जब दुःख असहनीय होने लगा,तो मैंने ख़ुद को सबसे दूर कर लिया मैं अपनी ही तन्हाइयों में इतना खो गया कि परछाई का होना भी दुर्लभ लगने लगा सालों बाद जब मैंने नज़र उठाकर देखा,तो पाया कि तुम यही थे चुपचाप,धैर्य के साथ मुझे फिर से मुस्कुराना सिखाने की कोशिश करती हुई...!
जब दुःख असहनीय होने लगा,तो मैंने ख़ुद को सबसे दूर कर लिया मैं अपनी ही तन्हाइयों में इतना खो गया कि परछाई का होना भी दुर्लभ लगने लगा सालों बाद जब मैंने नज़र उठाकर देखा,तो पाया कि तुम यही थे चुपचाप,धैर्य के साथ मुझे फिर से मुस्कुराना सिखाने की कोशिश करती हुई...!
तुमसे दूर रहना और तुम्हें अपने पास रखना दोनों ही कितने आसान,और दोनों ही कितने कठिन हैं दूर होकर भी तुम बातों, तस्वीरों और कॉल के सहारे मेरे साथ रहते हो लेकिन तुम्हें अपने पास रख पाना बस उतनी ही देर मुमकिन होता है,जितनी देर हमारी बातचीत चलती है जैसे ही बात ख़त्म होती है,1/2
एक ही घटना हर व्यक्ति को अलग ढंग से प्रभावित करती है जैसे वर्षों तक शिक्षा देने वाले अध्यापक के सभी छात्रों का जीवन एक जैसा नहीं होता सीख सबको एक-सी मिलती है,लेकिन उसे समझने,अपनाने और उससे अपना भविष्य गढ़ने का तरीका हर किसी का अलग होता है...!
एक ही घटना हर व्यक्ति को अलग ढंग से प्रभावित करती है जैसे वर्षों तक शिक्षा देने वाले अध्यापक के सभी छात्रों का जीवन एक जैसा नहीं होता सीख सबको एक-सी मिलती है,लेकिन उसे समझने,अपनाने और उससे अपना भविष्य गढ़ने का तरीका हर किसी का अलग होता है...!
मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि सोशल मीडिया पर इतने साल बिताने के बाद भी मैंने अपनी असली पहचान को अपने पास ही रखा है इस दौर में जहाँ लोग दिखने के लिए सब कुछ साझा कर देते हैं,मैंने खुद को गुमनाम रखकर भी अपनी मौजूदगी बनाए रखी है...!
मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि सोशल मीडिया पर इतने साल बिताने के बाद भी मैंने अपनी असली पहचान को अपने पास ही रखा है इस दौर में जहाँ लोग दिखने के लिए सब कुछ साझा कर देते हैं,मैंने खुद को गुमनाम रखकर भी अपनी मौजूदगी बनाए रखी है...!
मेरी बस एक ही इच्छा है कि तुम्हारे साथ पहाड़ों की सैर पर जाऊँ,और हमारे हाथों में वह किताब हो जिसमें हमारे जीवन की कहानियाँ लिखी हों तुम उन्हें पढ़कर मुझे सुनाओ,और मैं तुम्हारी गोद में सिर रखकर उन वादियों में कहीं खो जाऊँ फिर जीवन यूँ ही पूर्ण हो जाए बस यही मेरी इच्छा है...!
मेरी बस एक ही इच्छा है कि तुम्हारे साथ पहाड़ों की सैर पर जाऊँ,और हमारे हाथों में वह किताब हो जिसमें हमारे जीवन की कहानियाँ लिखी हों तुम उन्हें पढ़कर मुझे सुनाओ,और मैं तुम्हारी गोद में सिर रखकर उन वादियों में कहीं खो जाऊँ फिर जीवन यूँ ही पूर्ण हो जाए बस यही मेरी इच्छा है...!
इसमें डरने की कोई बात नहीं मौत तो सबकी तय है,बस वक्त की घड़ीथोड़ी आगे-पीछे होती है,मंज़िल सबकी एक है,फर्क इतना है कि कोई पहले पहुँचता है,कोई बाद में यही सच्चाई हमें सिखाती है कि सफ़र को मायने दो,हर सांस को महसूस करो,क्योंकि अंजाम तो एक ही है,पर जीने का ढंग हमें खुद तय करना है...!
इसमें डरने की कोई बात नहीं मौत तो सबकी तय है,बस वक्त की घड़ीथोड़ी आगे-पीछे होती है,मंज़िल सबकी एक है,फर्क इतना है कि कोई पहले पहुँचता है,कोई बाद में यही सच्चाई हमें सिखाती है कि सफ़र को मायने दो,हर सांस को महसूस करो,क्योंकि अंजाम तो एक ही है,पर जीने का ढंग हमें खुद तय करना है...!
हर इंसान नशा करता है यहाँ कोई ख़्वाबों में डूबा है,कोई दौलत में,कोई मोहब्बत में फ़र्क बस इतना है कि मेरे नशे का रंग छुपा नहीं रहता,उसमें रंगीन पानी साफ़ दिखाई दे जाता है वरना सच तो यह है कि इस दुनिया में कोई न कोई नशा हर इंसान अपने भीतर लिए फिरता है...!
हर इंसान नशा करता है यहाँ कोई ख़्वाबों में डूबा है,कोई दौलत में,कोई मोहब्बत में फ़र्क बस इतना है कि मेरे नशे का रंग छुपा नहीं रहता,उसमें रंगीन पानी साफ़ दिखाई दे जाता है वरना सच तो यह है कि इस दुनिया में कोई न कोई नशा हर इंसान अपने भीतर लिए फिरता है...!