैंक है, जो 1961 में स्थापित हुआ और NATO के समर्थन में काम करता है। ये वैश्विक नीति, सुरक्षा और नेतृत्व पर केंद्रित है। ACYPL, जैसा कि पहले चर्चा हुई, State Department द्वारा फंडेड एक लीडरशिप एक्सचेंज प्रोग्राम है। दोनों के बीच औपचारिक संबंध का कोई स्पष्ट दस्तावेज़ नहीं है, लेकिन परोक्ष संकेत मजबूत हैं:
साझा लक्ष्य: दोनों अमेरिकी प्रभाव को बढ़ाने और वैश्विक नेताओं को U.S.-centric दृष्टिकोण से प्रभावित करने के लिए काम करते हैं। Atlantic Council नीति निर्माण करता है, जबकि ACYPL नेताओं को प्रशिक्षित करता है—ये पूरक भूमिकाएं हैं।