लाख कोशिश करने के बावजूद जो ख्वाब हम संजोते है, एक दिन टूट ही जाते है, मैंने ये महसूस किया है एक दिन इन ब��तो का सिलसिला टूट ही जाता है, सारे ख्वाब टूट के बिखर जाते है, खैर!...आज तक जवाब नहीं मिला किसकी गलती थी या किसी की भी नही शायद किस्मत ने एक और रिश्ते को अधूरा छोड़ रखा था...!
माँ सर्दियों में स्कार्फ़ या दुपट्टे से अपना सर ढक दिया करती थीं… सोते वक़्त भी इसे अलग नहीं करती.. कहा करतीं- सिर, पैर, सीना ढक दिया तो सर्दी का बाप भी कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा… दिलचस्प बात ये है कि मैं भी अब यही करने लगी हूँ… मैं ‘माँ’ हो गई हूँ
माँ सर्दियों में स्कार्फ़ या दुपट्टे से अपना सर ढक दिया करती थीं… सोते वक़्त भी इसे अलग नहीं करती.. कहा करतीं- सिर, पैर, सीना ढक दिया तो सर्दी का बाप भी कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा… दिलचस्प बात ये है कि मैं भी अब यही करने लगी हूँ… मैं ‘माँ’ हो गई हूँ
तूने बक्शे हैं जो औजार कहां रखूंगा,
ये गिरे गुंबद और मीनार कहां रखूंगा?
मेरे घर में हैं किताबों से भरे कमरे,
सोच! इसमें हथियार मैं कहां रखूंगा?
अपने बच्चों से तो हर जुल्म छुपा लूंगा मगर,
सोच 6 दिसंबर के अखबार में कहां रखूंगा।
#6december
जब एक व्यक्ति अपने समाज के दबे कुचले लोगों कि आवाज़ बनता हैं सरकार कि गलत नीतियों को कटघरे में खड़ा करता है तो वही हमारी अदालत को भड़काऊ दिखता है आज़म ख़ान साहब पर हुई कार्यवाही देशभावना से कि गई हैं जितनी निंदा कि जाय कम है @yadavakhilesh@samajwadiparty@AbdullahAzamMLA