आख़िरकार हौसले की जीत हुई! सलाम है बहन कुलसुम बानो को। 🫡
जब सिर्फ़ बुर्क़े और दुपट्टे की वजह से NEET परीक्षा केंद्र पर उन्हें रोकने की कोशिश की गई, तब उन्होंने चुपचाप लौटने के बजाय अपने अधिकार और सम्मान के लिए आवाज़ उठाई। न डरीं, न झुकीं, न पीछे हटीं।
पूरी जांच और नियमों के पालन के बाद उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली। यह उन लोगों के लिए भी जवाब है जो हर बार मुस्लिम पहचान को शक की नज़र से देखते हैं।
कुलसुम बानो की जीत सिर्फ़ एक छात्रा की जीत नहीं, बल्कि अपने हक़, अपनी पहचान और अपने आत्मसम्मान के लिए डटकर खड़े होने की जीत है।
सलाम है इस हौसले को। 🫡🔥
RT रुकने नहीं चहिये इससे दूसरी बेटी को himmat milegi