Agar sarkari bunglow mein rehne ko mile, mast naukar chakar milen, achhi badhiya income mile sarkari projects se...toh badle mein ye aadhe ghante ki bakwas toh sun ni hi padegi party mein sabko.
During a debate on the Ram Mandir donation controversy, Aaj Tak invited "Gen Z" audience to question the leaders on stage. But the so called audience participation appears far from neutral. One of the young men repeatedly handed the microphone is Deepak Kashyap Mishra, who has been regularly seen questioning opposition leaders in similar debates. Another participant, Shreyansh, is also associated with ABVP.
Anchors like @anjanaomkashyap routinely direct the microphone to these individuals, allowing them to challenge the opposition while defending the BJP government.
The ecosystem of defence operates at three levels:
1. The Channel will select topics to corner the opposition and defend/praise the govt.
2. The anchors themselves aggressively question the opposition and shield the government from scrutiny.
3. Even the 'independent audience' members invited to participate are supporters or members linked to ABVP/BJP
Here are a few videos of @anjanaomkashyap and ABVP member Shreyansh. Even the audience are fixed to target the opposition.
The same guy is seen on Rubika Liyaquat, Amish Devgan and India TV debates too..
नोएडा में एक नौजवान खुले नाले में डूब कर मर गया, क्या कार्यवाही हुई?
दिल्ली में एक बाइक सवार खुले गड्ढे में गिर गया, रात भर पड़ा रहा फिर मर गया, क्या कार्यवाही हुई?
दिल्ली में एक होटल में आग लगी 22 लोग मारे गए, किसको सजा मिली?
आज लखनऊ में कोचिंग सेंटर में में आग लग गई 15 बच्चे जल कर मर गए, क्या कार्यवाही होगी?
उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि, आम आदमी सिर्फ एक संख्या है।
संख्या के हिसाब से मुआवजा भी घोषित हो जाएगा, फिर सब भूल जाएंगे।
काश! काश ! अपनी ओर से भी कुछ ऐसा ही कहा गया होता। लेकिन हम जानते हैं…ऐसा अपने वालों से नहीं हो पायेगा क्योंकि मसला राष्ट्रीय सेठ साहब का अटका पड़ा है।
जय हिंद
ग़ुलामी! जानते हैं क्या होती है? इस विडीओ में समझ आएगा।
समस्या भाषा नहीं है, नरेंद्र मोदी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते, इसलिए हिन्दी बोल रहे हैं और अनुवादक अंग्रेज़ी में बोल रहा है, यहाँ तक कोई दिक़्क़त नहीं है।
दिक़्क़त है शब्दों में, दिक़्क़त है बॉडी लैंग्वेज की, दिक़्क़त है राग-दरबारी गाने से। आमतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति को 'मिस्टर प्रेसिडेंट' कह कर सम्बोधित किया जाता है। लेकिन यहाँ नरेंद्र मोदी उन्हें बार-बार 'एक्सेलेन्सी' कह रहे हैं। ये है सबसे बड़ी ग़ुलामी की निशानी।
अब आते हैं शब्दों पर। नरेंद्र मोदी, डॉनल्ड ट्रम्प की किस बात के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं? पूरी दुनिया में तहलका मचाने के लिए? पश्चिमी एशिया में कौन सी शांति स्थापित की ट्रम्प ने, जिसकी नरेंद्र मोदी इतनी तारीफ़ किए जा रहे हैं?
हमारे नाविक मारे गए, उसके लिए इतने मीठे शब्दों में अनुनय-विनय? कि उनकी जान की रक्षा महत्वपूर्ण है? माना कि डिप्लोमैटिक बातचीत में आप किसी का कॉलर नहीं पकड़ सकते, लेकिन इतना घिघियाया भी नहीं जाता। आपको बोलना चाहिए था कि भारत शान्ति का पक्षधर ज़रूर है, लेकिन भारत की सेनाओं ने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं। अमेरिका की ऐसी कोई भी धृष्टता, हमारे सम्बन्ध हमेशा के लिए चौपट कर सकती है।
आप हाथ में पर्ची लिए एक-एक लाइन डर-डर के बोल रहे हैं, आपका हलक़ सूखा जा रहा है। बुला लीजिए किसी बॉडी लैंग्वेज एक्स्पर्ट को, और पूछिए उससे कि क्या ये विडीओ देख कर ऐसा नहीं लग रहा है कि शहंशाह के दरबार में बैठा एक मुलाज़िम, उस शहंशाह की शान में क़सीदे पढ़ रहा है?
पुराने ज़माने में अगर बादशाह सलामत किसी को चाकू फेंक कर मारें और निशाना चूक जाए तो दरबारी कहते थे कि 'ख़ंजर ने ना-फरमाबरदारी कर दी' मतलब चाकू ने महराज के आदेश की अवहेलना की है। आप भी कुछ वैसा करते नज़र आ रहे हैं।
@narendramodi जी, पूरी दुनिया में एक सनकी ने जीना हराम कर रखा है, और आप उसे 'शान्ति के प्रयासों' के लिए धन्यवाद कर रहे हैं?
बेहद शर्मनाक है ये!
पहले AAP, फिर TMC और अब खबर है कि उद्धव ठाकरे के शिवसेना के सांसद शिंदे से जुड़ेंगे.. कल यह सांसद ओम बिरला से मिल सकते हैं.. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस देश में चुनाव ही क्यों करवाया जा रहा है? पत्रकार इसे ऑपरेशन ऑपरेशन कहकर जस्टिफाई कर रहे हैं, लेकिन सही मायने में यह आपके वोटों की चोरी है.. सरकार को अब फर्क नहीं पड़ता आप बेरोज़गारी या महंगाई पर नाराज़ हो सकते हैं, सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं, लेकिन अब आपके सांसदों को ही खरीदा जाएगा! क्या आपको अब भी लगता है कि भारत में लोकतंत्र मौजूद है? अब ना ही इन्हें EVM हैक करना है, ना ही SIR करना है.. सबकुछ पैसों और डर के दम पर चल रहा है..