Beyond Politics
Our country is now in a Phase, where development works in full swing in many sectors which are visible. Now it's our duty that people should support the government so that we can become self dependent in each and every sector.
ट्रेन छूटी, पर इंसानियत नहीं।
श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन पर आज दोपहर करीब साढ़े बारह बजे एक बुजुर्ग माता हाथ में बैग और पोटली लिए जा रही थीं।
अचानक गश खाकर गिर पड़ीं। साँस धीरे चल रही थी।
पास से सूरतगढ़ के निर्वाणा गाँव के वतन सिंह, कुलदीप सिंह और सचिन सिंह गुजर रहे थे।
तीनों फाजिल्का जाने वाली 12:50 की ट्रेन पकड़ने वाले थे। ट्रेन की परवाह नहीं की। माता को संभाला, हाथ-पाँव मसले, छाया में ले गए और सीपीआर दी। मदद करते-करते उनकी गाड़ी निकल गई।
एम्बुलेंस और रेलवे सुरक्षा बल को सूचना दी गई। आरपीएफ का एक कांस्टेबल मौके पर पहुँचा।
वहाँ मौजूद लोगों का कहना है कि माता को संभालने में ज्यादा प्रयास नहीं हुआ, और वह नो-पार्किंग में खड़ी बाइकों की जाँच में लग गया।
जीआरपी थाना प्रभारी धर्मपाल लेखा ने गाड़ी भिजवाई और खुद भी स्टेशन पहुँचे।
माता को राजकीय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शव मोर्चरी में है। उम्र करीब 67 वर्ष बताई जा रही है। बैग के कागजात से पहचान की कोशिश चल रही है।
प्राथमिक जानकारी में वे पंजाब के मुक्तसर की बिंदर कौर बताई जा रही हैं। यह अभी पुष्ट नहीं है।
अफसोस कि युवकों की सेवा माता को बचा नहीं पाई। पर जो उन्होंने किया, वह इंसानियत है।
मिक्सर घर पहुंच गया।
पत्नी खुश थी कि पैसे भी बच गए और नया मिक्सर भी मिल गया।
लेकिन कुछ दिनों बाद रमेश बाजार में उसी दुकान के सामने से गुजरा। दुकानदार बाहर बैठा खाली सड़क की ओर देख रहा था। दुकान पर पहले जैसी भीड़ नहीं थी।
रमेश को एहसास हुआ कि ऑनलाइन सस्ता सामान खरीदकर उसने अपने 1300 रुपये तो बचा लिए, लेकिन उस दुकानदार की बिक्री में भी एक कमी आई थी।
दूसरी तरफ, अगर वह हर बार सिर्फ स्थानीय दुकान से ही सामान खरीदता, तो शायद महीने का बजट बिगड़ जाता।
आज आम आदमी एक अजीब सी उलझन में है। वह चाहता है कि स्थानीय दुकानदार भी कमाए, लेकिन अपनी मेहनत की कमाई बचाना भी उसके लिए जरूरी है।
क्योंकि दुकानदार के लिए दुकान चलाना मजबूरी है और आम आदमी के लिए कम पैसों में घर चलाना।
यह लड़की अंग्रेजी पढ़ाती है ।बिहार के किसी गाँव में इनका छोटा सा ट्यूशन सेंटर है। अंग्रेज़ी के कुछ ऐसे शब्द जिन्हें बड़े बड़े अंग्रेज़ी के शिक्षक शुद्ध रूप से बोल नहीं बोल पाते हैं उन्हें लड़की इतनी आसानी से बोल पा रही है और सीखा भी पा रही है। आप लोग इस शिक्षिका को फ़ेमस कीजिए ताकि इनके योग्यता हिसाब से इन्हें अच्छी प्लेसमेंट मिल सके।