तकफ़ीरी संगठन इस्लाम के हुक्म के सरासर ख़िलाफ़ अमल कर रहे हैं। इस्लाम ने मुसलमानों से कहा है कि कुफ़्फ़ार से दुश्मनी रखें और आपस में मेहरबान रहें, “कुफ़्फ़ार पर सख़्त और आपस में मेहरबान हैं.” (सूरए फ़तह आयत 29)
#Syria
मैं, अपने अज़ीज़ जनाब सैयद सफ़ीउद्दीन की शहादत पर उनके आदरणीय घर वालों, रिश्तेदारों और रेज़िस्टेंस मोर्चों पर लड़ने वाले उनके साथियों की सेवा में मुबारकबाद और सांत्वना पेश करता हूं।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन सैयद हसन नसरुल्लाह की शहादत के बाद और तूफ़ान अलअक़सा आप्रेशन की पहली सालगिरह के मौक़े पर 4 अक्टूबर 2024 को तेहरान की नमाज़े जुमा मुसल्ला-ए-इमाम ख़ुमैनी में रहबरे इंक़ेलाब की इमामत में अदा की गई।
हम उम्मीद करते हैं कि अल्लाह की तौफ़ीक़ से, ईरानी राष्ट्र के बुलंद हौसले से, इंक़ेलाब से मिलने वाली सीख को इस्तेमाल करके और दूसरे राष्ट्रों के सहयोग से हम इलाक़े को दुश्मनों के अभिषाप से नजात दिलाएंगे।
अगर अमरीका और कुछ यूरोपीय देश पश्चिमी एशिया के इलाक़े को अपने अभिषाप से नजात दे दें तो यक़ीनन यह झड़पें और यह जंगें ख़त्म हो जाएंगी। इलाक़े के देश आपस में सुलह और शांति के साथ जीवन गुज़ार सकते हैं।
हमारे इलाक़े में मुश्किल की जड़, यानी झड़पों और जंगों की अस्ली वजह उन तत्वों की मौजूदगी है जो इलाक़े की शांति व सुरक्षा का दम भरते हैं, यानी अमरीका और कुछ यूरोपीय देश।
इन दिनों हम सोगवार हैं, ख़ास तौर पर मैं बहुत शोक में हूं। जो घटना हुई है वो मामूली नहीं है। सैयद हसन #नसरुल्लाह का चला जाना मामूली वाक़या नहीं है। वाक़ई इस घटना ने हमें सोगवार कर दिया।
हजरत अली अकबर (अ.स.) अपने पिता इमाम हुसैन (अ.स.) को कहते है की |
"इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मौत हमारे पास आए या हम मौत के करीब पहोंचे... जब तक हम सही हैं।"
#Nasrallah#Hezbollah#Lebanon
सभी मुसलमानों पर वाजिब है कि वे अपने संसाधनों के साथ लेबनान के लोगों और सरबुलंद हिज़्बुल्लाह के साथ खड़े हों और क़ाबिज़, ज़ालिम और दुष्ट सरकार से मुक़ाबले में उसकी मदद करें।
लेबनान के लोग नहीं भूले हैं कि कभी क़ाबिज़ सरकार के सैनिक बैरूत तक दनदनाते फिरते थे, यह हिज़्बुल्लाह ही था जिसने उनके पैर काट दिए थे और लेबनान को प्रतिष्ठित और सरबुलंद बना दिया। आज भी लेबनान, अल्लाह की मदद और समर्थन से, हमलावर, दुष्ट और कुख्यात दुश्मन को पछताने पर मजबूर कर देगा।