@narendramodi It’s a matter of immense pleasure that this institute celebrates its centenary this year. Such kind of High Education Institutions must be opened in sub urban areas. It will be a great help for disadvantaged groups living in aspirational districts.
~ Dr. Alpana Singhal
@DrKumarVishwas@Thoughtofpoet@KavyaKutir
रात की महफ़िल में
आज बरखा ☔️ गुनगुना रही है
गीत 🎶 अल्हड़ से मानो गा रही है
गर्मी की कसमसाहट तो बस बुदबुदा रही है
आज तुम गाओ जी भरके
मैं कल फिर दबे पाँव आ रही हूँ ।
~ अल्पना सिंघल
@narendramodi माननीय प्रधान मंत्री महोदय
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल संस्कृति को प्रोत्साहन दिया जाना उत्तम है । रोज़गार के अवसरों की भी अपार संभावनाएं इस क्षेत्र में निहित है ।
@narendramodi सांस्कृतिक विविधता ही देशों को समीप भी लाती है निश्चित रूप से एक दूसरे की संस्कृति को समझना पारस्परिक निकटता तथा आपसी सौहार्द का सबसे उत्तम माध्यम है। वैश्विक स्तर पर यह कूटनीतिक लक्ष्यों को पाने का माध्यम भी है ।
@PrabhuChawla@narendramodi Cultural connectivity along with the respect of other cultures…the most important thing, it also enables us to understand distinguished aspects of different cultures.
@DrKumarVishwas@SrBachchan#hindi
दो जून की रोटी पाना 🫓 भी उसके लिए बड़ी मेहरबानी थी
हर बार बस सूरज ☀️ ढलने तक इसी जद्दोजहद में जीता रहा वो ।
~ अल्पना सिंघल
@DrKumarVishwas@SrBachchan#hindi
तूफ़ान के भी आज तक़ाज़े थे
रास्ता मेरा है कोई बीच में न आए
आँधी की गहन गश्त में
सफ़र मुश्किल थोड़ा आज होगा
पर ध्यान ये रखना
तूफ़ान भी जरूरी है
जमी धूल की परत हटाने को ।
~ अल्पना सिंघल
@ashishsood_bjp Sir… Really it’s a proud moment for us that our students are getting opportunities and their achievements filled us with hope and happiness.
@KavyaKutir@DrKumarVishwas@SrBachchan
बारिश की बेचैनी भी अब दुआ माँगती है
बदरियों ना घर से निकालों अब मुझे
कुछ देर ठहर जाऊँ गगन में ही
कि गुलिस्ताँ फिर से खिलखिला जाए ।
~ अल्पना सिंघल
@KavyaKutir@DrKumarVishwas
रात की सनसनाती हवा
छिटकती सी बरखा 🌧️ को ले चली
गुनगुना रही कोई गीत या फिर ग़ज़ल
कोई रोके ना कोई टोके
अल्हड़ सी मुस्कान भर सखियाँ
अब सैर सपाटा करने निकल पड़ी ।
~ अल्पना सिंघल
गाँव में बाढ़ आई
ठाकुर, पण्डित, बनिया
तेली, धोबी, चमार
सबके सब भागे
और ऊँचे मन्दिर में जाकर बैठ गए
बाढ़ का पानी शांत होने पर
सब अपने मोहल्ले लौट गए
भय आदमी को जात भुला देता
त्रासदी आदमी को इंसान बना देती
हमें ऐसी बाढ़ की काफ़ी ज़रूरत है।
- देवेन्द्र दांगी🌷
@narendramodi कर्म से आसक्ति ही सबसे बड़ा धर्म है। कर्म में रत रहकर बहुत सी ऐसी बुराइयों से बचा जा सकता है जहाँ हमारे हस्तक्षेप की आवश्यकता भी नही थी ।