मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त करीब ₹30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से ₹10 लाख करोड़ से अधिक के प्रस्ताव अब धरातल पर आ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर यह जानकारी साझा की।
#MohanYadav
जब शब्द सुरों में ढलकर देशभक्ति की अभिव्यक्ति बन जाते हैं, तो हर भारतीय का हृदय उनसे जुड़ जाता है।
सुनिए #KargilVijayDiwas के उपलक्ष्य में team stringmo sisters की यह भावपूर्ण प्रस्तुति...
'कार्यकर्ता ही संगठन की वास्तविक शक्ति है...'
पढ़िए, बैतूल विधायक श्री @Hkhandelwal1964 जी के मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में यशस्वी एक वर्ष पूर्ण होने पर विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित उनके साक्षात्कार!
#हमारे_हेमंत_जी
हैदराबाद में अभिनेता सोनू सूद ने ग्रामीण इलाकों के जरूरतमंद लोगों के लिए एक एम्बुलेंस भेंट की। इस दौरान उन्होंने कहा कि गांवों में कई लोगों को समय पर इलाज और एम्बुलेंस सुविधा नहीं मिल पाती, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
#SonuSood#Hyderabad#Healthcare
'स्वदेश ज्योति' का स्मरणीय पत्रकारिता संस्कार...
30 मई, 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता से 'उदंत मार्तण्ड' का प्रकाशन आरंभ किया था। इसी ऐतिहासिक क्षण ने हिंदी पत्रकारिता को जन्म दिया। आज, जब इस गौरवगाथा के 200 वर्ष पूरे हुए हैं, तब यह अपेक्षा स्वाभाविक थी कि देश के हिंदी समाचार पत्र अपने प्रथम पृष्ठ और मास्टहेड पर इस विरासत को विशेष सम्मान देते। हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता की आत्मा को स्मरण करने का दिन है।
दुर्भाग्य से, अधिकांश बड़े हिंदी समाचार पत्रों ने इस ऐतिहासिक अवसर को उसी गंभीरता और प्रतीकात्मक महत्व के साथ नहीं लिया जिसकी अपेक्षा थी। कई अखबारों ने लेख, संपादकीय और विशेषांक प्रकाशित किए, कुछ ने संगोष्ठियों और आयोजनों का समाचार भी दिया, किंतु अपने मास्टहेड पर 'उदंत मार्त्तंड' का उल्लेख कर उसे वह सर्वोच्च सम्मान देने का प्रयास नहीं किया जो किसी परंपरा के प्रति कृतज्ञता का सार्वजनिक प्रतीक होता।
ऐसे समय में यदि भोपाल से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वदेशज्योति' ने अपने मास्टहेड में 'उदंत मार्तण्ड' का उल्लेख कर हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी को रेखांकित किया, तो यह केवल एक संपादकीय निर्णय नहीं बल्कि ऐतिहासिक चेतना का परिचायक है। उसने यह संदेश दिया कि पत्रकारिता केवल समाचारों का व्यवसाय नहीं, बल्कि अपनी परंपरा, भाषा और वैचारिक विरासत के प्रति उत्तरदायित्व भी है।
विडंबना यह है कि हिंदी पत्रकारिता के बड़े संस्थान, जो प्रतिदिन भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना की बात करते हैं, वे अपने ही उद्गम बिंदु को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने में पीछे रह गए। यह प्रश्न केवल एक दिन के उत्सव का नहीं है; यह उस स्मृति-बोध का प्रश्न है जिसके बिना कोई भी परंपरा जीवित नहीं रह सकती।
हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्ष की यात्रा केवल तकनीकी विकास, प्रसार संख्या या डिजिटल विस्तार की कहानी नहीं है। यह जनजागरण, स्वतंत्रता चेतना, सामाजिक सुधार और भारतीय भाषाई स्वाभिमान की यात्रा है। उदंत मार्तण्ड उस यात्रा का प्रथम दीप था। यदि उसके द्विशताब्दी वर्ष पर भी हिंदी पत्रकारिता अपने प्रथम पुरोधा को अपने सबसे प्रमुख स्थान मास्टहेड पर स्थान नहीं दे पाती, तो यह आत्ममंथन का विषय अवश्य है।
इतिहास को केवल लेखों में नहीं, प्रतीकों में भी सम्मान दिया जाता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो आज स्वदेश ज्योति ने जो किया, वह एक स्मरणीय पत्रकारिता संस्कार है; और जो अधिकांश बड़े हिंदी समाचार पत्र नहीं कर पाए | आज इस अंक में मेरा भी एक लेख प्रकाशित हुआ है।
'स्वदेश ज्योति' के संपादक मंडल को हार्दिक बधाई!!
AI Generated: कीर्तिमान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बने सबसे लंबे समय तक सरकार के मुखिया रहने वाले नेता। 8,931 दिनों की बेमिसाल राष्ट्र सेवा के साथ तोड़ा पवन चामलिंग का रिकॉर्ड।
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#PMModi#WorldRecord#NewIndia#NationService
ॐ घृणि सूर्याय नमः"
"ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"
श्री सुर्य देव स्वास्थ्य, धन और सकारात्मक ऊर्जा के लिए जाप किए जाते हैं, खासकर सूर्योदय के समय जल अर्पित करते हुए. अन्य लोकप्रिय मंत्रों में "ॐ सूर्याय नमः", "ॐ भास्कराय नमः", और आदित्य हृदय स्तोत्र के अंश शामिल हैं, जो विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जपे जाते हैं.
तमिलनाडु में हिंदू अपनी हजारों साल पुरानी दीप जलाने की परंपरा का पालन कर सकें,इसको लेकर मद्रास हाइकोर्ट के न्यायधीश स्वामीनाथन ने अनुमति दे दी तो पूरे इंडी गठबंधन ने उनके खिलाफ महाभियोग की प्रकिया शुरू कर दी। प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे नेता अब यह भी नहीं चाहते कि कोई जज भारत के हिंदुओं को न्याय देने की "हिमाकत" कर सके ! #DoTook