भाजपा ने बैंकिंग को सूदख़ोरी से भी ज़्यादा बुरा बना दिया है?
जो भाजपा सरकार 2014 से बैंकिंग सुधार की बात कर रही है, वो पिछले 12 सालों में बदहाल बैकिंग से जुड़े अनगिनत सवालों मे से केवल निम्नलिखित 12 बिंदुओं पर ही अपनी सफ़ाई दे दे तो बैंकिंग की समस्याओं से जूझ रही आम जनता को कुछ तो तसल्ली होगी:
बारह साल, बारह सवाल:
1. खाते में पेनल्टी लगाकर आम जनता के पैसे काटने की अरबों रुपयों की लूट भाजपा सरकार ने क्यों करी?
2. विभिन्न सेवाओं जैसे SMS का पैसा, ATM का पैसा, खाता रखने का पैसा - हर महीने नये चार्ज के नाम पर मनचाही वसूली भाजपा ने क्यों शुरू करी? छोटे क़र्ज़दारों के घरों पर कुछ हज़ार रूपये के लिए वसूली एजेंट भेजकर, छोटे क़र्ज़दारों को बदनाम क्यों किया? दूसरी तरफ़ अरबपतियों के खरबों रुपए के लोन ले-देकर माफ़ करने का भ्रष्टाचार क्यों किया?
3. बुज़ुर्गों और पेंशन के जमा पैसे पर मिलनेवाले ब्याज पर अपना जीवनयापन करनेवाले मजबूर लोगों के हाथ में आनेवाले उस पैसे को क्यों कम किया जो उन्हें ब्याज के रूप में मिलता था। ब्याज दरों में कमी क्यों करी?
4. नोटबंदी के नाम पर नोटबदली का खेल खेलकर बैंकिंग सिस्टम को भ्रष्ट क्यों किया? आम जनता और बुज़ुर्ग महिलाएं तक अपने बचाए हुए पैसे बदलने के लिए लाइन में क्यों लगाया। इसके विपरीत अंदर पिछले दरवाजे से सेट कमीशन से काला धन सफेद क्यों करा गया?
5. अचानक बैंक के लॉकर से जनता की बहुमूल्य धातुएं, निवेश के प्रमाणपत्र व अन्य धरोहर आदि पिछले 12 सालों में ही क्यों गायब होने लगी। लॉकर-एग्रीमेंट के नाम पर जनता से स्टांप पेपर्स के ज़रिये करोड़ों की वसूली क्यों करी गयी? लॉकर का भाड़ा हर साल बढ़ा क्यों देते हैं? कई सालों का किराया एडवांस क्यों लेते हैं, पर चोरी हो जाने पर केवल 5 लाख रुपए लौटाने तक की ही गारंटी क्यों होती है?
6. बार-बार KYC का नाटक करके जनता के पैसे फँसाने का रहस्य क्या है? ऑनलाइन केवाईसी के फ़ेल होने की वजह क्या है? KYC के बिना खाता बंद करने का डर क्यों दिखाया जाता है? बुज़ुर्गों के फिंगर प्रिंट व आइरिस न मिलने के कारण केवाईसी न हो पाने की दिक़्क़त का जबाव कौन देगा? इस वजह से जिनकी पेंशन रुक जाती है, जिनका जमा पैसा फंस जाता है वो बेचारे क्या करें?
7. जानबूझकर बैंक को बीमार क्यों किया गया है? स्टाफ़ पर कामचोरी का आरोप लगाकर ईमानदार और सत्यनिष्ठ बैंक कर्मचारियों को योजना बनाकर क्यों बदनाम किया गया? सर्वर डाउन है, प्रिंटर ख़राब है, ओटीपी नहीं आ रहा, आज काम बहुत है कल आइएगा जैसी समस्याओं के नाम पर सालों से विश्वसनीय बैंकों को कमज़ोर क्यों किया गया और कमीशन लेकर बैंक बेचने का जुगाड़ क्यों किया गया?
8. डिजिटल बैंकिग के नाम पर जनता की परेशानी की कहीं कोई सुनवाई क्यों नहीं है? ऑनलाइन पैसा कट जाने, बैंकिग फ़्राड होने पर कोई भी सीधे बात करनेवाला क्यों नहीं रखा जाता है? कस्टमर केयर पर फोन क्यों नहीं लगता है और पैसे कट जाने के बाद पैसा लौटाने के लिए कोई ज़िम्मेदार क्यों नहीं है? भोले-भाले लोगों के खातों का फ़्राड के लिए दुरुपयोग करने के लिए कोई सुरक्षा कवच और जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाया जाता है?
9. आम जनता बच्चों की पढ़ाई, घर के लिए, काम-कारोबार को बढ़ाने के लिए कुछ लाख का लोन लेने के लिए आधार, पैन, गारंटर, CIBIL के चक्कर में फँसकर बैंकों के चक्कर काटती रहती है और कुछ भ्रष्ट लोग मिलीभगत कर बैंकों से अरबों रुपए का लोन आसानी से लेकर फ़रार भी हो जाते हैं। लोन में ऐसा भेदभाव क्यों?
10. खाता खुलवाने के नाम पर ज़बरदस्ती बीमा बेचने का लाभ किसकी जेब में जाता है? खाता खोलने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी, क्रेडिट कार्ड लेने व एफ़डी करवाने का दबाव क्यों बनाया जाता है?
11. सरकार बैंक के कर्मचारियों की कार्यदशाओं और सेवा शर्तों, त्रस्त ग्राहकों की खीझ का सामना करने से जुड़ी माँगों को नज़रअंदाज़ क्यों करती है? इस वजह से बैंककर्मियों को हर बार हड़ताल क्यों करनी पड़ती है? बैंककर्मियों के साथ सहानुभूति का रवैया क्यों नहीं अपनाया जाता है? सच तो ये है कि शहरी हो या ग्रामीण बैंकिग की समस्याएं सबकी शिकायतों और जन-आक्रोश का सामना उन्हें ही करना पड़ता है, जिसके कारण कभी-कभी अपमानजनक और हिंसक हालात पैदा हो जाते हैं। भाजपा सरकार बैंक के ग्राहकों और बैंक में काम करनेवालों की घोर उपेक्षा करते हुए उनके प्रति तिरस्कारपूर्ण शर्मनाक निंदनीय व्यवहार क्यों करती है?
अच्छे दिन का असली सपना देखिए…
आपने घर के लिए ₹1 करोड़ का लोन लिया।
भाजपा ने कहा -
“बस ₹3 हज़ार दे दीजिए, बाकी भूल जाइए… घर आपका!”
आप ख़ुशी से बोले
“वाह! अच्छे दिन आ गए!”
फिर नींद खुली…😅😅
क्योंकि अच्छे दिन आपके लिए थे ही नहीं।
ये सपना तो Zee वाले चंद्रा जी का था।
₹22,000 करोड़ का कर्ज़ → सिर्फ़ ₹6 करोड़ में ख़त्म।
आपकी ₹3,000 की EMI लेट हो जाए तो
बैंक फोन करता है।
ख़ास आदमी के ₹22,000 करोड़ डूब जाएँ तो
सेटलमेंट का रास्ता निकल आता है।
आम आदमी के लिए कर्ज़ = उम्रभर की EMI।
ख़ास आदमी के लिए कर्ज़ = करोड़ों की छूट।
और फिर कहते हैं -
“अच्छे दिन आ गए हैं!”
हाँ, आए हैं… लेकिन भाजपा के मित्रों के। 😏
@EurekaForbes Booked service on 30th June with service request no.-CM-300625-54382445, but still no technician has been appointed till now.What kind of service u r providing?What is your TAT for service?
@RelianceDigital more than 1 month has passed still there is no solution from your side.N number of times Called your cstmr care everytime technician came but withno solution, very pathetic service I will suggest everyone to not to purchase extended warranty from u it's a "scam".
@RelianceResQ more than 1 month has passed still there is no solution from your side.N number of times Called your customer care everytime technician came but withno solution, very pathetic service I will suggest everyone to not to purchase extended warranty from u it's a "scam".
@RelianceDigital Yesterday I complained about my service request but still there is no response from your end.This kind of service is provided by you?
The Complaint Reference Number is 701296174 and The Service Request Number is 8067240038.
विनेश फोगाट भारत की वो शेरनी जिसने आज बैक टू बैक मैच में
4 बार की World Champion और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन को हराया
उसके बाद क्वार्टरफाइनल में पूर्व World Champion को हराया
मगर एक बात बताऊं,
ये लड़की अपने देश में लातों से कुचली गई थी
ये लड़की अपने देश में सड़कों पर घसीटी गई थी
ये लड़की दुनिया जीतने वाली है मगर इस देश में सिस्टम से हार गई थी 😢
@RelianceResQ@RelianceDigital on 31.07.2024 I complained about my service request but still there is no response from your end.This kind of service is provided by you?
The Complaint Reference Number is 701296174 and The Service Request Number is 8067240038.
@RelianceResQ I have requested for repair on 25.07.2024 under extended warranty.Till date there is no response from your side.What is your response time?
बैंकों में अफ़सरों और कर्मचारियों ने एक के ऊपर एक तनाव लाद दिया है। टारगेट का आतंक मचाया हुआ है। जब से बैंक वालों पर बीमा करने का दबाव बढ़ा है तभी से और बर्बादी आई है। कई लोगों ने इसकी शिकायत की। एक साल बैंक सीरीज़ के नाम से इनके तनावों को दर्ज किया था। फिर बैंक के ही कुछ लोगों ने मना कर दिया कि आप हमारे लिए बात कर रहे हैं और उसी बैंक के भीतर लोग घोर सांप्रदायिक गालियाँ देते हैं । आप बंद कर दीजिए।मैंने बंद कर दिया। मैं तब से इसका जवाब नहीं खोज पाया कि इतने तनाव की नौकरी में किसी को एंटी मुस्लिम होने का यह हिन्दू सुख कहाँ से आता है? शायद वे अपने दफ़्तर के दुख को हिन्दू सुख से दूर करते होंगे। इनकी ये हालत इसी दस साल में हुई है लेकिन बहुत से लोग भयंकर रूप से नफरती प्रोपेगैंडा फैलाने में लगे हैं यह भी जानता हूँ।
इसके बाद भी व्यापक हित में इन पर जो क़हर टूट रहा है, वो दूर किया जाना चाहिए। बैंकों के भीतर काफ़ी कुछ सड़ गया है। बैंक वालों को इस गाली गलौज की नौकरी और नोटिस की नौकरी से मुक्ति मिलनी चाहिए।
लेकिन मुक्ति का रास्ता उन्हीं को खोजना होगा। पहले सांप्रदायिकता से बाहर आना होगा फिर नागरिकता में प्रवेश करना होगा।