कल के आयोजन में अखिलेश यादव द्वारा किया गया प्रयोग सफल हुआ। दलित समाज के लड़के के साथ अहिर समाज की लड़की का गठबंधन हो चुका है। 9 महीने बाद सपा कार्यालय में सोंठ वाली लपसी और सोहारी बंटेगा भारी संख्या में पहुंचकर जायके का आनंद लें।
बाकी जय जहीर जय समाजवाद
Marathi women look like short and ugly trolls from children books. Their gandboli chapri language makes it even worse. They are rude and abrasive with 0 appeal. This whole culture needs to be deleted not only from India but also this planet.
अत्यंत दुःखाद खबर:
रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक माननीय श्री उमाशंकर सिंह जी का निधन हो गया है।
ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिजनों व समर्थकों को यह अपार दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।
ॐ शांति!
#UmashankarSingh#Rasra#Ballia#Rip
@PanSubh4@IAmNehaBhart Stree ke character ko justify krne wala khud ek vaishya ke pet se nikla hota hai to Zara apni Maa se puch ki sirf tere baap ka hi andar liya hai ya fir chacha ,Tau sb chadh gye the
मुंबई में महाराणा साहब श्री विश्वराज सिंह मेवाड़, हाड़ा-चौहान राजवंश बूंदी के ब्रिगेडियर श्री भूपेश सिंह जी एवं शिक्षक श्री राजवीर सिंह जी की तस्वीरों को पैरों तले रौंदकर उसे “उग्र विरोध” का नाम देना लोकतांत्रिक असहमति नहीं, बल्कि अपनी गलत सोच मानसिकता और संस्कारों का सार्वजनिक प्रदर्शन है।
तस्वीरों को कुचलना न तो साहस है और न ही वैचारिक मजबूती का प्रतीक, बल्कि यह असहिष्णुता और बौद्धिक दिवालियापन को दर्शाता है।
राजपूत राजघरानों ने सदियों तक अपनी संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। उनके प्रति इस प्रकार का व्यवहार केवल दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी हानिकारक है।
@RajveerChalkoi@VishvarajSMewar@Bhupesh
राजपूतों में ज्यादा को ज्यादातर बदनाम किया जाता है की अहंकारी लोग हैं जातिवाद करता है लेकिन ऐसा नहीं है।
सबसे ज्यादा इनका बेड़ा गर्ग बॉलीवुड ने किया है जो विलेन के तौर पर दिखाकर,
राजपूतों में बहुत से राजपूत विश्वनाथ प्रताप सिंह और उमाशंकर सिंह जैसे भी होते हैं जो न्याय प्रिय है सबको साथ लेकर चलते हैं,
मैं अपने यहां का ही बता देता हूं मेरी दादी हमें बताती थी,
हमारे दादाजी तीन भाई थे दो लोग CRPF में और एक घर पर रहते थे मेरे दादाजी घर पर रहते हैं मेरे पिताजी सीआरपीएफ में पहली बार दादा जी के छोटे भाई का बलिया जिले में सीआरपीएफ की भर्ती चल रही थी उस टाइम हम लोग का परिवार बेहद गरीब था तो किसी गांव के लड़के के साथ गए और बहुत दुबले पतले थे लोग क्योंकि खाने को ढंग से मिलता नहीं था,
दादा जी का हाइट अच्छा था तो उनका सिलेक्शन हो गया लेकिन वजन कम हो रहा था सिलेक्टर्स ने बोला जो कुछ खा पी करो वजन हो जाएगा जितना चाहिए,
पैसे तो था नहीं उन लोगों के पास की कुछ खा कर वेट बढ़ा ले तो दादाजी बताते थे कि उस टाइम गुड़ लिया तीन-चार लीटर पानी पी गया तब जाकर उनका वेट हुआ और सिलेक्शन हो गया फिर घर आए तो ट्रेनिंग में जाने के लिए ₹200 चाहिए था गरीब परिवार था तो पैसे थे नहीं तो घर में पहले पीतल का बाटुला होता था पीतल का बर्तन उसको ले जा रहे थे बेचकर या गिरवी रखकर ₹200 लाने के लिए तभी एक रास्ते में राजपूत समाज के व्यक्ति दादा जी से मिलते हैं पूछते हैं कहां लेकर जा रहे हो तो उन्होंने बताया कि ऐसा ऐसा है वह बोले ले जाओ मत रखो गिरवी ना बेचो घर से आकर ले जाना₹200 में जब भाई ट्रेनिंग से आएगा लौटकर तब लौटा देना,
दादाजी वापस आ गए और उनके घर से ₹200 लाकर छोटे दादा जी को दिया तब जाकर वह ट्रेनिंग पर गए और 6 महीने बाद आए तब उनका पैसा रिटर्न किया छोटे वाले दादा जी के वजह से मेरे पिताजी का भी नौकरी लगा और एक और छोटे दादा जी का फिर उसके बाद परिवार गांव में संपन्न हो गया,
ऐसे भी नेक दिल भी राजपूत है हमारे यहां ऐसा कुछ नहीं है हमारे यहां ज्यादातर लोग एक दूसरे के।।
यह सब कहानी बस गांव तक सीमित रह जाती है कुछ परिवार तक लेकिन यह भी सबको बताना जरूरी है।।
जैसे शेर जन्म और जाति से शेर होता है ,गाय जन्म और जाति से गाय होती है ,वैसे ही क्षत्रिय ,ब्राह्मण ,वैश्य,शुद्र जन्म से होते हैं कर्मा अनुसार और अच्छे बन सकते हैं लेकिन होते जन्म से ही हैं , ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शुद्र !!
#अनिरुद्धचयार्य_जी
बाड़मेर में विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले 2 हफ्तों से मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने अब तक न कोई वार्ता की और न ही कोई समाधान निकाला।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विधायक रविंद्र सिंह भाटी को आत्मदाह की चेतावनी देने तक मजबूर होना पड़ा।
#क्षत्रिय शुरू से ही महिला सम्मान करते आए है।
इस घटना में ठाकुरों ने पत्थरबाज मुस्लिम पुरुषों को उधेड़ के रख दिया,गिरा गिरा के मारा,भगा भगा के मारा लेकिन इस औरत के आवाजें निकालने के बावजूद भी उधर नहीं देखा।
महिला सम्मान का इससे अच्छा उदाहरण नहीं मिलेगा🙏