@NavbharatTimes मौलाना साहब से सामने वालों ने तस्दीक़ करवा हीं दी । जैसी आवश्यकता समयानुसार वैसे चेहरे वैसा ही ब्यान लेकिन आवश्यकता उन मुद्दों पर विचार करने की है जो आज प्रासंगिक हैं , जो वो कर गए जो है वो क्या क्यो कर रहे हैं ?
@INCIndia हम भारत की जनता एक दुसरे से आगे के बुद्धिजीवी -कारण बिना सोचे समझे स्वहित में दलों से जुडाव क्या हम लोग किसी गंभीर अपराधों में भी यहा पहुंच सकते हैं कि अपने अपने दलों के बचाव में उतर जाएँ सच यह घटना हमारी अपनी नहीं ।बेटियाँ पराई नहीं होती, हम निर्लज है
@ZeeNews ठाकुर साहब जो जन सैलाब था वो देखा नहीं या शायद तय कर लिया कि उजाले को अंधेरा ही कहना है, या जिन्होने देखा वो भी जो जनता वहा थी वो भी सब हवा हवाई है
@BoltaHindustan इस मामले में सभी अपनी अपनी सोच को उजागर कर रहे हैं बात उलझी है--- इसमें एक तत्व को समझने की की जरूरत है मानसिकता करने और होने वालों की सब कुछ पहले भी था आज भी जो सोच में बदलाव है वो एक शब्द हैं धर्मनिरपेक्ष अब गालियाँ शुरू करों यही है कुछ के पास देने को
@BoltaHindustan इसके आलावा संवैधानिक संस्थाओं का कंट्रोल खुद के बने रहने कुछ हजारों की संख्या के अवैध प्रवासियों के नाम पर तय एजेंडा लागू करना ।टी सी एस की वो महिला जो कंट्रोल कर रही थी कोन है वो कोई विरोध करें तो नेहरू कांग्रेस जो बैठें हैं जबाबदेही उनकीं है
@BoltaHindustan लोकतंत्र को आज के समयानुसार धीरे-धीरे राजतंत्र में कैसे बदलना है ,विपक्ष जीतता भी दिखाई दे गालियाँ भी जनता में से खाता रहे (कौनसी जनता जो सदियों पुरानी व्यवस्था के सपने खुलीं आखों से देख रहीं हैं) मुखिया धार्मिकता का चोला ओढ़ कर अवतारों की श्रेणी में दिखाई दे
@DainikBhaskar जंतर मंतर पर जो हुआ है उसका आकलन तो हम सभी अपने अपने विचार और मानसिकता कर ही रहे हैं लेकिन शब्दों के चुनाव पर हमारा खुद का एकाधिकार है किसी को कोट करना अलग बात है कहने को हम सभी सभ्य है