Modi knows it’s his last term so he will everything to finish Hinduism.
He didnt restore Surya Martand Temple of our Kashmir.
But is restoring his Buddhist sites by looting money from Hindus of Bharat.
RHA की अब तक की सबसे बड़ी जीत:
१. आरक्षण पर सोशल मीडिया और मीडिया में लगातार चर्चा
२. आरक्षण पर ‘दलित नेता’ की जगह अमुक जाति बनाम अमुक जाति का वाक्युद्ध
३. आरक्षण पर लोगों के पास आँकड़े, तथ्य और तर्क
४. सरकार द्वारा एकता तोड़ने के प्रयास, जो लोगों को दिख रही है
५. आरक्षण पर उपेक्षित जातियों के कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा खुल कर अपनी बात रखने का आरंभ
आने वाले दिनों में यह और वृहद् और व्यापक होने वाला है। नवंबर की प्रतीक्षा कीजिए।
पिछले 35 साल से बिहार में सवर्ण जाति का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना उसके बावजूद यदि कोई दलित पीड़ित शोषित वंचित पढ़ लिख नहीं पा रहा है तो उसमें गलती उसकी खुद के जाती के नेताओं का है, सवर्णों का नहीं।
EWS reservation is NOT A REFORM.
Adding one more reservation on top of 3, is NOT A REFORM.
EWS was given by reducing 50% UR seats.
Real reform would have been
either adjusting EWS within 50% limit Or removing caste based reservation, adding EWS and opening it to all castes.
Don't be fooled by those who say EWS is a reform.
In its current form, IT IS NOT.
Officer 1 : "Do you think those two driving a motorcyle, carrying a duffle bag, wearing bandana's and flipping us the bird might be the robbers?"
Officer 2 : "Nah, keep driving."
#GTA#GTA6
In GTA 6, cops no longer magically know your identity and start chasing you the moment you commit a crime.
This is showcased in this clip, where the wanted level stars are displayed as hollow outlines, because the cops don’t know who the perpetrator is yet.
This occurs when an NPC calls the cops, but you execute the robbery fast and clean, then leave the scene before they arrive while keeping your face covered with a bandana.
लहसुन का लोकतंत्र
देखिए कि सरकार कितनी नंगी और अराजकतावादियों की गोद में बैठने वाली हो गई है कि ये आज सुप्रीम कोर्ट में यह कहने गए कि तिलचट्टों के प्रदर्शन में जिन्होंने पत्थरबाजी की, पुलिस पर डंडों से प्रहार किया, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाई, उन पर हुए केस निरस्त किए जाएँ।
@BJP4India वालों, वह तुम्हारे बापों की संपत्ति थी? कितनी बार तुम अपनी घटिया राजनीति के लिए @DelhiPolice को पिटवाते रहोगे? पूरी पुलिसिंग को पंगु बना कर रख दिया है, जो भी आता है इनका सर फोड़ कर चला जाता है।
पर हाँ, पुलिस कुछ न करे क्योंकि माननीय @narendramodi जी को रात के एक बजे ‘जेन जी’ के लिए रील बना कर, उन्हें माफ करते हुए बड़ा हृदय वाला दिखना है। आज कल रील और उसके व्यू नहीं गिन रहा कोई!
सरकार चाहती है कि वो ये केस माफी की भी नौटंकी करे और वही सरकार फिर कोर्ट को यह भी कहती है कि तिलचट्टों का पाँच सितम्बर वाला मार्च रोक दिया जाए। माननीय सूर्यकांत जी ने कहा है कि अभी से वो यह नहीं मान सकते कि कुछ गलत ही हो जाएगा।
जबकि माननीय सूर्यकांत के समक्ष ऐसे उदाहरण हैं कि इन्हीं आयोजकों के कारण दिल्ली में तीन दिन क्या होता रहा। फट्टू सरकार की %# इतनी फटी हुई थी कि आयोजकों को नामित तक नहीं कर पाई कि इनका ही दायित्व बनता था।
ये चल रहा है इस देश में। दंगाइयों को सरकार बचा रही है ताकि उनके राम मंदिर लूट के पाप को डायवर्ट करने का रिवार्ड उन्हें दिया जा सके। जनता सब देख रही है।
'HANUMAN ANSH' – THE GAME CHANGER... #HanumanAnsh is rewriting the rules of the game – and how!
⭐ First-time director
⭐ First-time lead actor
⭐ Low budget/CoP
⭐ Minimal spend on P&A
⭐ Barely any *pre-release* promotions
Yet, the content is attracting audiences in hordes.
#HanumanAnsh is a WAKE-UP CALL and a REALITY CHECK for the industry – a powerful reminder that strong content, when it strikes the right chord, can overcome any and every hurdle.
#HanumanAnsh is turning out to be a GOLDMINE for everyone associated with the film.
⭐ #HanumanAnsh [Week 4] Fri 6.17 cr, Sat 9.17 cr, Sun 13.18 cr. Total: ₹ 39.83 cr.
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Note: Numbers may increase/decrease *marginally*.
⭐️ #HanumanAnsh biz at a glance…
⭐️ Week 1: ₹ 89 lacs
⭐️ Week 2: ₹ 46 lacs
⭐ Week 3: ₹ 9.96 cr
⭐ Weekend 4: ₹ 28.52 cr
⭐️ Total: ₹ 39.83 cr
Official Nett BOC | #India biz | #Boxoffice
कोई सिरफिरा पैदा होगा एक दिन देश में और फिर पृथ्वी के इतिहास में भारत का जो 75 साल का लोकतंत्र हुआ है उसे खत्म करे वापस पुरानी व्यवस्था खड़ी कर देगा...
इसलिए ऐसी भाषा नहीं बोलनी चाहिए नेताओं को सबको साथ लेकर चलने की बात करनी चाहिए।।
सब दिन होत ना एक समाना.....
कलेक्टर के सामने BP नहीं माप पाईं CHO, वीडियो वायरल; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक Community Health Officer (CHO) कथित तौर पर कलेक्टर के सामने मरीज का ब्लड प्रेशर ठीक से जांच नहीं पाती दिख रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों की प्रशिक्षण व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे आरक्षण और भर्ती मानकों से जोड़कर भी टिप्पणी कर रहे हैं।
हालांकि, संबंधित CHO के शैक्षणिक अंक, नियुक्ति श्रेणी या योग्यता को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही, CHO का पद अनिवार्य रूप से MBBS डॉक्टर का पद नहीं होता।
MP में सवर्ण नेताओं का प्रतीकात्मक ‘पिंडदान’, हक-अधिकारों पर चुप्पी के खिलाफ प्रदर्शन
मध्य प्रदेश के सीधी-चुरहट में 30 अगस्त को सवर्ण समाज के लोगों ने UGC एक्ट, SC/ST एक्ट, जातिगत आरक्षण और सामान्य वर्ग के हक-अधिकारों के मुद्दों पर कथित रूप से मौन रहने वाले नेताओं के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।
सोन नदी पुल के नीचे प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक पिंडदान, मुंडन, अंतिम संस्कार और आत्मा शांति यज्ञ किया। इस दौरान कहा गया, “हम सवर्ण समाज के लोग अनाथ हो गए, सवर्ण समाज के सारे नेता मर गए।” कार्यक्रम के जरिए नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी जताई गई।
(स्त्रोत: सोशल मीडिया)
हर्ष भाई को हर्षित करने में लगी सरकार की परेशानी अब बढ़ने ही वाली है। जैसे कि OBC आरक्षण में कितनी अच्छी सुविधाएँ हमारे पुराने और लेटेस्ट सत्ताधीशों ने दे रखी है, वो सुन कर आपको आनंद हो जाएगा।
आप सोचिए कि आप उत्तर प्रदेश के यादव हैं या जाट हैं, आपके बाबूजी कलेक्टर हैं, और आपके पास 8 ट्रेक्टर, 110 बीघा भूमि है, कुल आय 10 करोड़ प्रतिवर्ष है, पर आप जब फॉर्म भरेंगे तो न केवल आपको OBC का आरक्षण मिलेगा, बल्कि आप क्रीमी लेयर में भी नहीं आएँगे!
ओ-BC! सच में?
बिल्कुल! क्यों?
क्योंकि कृषि की आय और बाप की सैलरी चाहे जितनी भी, अगर आप सही जाति में उत्पन्न हुए हैं, या पटरी उखाड़ सकते हैं, तो आप गरीब अभ्यर्थी बन सकते हैं। और देखिए सत्य भी तो है कि बाप कलेक्टर या डॉक्टर है, भूमि भी उसकी है, तो बच्चा तो गरीब ही हुआ ना, वो तो बेचारा बैकवर्ड ही रह गया।
हाँ, कलेक्टर साहेब कहीं गुपचुप का ठेला लगाते, लिट्टी बेचते, या पान की दुकान होती तो उसकी आय से पता चलता कि आप क्रीमी लेयर में हैं या नहीं!
आप सोचिए कि देश में कैसे-कैसे नियम हैं कि OBC समाज के बैकवर्ड कलेक्टर साहेब को एक साइड बिज़नेस भी खोलना पड़ता है, तब जा कर सरकारी फ़ाइलों में उसे परिवार की आय मानी जाएगी।
अब यदि आप ये सब बातें पब्लिक में ले आएँगे तो आपको क्या लगता है कि अखिलेश जी साज़िश और षड्यंत्र वाला ट्वीट नहीं लिखेंगे तो क्या लिखेंगे। वस्तुतः क्रीमी लेयर में कोई आता ही नहीं, जो आता है वो अपना क्रीम खा लेता है और कहता है कि देखो बस छाछ ही बची है जी, हम तो स्किम्ड मिल्क हैं!
लेकिन अजीत जी, कृषि की आय पर तो टैक्स नहीं लगता ना! हाँ, टैक्स नहीं लगता तो क्या वो इनकम ही नहीं है? उस से बच्चे की फीस नहीं जाती? उसे बच्चे खाते नहीं? वो क्या गंगा जी में ओबीसी समाज के कृषक बहा देते हैं?
वैसे OBC पर आजकल IT सेल वाले भी हमें यह बताने में लगे हुए हैं कि हमने मुसलमानों और ईसाइयों को OBC से हटाने की बात क्यों नहीं की;
वैसे महाराष्ट्र, असम, बिहार, यूपी, एमपी, राजस्थान हर जगह भाजपा सरकार में भी मुस्लिम जातियाँ ओबीसी में हैं। सुनो ब्रो, अब अधिक सर्च भी नहीं करना पड़ता और सब बात हम ही कर देंगे, तो तुम लोग क्या कांग्रेस की पाद सूँघ कर उसके टेम्पलेट पर AI से फोटो बनवाने के लिए प्रति ट्वीट ढाई रुपया पाते हो?
अजीत जी दो रुपया नहीं होना चाहिए? नहीं, नए वालों ने आठ आना बढ़ा दिया है, क्योंकि अब काम बढ़ गया है।
घर के मसले सोशल मीडिया पर क्यों पोस्ट करते हो
जैसे बाप दादा निक्कमे निकले वैसे तुम भी भाई निक्कमे निकले
पूरी नस्ल ही निक्कमो की है
बहन के बारे में ऐसी गन्दी सोच