Muslims living with Hindus = Problem.
Muslims living with Buddhists = Problem.
Muslims living with Christians = Problem.
Muslims living with Jews = Problem.
Muslims living with Sikhs = Problem
Muslims living with Baha’is = Problem.
Muslims living with Shintos = Problem.
Muslims living with Atheists = Problem.
Muslims living with Muslims = Big Problem.
This led to:
They’re not happy in Gaza.
They’re not happy in Egypt.
They’re not happy in Libya.
They’re not happy in Morocco.
They’re not happy in Iran.
They’re not happy in Iraq.
They’re not happy in Yemen.
They’re not happy in Afghanistan.
They’re not happy in Pakistan.
They’re not happy in Syria.
They’re not happy in Lebanon.
They’re not happy in Nigeria.
They’re not happy in Kenya.
They’re not happy in Sudan.
Where are they happy?
They’re happy in Australia.
They’re happy in England.
They’re happy in Belgium.
They’re happy in France.
They’re happy in Italy.
They’re happy in Germany.
They’re happy in Sweden.
They’re happy in the USA and Canada.
They’re happy in Norway and India.
They’re happy in almost every country that is not Islamic.
Whom do they blame? Not Islam. Not their leadership. Not themselves.
They blame the countries they are happy in.
They want to change the countries they’re happy in to be like the countries they came from, where they were unhappy.
देश के मुसलमान को CAA और NRC बुरा लगा वो रोड पर उतर कर विरोध करने आया ,
जब मस्जिद में लाउडस्पीकर हटाने की बात हुई तब मुसलमानों को बुरा लगा और वो सड़क पर विरोध करने आए ,
जब रोड पर नमाज बंद करने की बात हुई उन्हें बुरा लगा वो रोड पर विरोध करने आए ,
जब वक्फ कानून आया तब उनको बुरा लगा तो वो रोड पर उतरकर तोड़फोड़ की और विरोध दर्ज कराया ,
क्या उनको पहलगाम घटना बुरी नहीं लग रही जहां धर्म देखकर आतंकवादियों ने हत्या कर दी ? क्या वो इसका विरोध नहीं कर सकते ?
@PratikVoiceObc अबे गधे, चारा चोर चोट्टा लालू यादव के शासन काल में बिहार में नमक, किताब, बस, दवाई, सीमेंट, सरिया, गाड़ी, शराब, पेट्रोल पर टैक्स नहीं लगता क्या ??
ये जो देश भर तुम्हारी मुफ्तखोरी और हरमखोरी चल रही इसका पैसा क्या तुम्हारे जैसे लोग और पार्टियां क्या अपना घर बेच कर लाते हैं??
भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोसल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े पप्पू थे राजीव गांधी।
आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री भी थे..?
उनके पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे... उफ्फ माफ करना... वो पंडित नेहरू के नाती (नवासे) थे।
पूरा लेख कमेंट में है अंत तक पढ़िए....
5-7 मिनट लगेगा... पर आज राजीव गांधी के बारे में ऐसी बातें जानेंगे कि जो आपको पहले से पता नहीं होगीं..
पढ़िए 👇
@surya_samajwadi तुम्हारे फूफा पर अभी केस ही दर्ज हुआ है बस, आगे न्याय संगत सजा भी मिलेगी।
बाबा का राज है मुल्ला मुलायम या अक्ललेस का नही। खैर तुम्हारी गलती नही, जब तुम्हारे नेता ही मुस्लिम तुष्टिकरण में पैजामा खोल कर घूमते हैं तो, तुम सारे नमाजवादी तो टांग उठा कर घूमोगे और हिंदुओ पर गंदगी करोगे।
यें लोग ऐसी बातों से ही हमें बांटने का काम करते है। कभी हमारे धर्म की बुराई करेंगे कभी त्यौहारों की कभी देवताओं की। कई बार तो ये बोल बोल कर सामने वाले को सोचने पर मजबूर कर देते है कि वो सही धर्म मान भी रहे है कि नहीं। यहीं से धर्म परिवर्तन की शुरुआत भी होती है। परंतु अगर आप को अपने धर्म अपनी संस्कृति का ज्ञान होगा तो वो एक सवाल करेंगे आप ना केवल उन्हें उत्तर देने लायक होंगे बल्कि उनसे ऐसे 4 सवाल पूछेंगे जिनके उनके पास कोई जवाब नहीं होगा। यही हो रहा है इस वीडियो में भी। बाकी तो योगी बाबा की बात याद रखना एक है तो सैफ है।
Today at Prayagraj Railway station, a gentleman in his late 60s had a heart attack.
A GRP Jawan revived him in 5 mins.
Super proud of the Railway Police.
Please share this so that he can be acknowledged.
Akhilesh Yadav is doing nonstop outrage about VIP culture (obviously targeting the Mahakumbh).
Meanwhile, a 10 km-long traffic jam was created due to the VIP convoy of his wife. Even an ambulance was stuck there for long time.
@MamtaTripathi80@myogiadityanath@narendramodi@AmitShah ये वही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद हैं क्या जो अंबानी के घर में दावत पेलने गए थे ??
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में 2015 में वाराणसी में एक बाबा पर लठ बजवाया गया था, क्या ये वही हैं ??
@KraantiKumar पत्रकारिता के नाम पर तुम जैसे टुच्चे लोग हमेशा "जय भीम जय मीम" करते रहो ...
हासिल कुछ नही होता मीम के लिए सब काफिर हैं जो इस्लाम को नही मानते ... जामिया इस्लामिया और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में एससी एसटी के रिजर्वेशन का मुद्दा उठाने में तुम्हारे जैसे पत्तालकारो की फटती क्यों है ???
जिन इन्फ्लूएंजाज़ को गंगा के तट पर ‘टट्टी’ दिख रही है और वो चिंतित हो रही हैं कि ‘गंगा माँ को गंदा करते हैं ये लोग’, वो सहजता से यह भूल जाती हैं कि उनकी कमोड का पाइप भी किसी नदी में ही अंततः खाली होता है।
लेकिन जिन्हें लगता है कि दूध मदर डेयरी की पन्नी देती है, उन्हें गाय का गोबर देख कर भी उबकाई आएगी।
ट्विटर पर टट्टी करने वालों को गंगा किनारे किसी विवशता में (करोड़ लोग में कुछ सौ तो होंगे ही जो शौचालयों की व्यवस्था से अनभिज्ञ होंगे) की गई विष्ठा से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
गंगा के तट पर की गई गंदगी जल से बहा कर साफ की जा सकती है, पर कैमरा लगा कर कपड़े उतारने की मानसिक गंदगी को कोई दूर नहीं कर सकता।
Dear Mr Jha,
You need to read economic history and statistics to understand facts, not us BHAKTS.
India: Gross domestic product (GDP) in current prices from 1987 to 2029(in billion U.S. dollars), despite the stronger USD.
Now compare your Mohobat Ki Dukan concept with hardcore Governance of Development, Social Security and multiple opportunities.