💔 कैंसर से जंग हारने से पहले पिता ने अपने छोटे बेटे के लिए छोड़ा आख़िरी संदेश…
एक पिता, जो टर्मिनल कैंसर से लड़ रहा था, दुनिया छोड़ने से पहले अपने बेटे मंत्रा के लिए ऐसी बातें कह गया जिन्हें पढ़कर शायद आपकी भी आँखें नम हो जाएँ।
उसने बेटे से कहा— "हमेशा अपनी माँ की बात मानना, उनका ख़्याल रखना… और अपनी दोनों बहनों की हमेशा रक्षा करना।"
फिर उसने एक और बात कही जिसने लाखों लोगों का दिल छू लिया— "मैं कहाँ चला गया, ये मत पूछना… जब भी मेरी याद आए, समझना मैं हमेशा तुम्हारे पास हूँ।" ❤️🥺
कुछ रिश्ते मौत से नहीं टूटते… पिता का प्यार हमेशा बच्चों के साथ रहता है। 🙏
4700 करोड़ फूंककर?
> एक पूरी की पूरी आउटरेज गैंग आ गई है मार्केट में
> जो बेसब्री से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन का इंतज़ार करते हैं
> उद्घाटन होते ही माइक्रस्कोप लेकर निकल पड़ते हैं
> कहीं कोई 2 सेंटीमीटर की दरार दिख जाए, दो बूंद पानी जमा दिख जाए, एक ईंट खिसकी हुई दिख जाए
> बस शुरू, हजारों करोड़ बर्बाद कर दिए सरकार ने
> जमकर भ्रष्टाचार हुआ है इस प्रोजेक्ट में
> दो दिन रोने के बाद अगले प्रोजेक्ट की तलाश में निकल पड़ते हैं
कौन बताए, ग्रीनफील्ड हाईवेज में पहली बारिश में मिट्टी सेटल होना नार्मल है। इसका ये मतलब नहीं कि ऐसा होना ही चाहिए। दूसरी बात, 5 साल तक एजेंसी को मेंटेनेंस की जिम्मेदारी है, सरकार का पैसा नहीं लगेगा।
ये एक्सप्रेसवे अगले पचास साल तक चलेगा, जैसेकि आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे चल रहा है जिसमे पहली बारिश में ही 50 फीट गहरा गड्ढा हो गया था। (PIC2/3)
सबसे ख़तरनाक आंदोलन बिहार में हो रहा है
यहां पुलिस परेशान हैं कि रोके कैसे?
बैरिकेड को साईकिल कि तरह चला रहें हैं
वाटर कैनन चलाया तो पानी वाला डांस करने लगे
लोग खुद पुलिस से पुछ रहें हैं कि आंसू गैस कब चलेगा?
रस्सी से घेरा तो टग ऑफ वार खेलने लगें
गेट बंद किया तो गेट तोड़ दिया
जब लठ्ठ चलाया तो जन गण मन गाने लगें
आंदोलन पर भोजपुरी गाना बना दिया
बिहार का अलग ही अंदाज है।
उन्नाव : NH-27 पर वाहनों की संख्या में भारी गिरावट
➡लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू होते ही गिरावट
➡नवाबगंज टोल प्लाजा पर वाहनों में कमी आई
➡रोजाना 7 से 8 हजार वाहन कम गुजर रहे हैं
➡12-14 लाख तक के राजस्व का प्रतिदिन नुकसान
➡हाईवे किनारे होटल, ढाबा का कारोबार भी प्रभावित
#Unnao #LucknowKanpurExpressway #UttarPradesh @NHAI_Official
एक लड़का पहली बार बाइक से सिक्किम घूमने निकला था।
उसे लगा था कि बाइक उठाओ और सीधे घूमने निकल जाओ।
लेकिन बॉर्डर पर पहुँचकर उसे पता चला कि सिक्किम के कुछ इलाकों में बिना परमिट एंट्री ही नहीं मिलती।
तब उसे समझ आया कि नाथुला पास, गुरुडोंगमार लेक, ज़ीरो पॉइंट और जुलुक जाने के लिए पहले परमिट बनवाना पड़ता है।
अगर अपनी बाइक लेकर जा रहे हो,
तो बाइक आपके ही नाम पर रजिस्टर्ड होनी चाहिए।
साथ में Original RC, Driving Licence, Insurance और PUC भी होना जरूरी है।
अगर बाइक किराए की है,
तो उसका SK Series का होना जरूरी है।
दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी या दूसरे राज्यों से किराए पर ली गई बाइक इन परमिट वाले रूट्स पर नहीं चलती।
उसे एक और जरूरी बात पता चली।
इन पहाड़ी रास्तों पर आमतौर पर 150cc से कम क्षमता वाली बाइक और स्कूटी को अनुमति नहीं मिलती।
परमिट बनवाने के लिए
राइडर और पीछे बैठने वाले दोनों का Voter ID या Passport और 1 Passport Size Photo चाहिए।
यहाँ Aadhaar Card और PAN Card पहचान पत्र के तौर पर स्वीकार नहीं किए जाते।
उसने पहले हर जगह का अलग-अलग परमिट बनवाने का सोचा,
जिसमें करीब ₹2,100 खर्च हो रहे थे।
बाद में पता चला कि 5 दिन का Combo Permit सिर्फ ₹1,500 में बन जाता है।
उस दिन उसे एहसास हुआ कि
सिक्किम घूमने से पहले सिर्फ होटल और रूट की प्लानिंग नहीं, बल्कि परमिट और डॉक्यूमेंट्स की जानकारी भी उतनी ही जरूरी है।
अगर आप बाइक से सिक्किम जाने का प्लान बना रहे हैं, तो क्या ये सारी बातें पहले से जानते थे या आज पहली बार पता चली?
प्रबल प्रताप, आप बहादुर हीरो हो...!!
भारत के भ्रष्ट सिस्टम की मार से परेशान लोग आपको सलाम करते हैं,
आपने पुरानी परंपरा को तोड़कर— "योर ऑनर" (Your Honour) की जगह "मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट" (Mr. Judicial Servant) कहकर अपने करियर को दांव पर लगाया
और न्यायपालिका को उसकी असल जगह दिखाई आपने उन्हें याद दिलाया कि वे भारतीय न्यायपालिका और भारत के लोगों के सेवक हैं नाकि राजा....।
आपने सिस्टम के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत दिखाई है आप इस देश के 1.4 अरब लोगों की मौजूदा स्थिति और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
धन्यवाद, प्रबल प्रताप। 🙏🏻🫡🇮🇳
We Have Won! No one can use ‘ORS’ on their label unless it’s a WHO-recommended formula.
This is the story of Dr. Sivaranjani Santosh, a braveheart paediatrician from Hyderabad, who fought for 8 years against sugar-rich drinks falsely marketed as ORS.
Her persistence led to FSSAI’s landmark order, protecting children and patients from misleading claims.
“These drinks had 10x the sugar WHO recommends, worsening diarrhoea and complications in millions of kids,” she explains.
This victory is not just hers, but belongs to everyone who stood with her — doctors, advocates, parents, and citizens demanding truth in labeling.
Scroll down to see how her 8-year battle changed the game for public health and children across India.
Credits : drsivaranjanionline on IG
#HealthVictory #PublicHealthIndia #ChildSafety #TruthInLabelling #FSSAI #DoctorsForChange #IndiaFightsBack
[ORS Ban India, Dr Sivaranjani Santosh, FSSAI Order, Public Health Victory, Sugar Drinks Misleading Labels]
A woman divorced her first husband and received ₹20 lakh in alimony.
She then married a rich man, enjoyed a luxurious lifestyle for 18 months and divorced him as well.
She demanded ₹12 crore, ₹5 lakh per month and a BMW in alimony, but the court finalized the settlement at a flat ₹4 crore.
Investment: 4 years of marriage (across two husbands)
Return: Approx ₹5 crore, that’s ₹10.42 lakh per month.
Divorce is the new startup 🚀
Our country’s empowerment woman
So called Sashakt Naari..
The daughter played quite a game…
For a job, she ended up taking down her own father.
Some stories are stranger than fiction.
A story that leaves many speechless.
स्पोर्ट्स ऐंकर, स्पोर्ट्स पत्रकार, गायक और गीतकार , पदमजीत सहरावत जी की पहचान सिर्फ़ उनके काबिलियत से ही नहीं है, बल्कि उस लड़ाई से भी है जो उन्होंने अपने ही मन के अंदर लड़ी।
एक समय ऐसा आया जब डिप्रेशन ने उन्हें इस हद तक तोड़ दिया कि उनके मन में बहुत बड़ा कदम लेने का फैसला उठ चुका था,लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ये बातचीत सिर्फ़ पदमजीत की कहानी नहीं है…शायद उन लोगों के लिए एक उम्मीद है जो चुपचाप अंदर ही अंदर लड़ रहे हैं।
Full Episode
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