हमने देखा कि बाँटना और बँटना दोनों आसान हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर बहुत सी चुप्पियाँ देखीं, और देखे मुखर वक्तव्य भी। ख़ासकर छात्र दो हिस्सों में बँट गए हैं। एक वो जिन्होंने UGC के नए रेगुलेशंस आने पर विरोध किया और दूसरे वो जो उसके समर्थन में सड़कों पर उतर आए।
Expansion of #EMRS is improving access to quality education, residential facilities, and holistic development for tribal students across the country.
#BudgetForViksitBharat#PBC2026
UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में “Equity Committee” का प्रावधान किया है—SC, ST के साथ OBC को भी इसमें शामिल किया गया है। यह फैसला यूँ ही नहीं आया। UGC खुद मानता है कि अब तक के “लचीले प्रावधान” कैंपसों में जातिगत अन्याय और भेदभाव को कम करने में नाकाम रहे हैं। और यह सिर्फ़ एक दावा नहीं, बल्कि आधिकारिक आँकड़ों से साबित सच्चाई है।
UGC के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118% से ज़्यादा बढ़ी हैं—173 से बढ़कर 378 तक। यह साफ़ बताता है कि समस्या “छिटपुट घटनाओं” की नहीं, बल्कि संरचनात्मक (structural) है। जब उत्पीड़न बढ़ रहा हो, तब सिर्फ़ जागरूकता, पोस्टर या संवेदनशीलता कार्यशालाओं से काम नहीं चलता; सख़्त, समयबद्ध और जवाबदेह प्रावधान ज़रूरी होते हैं। इसी कारण नए नियमों में 24 घंटे में समिति बैठक, 15 दिन में रिपोर्ट और 7 दिन में कार्रवाई की समयसीमा तय की गई है।
अब सवाल उठाया जा रहा है कि इसमें “सामान्य वर्ग” को क्यों नहीं शामिल किया गया। यह ठीक वैसा ही सवाल है जैसे महिला उत्पीड़न रोकने के लिए बनी Women Cell में पुरुषों को क्यों नहीं शामिल किया गया। वजह साफ़ है—जातिगत उत्पीड़न का ढांचा ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से SC/ST/OBC के खिलाफ बना है। यह बहिष्कार नहीं, बल्कि उस असमान यथार्थ की स्वीकारोक्ति है जिसे सदियों तक सामान्य बना दिया गया।
एक और तर्क दिया जा रहा है कि “इस नियम का दुरुपयोग होगा।” तो बताइए, ऐसा कौन सा कानून है जिसका दुरुपयोग नहीं हुआ? RTI, श्रम कानून, महिला सुरक्षा कानून—सबके दुरुपयोग के उदाहरण मिल जाएंगे। लेकिन दुरुपयोग की आशंका न्याय से इनकार का आधार नहीं हो सकती। वैसे भी UGC ने अंतिम नियमों में “फ़र्ज़ी शिकायत” वाला डराने वाला प्रावधान हटा दिया है, ताकि पीड़ित चुप न हों।
सच यही है कि जब बात SC/ST/OBC के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने की आती है, तभी ‘दुरुपयोग’ का शोर सबसे तेज़ हो जाता है। क्योंकि यह नियम किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को चुनौती देता है जिसने जातिगत असमानता को अब तक ‘नॉर्मल’ बना रखा था। कैंपस में समता भाषणों से नहीं, बल्कि सख़्त, जवाबदेह और लागू होने वाले नियमों से आएगी।
@ugc_india
UGC के नये प्रावधान के मुताबिक़ 'समता समिति' के सदस्य इस तरह से होंगे. अब ये कैसे साबित होगा कि ये सामान्य वर्ग के नहीं होंगे? कैसे ये समिति सामान्य वर्ग के सवर्णों के विरोध में है?
अफ़सोस कि बहुसंख्यक पिछड़े दलित इस सबसे वाक़िफ़ ही नहीं. सवर्ण विरोध कर रहे हैं, दलित पिछड़े सो रह हैं या धर्म बचाने में मशगूल होंगे! ऐसे मन झूठ और हेज़िमनी अपना झूठा नैरटिव खड़ा कर गया.
@ugc_india का प्रावधान शानदार है. समझने के लिए पूरा ड्राफ़्ट पढ़ें, तब मानें.
बुनियाद मज़बूत हो तो ढाँचा टिका रहता है। बुनियादी चीज़ें मुहैया हों तो वृद्धि और विकास के मायने सधे रहते हैं। लेकिन अब किसी को बुनियाद और बुनियादी चीज़ों की परवाह नहीं है। Basics के लिए अब कोई नहीं बोलता ना लड़ता। ज़हर की आदत हो गई है, किसी दिन आसमान नीला दिखेगा तो ख़ुश हो जाएँगे वरना गाड़ी निकालकर दफ़्तर जाएँगे और दफ़्तर से घर आयेंगे। हवा ख़राब है या साफ़ ये ख़बर देखेंगे और सो जाएँगे। मारे जाएँगे।
भाजपा OBC के लिए संविधान द्वारा निश्चित 27% आरक्षण में से 1/3 आरक्षण को नकारकर अपना असली ‘संविधान-आरक्षण विरोधी’ चेहरा दिखा रही है। अब नये नवेले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जी सामने आएं और ओबीसी आरक्षण की हक़मारी से बचाएं।
विवरण:
उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग लेखपाल भर्ती-
• कुल पद हैं - 7994
• OBC के लिए सिर्फ 1441 पद आरक्षित
• 27 % ओबीसी आरक्षण के हिसाब से कुल 2158 पद OBC के लिए आरक्षित होने चाहिए
• ओबीसी के 717 लेखपाल के पद की भर्ती होने से पहले लूट
• EWS को 10 परसेंट के हिसाब से पूरी 792 पोस्ट दी गयी हैं
• पिछले 5 साल में हुयी सभी भर्तियों में PDA के पदों की लूट हुई है ।
• ये पिछली 4 भर्तियों का लेखा जोखा है। इन सभी भर्तियों में 30 हज़ार से अधिक PDA पदों की लूट हुयी।
• इन सभी भर्तियों में चोरी पकड़े जाने के बाद सरकार ने तथाकथित कमिटी गठित की थी लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई केवल मीडिया मैनेजमेंट हुआ।
• क्या ये Anti-PDA सरकार बताएगी की वो आख़िरकार कब तक OBC/SC/ST आरक्षण की लूट करेगी।
- आरक्षण मारने के ‘Not Found Suitable’ जैसे ग़ैरक़ानूनी फ़ार्मूले को अब कोर्ट में चुनौती देने का समय आ गया है।
दरअसल भाजपा के एजेंडे में नौकरी है ही नहीं और पीडीए समाज के लिए तो बिल्कुल भी नहीं है।
भाजपा जाए तो नौकरी-भर्ती आए!
समाजवादी पार्टी के संस्थापक, देश के पूर्व रक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, 'पद्म विभूषण' श्रद्धेय नेताजी मा. मुलायम सिंह यादव जी की जयंती पर शत शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि!
#मुलायमसिंहयादव
I got a chance to experience Hyundai’s Nexo in South Korea. They claim that the by-product of this hydrogen car, which is water, is drinkable, so we tasted it too!
See how a hydrogen car works and how its fuel is filled.