विपक्ष के नेता श्री @RahulGandhi जी को सालगेरह की दिली मुबारकबाद , नेक ख्वाहिशात।
आप हाशिये पर खड़े आम लोगों की मज़बूत आवाज़ और उम्मीद हैं। देश के बेहतर भविष्य के लिए आपके लगातार संघर्ष के बीच, हम आपकी अच्छी सेहत और मज़बूती की दुआ करते हैं।
#happybirthday#RahulGandhi
एक बार फिर से NEET UG की परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी को लेकर खबरें छप रही हैं। भाजपा राज में पिछले कई साल से परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार देश के युवाओं से उनका भविष्य छीन रहा है। इस बार भी तकरीबन 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।
NEET जैसी परीक्षाओं के लिए बच्चे जी-जान से मेहनत करते हैं। माता-पिता अपना सबकुछ दांव पर लगाते हैं ताकि बच्चों का भविष्य बने। लेकिन हर परीक्षा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। संसद में पेपर लीक के खिलाफ लाये गये कथित सख्त कानून का क्या फायदा हुआ अगर ज़मीनी तौर पर वही भ्रष्टाचार जारी है?
प्रधानमंत्री जी देश के युवाओं के प्रति जवाबदेह हैं। युवाओं का भविष्य बर्बाद करने का यह सिलसिला कब तक चलेगा?
Some in the Congress, and others, are gloating about TMC’s loss.
They need to understand this clearly - the theft of Assam and Bengal’s mandate is a big step forward by the BJP in its mission to destroy Indian democracy.
Put petty politics aside. This is not about one party or another. This is about 🇮🇳.
गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में एक लड़की की हत्या के मामले में पहले केस दर्ज होने में आनाकानी, फिर पीड़ित परिवार को धमकियां मिलना और दबंगों द्वारा अराजकता फैलाना यह दिखाता कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार चरम पर है। भाजपा राज में अब यही अघोषित कानून बन गया है कि जब भी किसी महिला पर अत्याचार होता है तो पीड़ित को ही और प्रताड़ित किया जाता है।
महिलाओं को लेकर प्रधानमंत्री जी की बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ दिखावा हैं। उन्नाव हो, हाथरस हो, प्रयागराज हो या गाजीपुर, जहां भी महिलाओं के साथ अन्याय हुआ, भाजपा अपनी पूरी सत्ता के साथ पीड़िता के खिलाफ, अत्याचारी के साथ खड़ी हो गई। देश भर की महिलाएं ये अंधेरगर्दी देख रही हैं।
यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि भाजपा के संरक्षण में फैलते गुंडाराज का खतरनाक उदाहरण है।
बदायूँ के रुदायन क्षेत्र में निर्दोष नागरिकों के साथ हुई घटना के पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी बात सुनी और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस-प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। यदि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।
सभी साथियों से आग्रह है कि दिनांक 17 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण विधानसभा घेराव में अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराएँ। यह घेराव श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर केंद्रित है। हमारी एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
श्रमिक हितों की रक्षा, सामाजिक न्याय और जनहित के संकल्प को मजबूत करने के लिए आपका सहभाग अत्यंत आवश्यक है। आइए, हम सब मिलकर श्रमिक वर्ग की आवाज़ को बुलंद करें और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाएँ।
आपकी सक्रिय भागीदारी संगठन को शक्ति देगी और हमारे सामूहिक उद्देश्य को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
डरिए मत, मोदी जी
सदन में लोकसभा स्पीकर के पीछे छिपकर वार मत करिए। काहे का 56 इंच का सीना, जब आलोचना से भाग रहे हैं और विरोध प्रदर्शन से डर लग रहा है?
खुद को बचाने के लिए बिकाऊ गोदी मीडिया की पूरी टोली लगा दी है, लेकिन झूठ का पर्दा नहीं टिकेगा।
RCA की स्थापना UGC और अल्पसंख्यक मंत्रालय के तहत हाशिए पर पड़े समाज के उत्थान के लिए हुई थी।
बेहद शर्म की बात ये है कि इस तरह की घटिया मानसिकता वाला यह व्यक्ति कभी भारत का प्रतिनिधित्व करता था, ज़रा पढ़ लिए होते और जानकारी हासिल की होती तो इस तरह का ट्वीट नहीं करते।
NSUI welcomes the UGC Regulations on Caste-Based Discrimination as a necessary step towards addressing discrimination on campuses across the country.
However, NSUI firmly asserts that the proposed committee must not remain symbolic or administrative in nature. It must include mandatory representation of students from SC, ST, and OBC communities, along with teaching faculty from SC, ST, and OBC backgrounds. To ensure independence, transparency, and credibility, serving or retired judges must also be included in the committee.
The current UGC regulations remain silent on the leadership and composition of this committee. NSUI believes that any attempt to create a puppet committee controlled by university administrations would defeat the very purpose of equity and justice.
Past experience shows that several such committees, particularly those addressing gender discrimination, have often been reduced to mere showcases, failing to effectively address complaints or deliver justice.
The alarming vacancies in SC, ST, and OBC teaching positions due to NFS and non-implementation of reservation policies, coupled with high dropout rates and tragic cases of student suicides in IITs, IIMs, and Central Universities, highlight the urgent need for meaningful intervention.
This is the moment to collectively confront discrimination in higher education in all its forms.
NSUI is clear that the UGC must constitute a strong, independent, and empowered committee that works on the ground, ensures accountability, and delivers real justice.
NSUI stands unequivocally against all forms of discrimination, whether based on caste, gender, or any other identity, in universities and colleges.
लोकतंत्र समाज को व्यवस्थित करने का एक ऐसा तरीका है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity) के मूल्यों पर आधारित हो।
~ डॉ बीआर अम्बेडकर
#RepublicDay
ऐसे हैं हमारे नेता जननायक श्री @RahulGandhi जी
संविधान को कमजोर करने और आरक्षण पर लगातार हमलों के इस दौर में, जननायक राहुल गांधी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की आवाज़ बनकर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए दीवार की तरह खड़े हैं।
आज देश के अधिकांश शिक्षण संस्थानों पर RSS का कब्ज़ा है। बहुजन समाज को शिक्षा और नौकरियों से दूर करने की साज़िशें जारी हैं। जाति जनगणना को “देश तोड़ने वाला” और “असंभव” बताने वालों को राहुल गांधी ने अकेले दम पर जवाब दिया और झुकने पर मजबूर किया।
SC-ST, पूर्वोत्तर और महिला छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ वे लगातार आवाज़ बने। रोहित वेमुला एक्ट को कांग्रेस शासित राज्यों में लागू कराया।
CAA-NRC, बुलडोज़र राज और राज्य प्रायोजित ज़ुल्म के खिलाफ अगर कोई मजबूती से खड़ा रहा, तो वह नाम राहुल गांधी है।
भट्टा-परसौल से मंदसौर तक, जहाँ-जहाँ किसानों के हक़ छीने गए, राहुल गांधी सड़कों पर उतरे। किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत भूमि अधिग्रहण कानून लाने का काम किया।
हाथरस से कठुआ तक, हर बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध पर न्याय की आवाज़ बुलंद की। लॉकडाउन के दौरान जब प्रवासी मज़दूर सड़कों पर भटक रहे थे, तब मदद का हाथ बढ़ाने और उन्हें घर पहुँचाने की व्यवस्था भी राहुल गांधी ने की। नोटबंदी और GST से आम जनता को हो रही परेशानियों को संसद से सड़क तक उठाया।
जब देश को नफ़रत की आग में झोंकने की कोशिश हुई, तब 3600 किलोमीटर से ज़्यादा पैदल चलकर मोहब्बत, संविधान और भाईचारे का संदेश दिया। बेरोज़गार युवाओं पर लाठियाँ बरस रही थीं, तब वे उनकी आवाज़ बने।
महँगाई से जनता पिस रही है, तो संसद में उनकी मज़बूत आवाज़ बनकर लड़ रहे हैं। देश की संपत्ति जब 2-3 चुनिंदा उद्योगपतियों को सौंपी जा रही है, तब कॉरपोरेट और सरकार की मिलीभगत का सच देश के सामने रखा।
मणिपुर से कश्मीर तक, हर पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने का साहस सिर्फ़ राहुल गांधी ने दिखाया।
अग्निवीर योजना के ज़रिए जब भारतीय सेना और युवाओं को कमजोर किया, तो राहुल गांधी उनकी आवाज बने।
हम जैसे देश के लाखों नौजवान, जो आम पृष्ठभूमि से आते हैं और जिनके पास कोई पारिवारिक राजनीतिक विरासत नहीं, उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने वाला भी नाम है - राहुल गांधी।
सत्य, साहस, करुणा, ईमानदारी, प्रेम, शांति, न्याय, धैर्य, क्षमा, अहिंसा, सहिष्णुता, समर्पण, संकल्प और निर्भीकता -
इन सबका नाम है राहुल गांधी।
Was this unauthorised entry into private property? No.
Was any complaint filed by the owner of property? No.
This case is a clear-cut violation of Article 25 of the Indian Constitution, which guarantees every citizen fundamental right to freely practice their religion.