Mrityunjoy Chakraborty, IIT Kharagpur professor:
"every hedge fund, every trading bot, every bet you have ever made obeys three rules. Citadel pays $500,000 to people who truly understand them. this professor writes all three on a blackboard for free"
these are the axioms of probability, the ground rules sitting under all of it.
three simple statements. a probability is never negative. something is certain to happen. separate outcomes add up. that is the entire foundation.
get comfortable with these three and every model in finance becomes readable. skip them and you are just guessing with extra steps.
Chakraborty proves them from zero, slowly, in notation anyone can follow.
Wall Street rents you these rules for half a million a year. an IIT professor hands you the deed for nothing.
@TheAnuragTyagi Tyagi ji after doing 1 day process and following all the rules at Karauli sankar mahadev Kanpur dham 6 mahine baad doctor will be in shock.
देश के कोने-कोने से
जब युवा अपने घर, अपने परिवार को छोड़कर,
आँखों में सपने लिए हमारी Project Sites पर आते हैं
तो उनमें मुझे अपना ही सफ़र दिखाई देता है।
16 साल की उम्र।
मुंबई की ओर पहला कदम।
न माँ के हाथ का खाना।
न पिता की सुरक्षा का एहसास।
न कोई तय रास्ता।
बस मेहनत का हौसला
और हर दिन कुछ नया सीखने की चाह।
आज उन लाखों युवाओं में मुझे अपनी कहानी दिखाई देती है - जो घर से दूर हैं, अपनों से दूर हैं, लेकिन अपने पसीने से अपना भविष्य और भारत का भविष्य बना रहे हैं।
‘अपनी बात, अपनों के साथ’ की दूसरी बातचीत में कुछ ऐसी ही यादें, कुछ अनुभव और जीवन से मिली कुछ सीख।
यूपी प्रयागराज में सेप्टिक टैंक में काम करने के दौरान रजत शुक्ला और निहाल शुक्ला की मौत हो गई।
इनके घर की हालत देखिए ये करोड़पति ब्राह्मण थे?
ये हाल है ब्राह्मणों का, नाला-गटर साफ़ कर रहे है।
हंसी हंसी में सीखिये योगी से स्वास्थ्य के साधन।
वीडियो में नीचे जमीन पर श्री श्री रविशंकर भी बैठे हैं।
स्वामी देवमूर्ति जी की उम्र इस वीडियो के समय 106 वर्ष थी।उन्होंने 2011 में 108 वर्ष की आयु में शरीर त्यागा।
🕉️ स्वामी देवमूर्ति जी — वह योगऋषि जिनकी साधना की गूंज भारत से यूरोप तक पहुँची
आज जब योग को अक्सर केवल आसन, फिटनेस और शरीर को लचीला बनाने के माध्यम के रूप में देखा जाता है, तब स्वामी देवमूर्ति जी की योग-दृष्टि हमें योग के उस गहरे आध्यात्मिक स्वरूप की याद दिलाती है जिसमें शरीर केवल साधन है और लक्ष्य है — प्राण, मन और चेतना की साधना।
स्वामी देवमूर्ति जी 20वीं शताब्दी के उन अग्रणी भारतीय योगाचार्यों में थे जिन्होंने यूरोप में भारतीय योग, ध्यान और प्राणायाम की परंपरा को पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उसी दौर के थे जिसमें B.K.S. Iyengar जैसे महान योगाचार्य भी पश्चिम में योग को स्थापित कर रहे थे; लेकिन देवमूर्ति जी की विशेषता यह थी कि उनका जोर केवल आसनों पर नहीं, बल्कि योग के आंतरिक और अनुभवात्मक पक्ष पर था।
उनकी साधना में प्राणायाम, ध्यान, श्वास की शक्ति और चेतना का विकास विशेष महत्व रखते थे। उनके द्वारा सिखाई गई परंपराओं का प्रभाव यूरोप के योग-जगत में आगे उनके शिष्यों के माध्यम से भी दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, European Yoga Union के योग-इतिहास में J. Čumpelík को स्वामी देवमूर्ति जी का शिष्य बताया गया है।
यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि देवमूर्ति जी की शिक्षाएँ केवल “योगासन” तक सीमित नहीं थीं। उनकी दृष्टि में योग एक जीवंत आध्यात्मिक अनुशासन था—श्वास से प्राण तक, प्राण से मन तक और मन से चेतना की गहराइयों तक जाने की यात्रा।
आज के समय में जब योग विश्वभर में लोकप्रिय है, ऐसे अग्रदूतों को याद करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उन्होंने उस समय भारतीय योग की गहराई को दुनिया तक पहुँचाया जब पश्चिम में योग अभी अपनी पहचान बना ही रहा था।
🙏 स्वामी देवमूर्ति जी को नमन — उन साधकों में से एक, जिन्होंने योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण की साधना के रूप में दुनिया के सामने रखा।