झारखण्ड के महान क्रांतिकारी, अमर शहीद देवेंद्र माझी जी की 32वीं पुण्यतिथि पर गोइलकेरा हाट मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका संघर्ष और बलिदान हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके सपनों का झारखंड गढ़ने के लिए हम संकल्पित हैं।
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand
“अच्छा, तो तू मुस्लिम है, फिर तो तुझे चार डंडे और मारूँगी”
4PM की पत्रकार शाहीन कहती हैं कि मुस्लिम पहचान उजागर होने के बाद उन्हें और पीटा गया। राहुल गांधी ने शाहीन और नफीसा से मुलाकात की है और न्याय का भरोसा दिलाया है।
दिल्ली के थाने में करीब एक महीने पहले हुई घटना को लेकर अब तक दिल्ली पुलिस ने अपने अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
लेकिन अब अन्याय और जुल्म को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
शाहीन और नफीसा ने DCP ऑफिस के बाहर धरने का ऐलान किया है।
धूप में नंगे पांव साड़ी पहनकर दौड़ लगाने वाली कविता महतो जी से उनके गांव जाकर मिला और उनकी तपस्या को प्रणाम किया। फिलहाल उन्हें एक एडिडास का जूता और ट्रेक सूट दिया गया है ताकि वह होमगार्ड बहाली में अच्छे से दौड़ सके। कविता के पति दीपक महतो गुजरात में काम करते थे। बीमार पड़े इलाज में बहुत पैसे खर्च हुए लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। छह महीने बाद उनके भसुर की भी बीमारी से मौत हो गई। कविता बताती हैं कि इलाज के वक्त जो कर्ज हुआ वह अब तक वह नहीं चुका सकीं हैं। कविता के दो छोटे बच्चे और सास-ससुर हैं। कविता घर चलाने के लिए ईंट भट्टा में काम करती हैं। हर दिन सुबह चार बजे उठकर वह दौड़ का प्रैक्टिस करती हैं उसके बाद घर का काम और फिर मजदूरी। उनके संघर्ष को सलाम। दुआ करता हूं कि होमगार्ड में उनका चयन हो जाए। 🙏
पश्चिम बंगाल: सिलीगुड़ी में गाय चोरी के शक में भीड़ ने शाहिद अख्तर और शाद मोहम्मद को पीट-पीटकर जान ले ली।
रिपोर्ट के मुताबिक, माटीगाड़ा के ताराबाड़ी इलाके में भीड़ ने एक पिकअप वैन में आग लगा दी और उसके चालक उत्तर दिनाजपुर निवासी शाहिद अख्तर पर पत्थर से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं दूसरी गाड़ी में सवार हरियाणा निवासी शाद मोहम्मद की बागडोगरा के धीमल बस्ती में भीड़ ने बुरी तरह पिटाई कर दी, जिससे घायल शाद मोहम्मद ने नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
पुलिस (ACP ईस्ट अनिर्बान मजूमदार) के अनुसार, माटीगाड़ा, बागडोगरा और पानीघाटा थाना क्षेत्रों में फैले इस घटनाक्रम में मामला दर्ज कर हिंसा में शामिल लोगों तथा मवेशी चोरी के आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है।
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मुस्लिम महिला को देखिए, पुलिस कैसे हिरासत में लेकर ईको गार्डन ले जा रही है।
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
जुबिन नौटियाल के पिता ने बीजेपी छोड़ी, कहा, "कुछ समय से आहत था"
◆ वे पिछले कुछ समय से पार्टी में रहकर आहत थे, रामशरण देहरादून जिले के विकासनगर विधानसभा में भाजपा के बड़े चेहरों में से एक हैं
◆ रामशरण जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं, यह भी अटकलें हैं कि वे कांग्रेस में जा सकते हैं, रामशरण 2022 विधानसभा चुनाव में चकराता से भाजपा के प्रत्याशी थे
#RamsharanNautiyal | Jubin Nautiyal | Ramsharan Nautiyal
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई विधानसभा क्षेत्रों में मुख्य रूप से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने का मामला सामने आया है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बाबलेश्वर, भालकी, बसावकल्याण और बेल्थंगडी जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में 22 और 23 सितंबर को महज कुछ ही व्यक्तियों द्वारा हजारों फॉर्म-7 जमा किए गए। इनमें से कई आवेदनों में लक्षित मतदाताओं का विवरण "पहले से मुद्रित" (Pre-printed) पाया गया और केवल आपत्तिकर्ताओं के नाम हाथ से लिखे गए थे।
प्रक्रियागत गड़बड़ियों और संदिग्ध सामूहिक आपत्तियों की खबरों के बीच बीदर और विजयपुरा के प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम हटने से रोकने के लिए सभी आवेदनों की गहन जांच की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, बिना वैध आधार के फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने वालों के खिलाफ कानूनी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
"मैंने उन्हें रोड़ की हालत दिखाई, उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया"
◆ शख्स ने कहा-"मंत्री जी इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए"...
#ParveshVerma | Parvesh Verma | Delhi Minister
उत्तर प्रदेश: बरेली में 26 सितंबर 2025 को 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद को लेकर हुए प्रदर्शन को एक साल पूरा हो गया है। इस मामले में जुमे की नमाज के बाद लोगों से इस्लामिया ग्राउंड में जुटने की अपील करने वाले मौलाना तौकीर रजा पिछले एक साल से जेल में बंद हैं।
इस मामले में मौलाना तौकीर रजा के साथ नफीस, नदीम, अनीस सकलैनी समेत 114 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं 72 आरोपियों की जमानत हो चुकी है और 24 अभी जेल में हैं। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है।
"इसलिए चुनाव आयोग के सभी फैसलों को अमान्य घोषित किया जाना चाहिए"
◆ एक न्यूज पेपर की रिपोर्ट को लेकर राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल ने कहा
@KapilSibal | #ECI | Election Commission of India | Kapil Sibal | #KapilSibal | Gyanesh Kumar | Sukhbir Singh Sandhu | Vivek Joshi
ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को बीजेपी की 𝐏𝐫𝐢𝐯𝐚𝐭𝐞 𝐋𝐢𝐦𝐢𝐭𝐞𝐝 𝐂𝐨𝐦𝐩𝐚𝐧𝐲 बना दिया है...
इतिहास में पहली बार हुआ है—महज 10 महीने में बाकी दो चुनाव आयुक्तों को 14 बार असहमति दर्ज करानी पड़ी।
जब संवैधानिक संस्थाएं सत्ता की जी-हुज़ूरी करने लगें, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।
@IndianExpress की वरिष्ठ पत्रकार @RitikaChopra__ का यह बड़ा खुलासा सुनिए और समझिए कि कैसे बीजेपी ने एक निष्पक्ष संस्था को अपनी कठपुतली बना दिया है।
चुनाव आयोग ‘वन-मैन शो’ बन गया, ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करें :
10 माह में 14 आपत्तियां बताती हैं कि आयोग के भीतर सब ठीक नहीं..
द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए तथ्यों पर..
चुनाव आयोग तीन सदस्यों की संवैधानिक संस्था है, किसी एक व्यक्ति का निजी कार्यालय नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति जताई, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी। दो चुनाव आयुक्त बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज कराएं और फिर भी फैसले होते रहें, तो सवाल उठेगा ही कि चुनाव आयोग चला कौन रहा था ?
यह सामान्य प्रशासनिक मतभेद नहीं है। यह चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता का सवाल है। CEC ज्ञानेश कुमार को देश के सामने बताना चाहिए कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई और उनकी जानकारी के बिना फैसले कैसे लिए गए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल पहली बार नहीं उठा है। ज्ञानेश कुमार की मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के समय ही झामुमो सहित देश की सभी विपक्षी पार्टियों और कानून के जानकारों ने सवाल उठाया था।
SIR के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव, सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने में सामने आई कथित तकनीकी बाधाएं बेहद गंभीर हैं। मतदाता सूची किसी सरकार की कृपा नहीं, नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की बुनियाद है। एक भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
झामुमो ने शुरुआत से SIR पर नहीं बल्कि एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र एवं बिहार के बाद पश्चिम बंगाल में भी उठे सवालों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर संदेह पैदा किया है। इन तीनों राज्यों में एसआईआर की आड़ में लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए और लोकतंत्र की हत्या कर भाजपा की सरकार स्थापित कराई गई। अब यह देश का हर नागरिक समझ चुका है।
ज्ञानेश कुमार बताएं कि 10 महीने में 14 आपत्तियां क्यों आईं? क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इन आपत्तियों की जानकारी थी? यदि थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?” उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक सत्ता के प्रभाव से मुक्त रखना लोकतंत्र की पहली शर्त है। लेकिन, ये बातें भाजपा की सरकार ने मजाक बन कर रह गई है।
हम सुप्रीम कोर्ट से पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग करते हैं, चुनाव आयोग को ‘वन-मैन शो’ नहीं बनने दिया जा सकता। चुनाव आयोग किसी सरकार या व्यक्ति की नहीं, संविधान और देश के करोड़ों मतदाताओं की संस्था है। ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की पुरजोर मांग करते है।
@JmmJharkhand