इसी सत्र में #FCRA क़ानून में संशोधन विधेयक पेश किया जानेवाला है।
इस संशोधन के बाद विदेशी चंदे पर पलनेवाले कई #NGO और मिशनरियों के काले कारनामे क़ाबू में आ जाएँगे।
यह विधेयक लेकर आएँगे गृह मंत्री अमित शाह।
क्या इसीलिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है ?
कहीं पे निगाहें,कहीं पे निशाना !
मतलब साफ़ है छात्रों के बहाने अपनी दुकानदारी बचाने की गुप्त मुहीम चल रही है।
#Idiot
हाहाकार मचा है ‘दरबारियों’ में।
credibility ढेले भर की नहीं
Main Stream Media से धकेले गए
कुंठित दरबारी क्या करते अगर ‘ट्यूबिया भैय्या’ न होते तो
अब चूँकि अपनी लकीर लंबी नहीं कर सके तो सामने वाले की लकीर छोटी करने की कोशिश पिछले 1 दशक से कर रहे हैं
रुदाली गैंग के नालायक
यह ठग फ्रॉड धूर्त सत्ता के लिए प्यासे बंटी और बबली से जब सच्चे सवाल पूछो तब उनके अंग अंग में मिर्ची लग जाती है
और यह बिना जवाब दिए दुम दबाकर कट लेते हैं
सवाल:- राहुल जी, आपने कहा होम मिनिस्टर ने फायरिंग का ऑर्डर दिया, लेकिन फायरिंग तो हुई ही नहीं?
बंटी बबली बिना जवाब दिए दुम दबाकर भाग लिए
यह ठग फ्रॉड धूर्त सत्ता के लिए प्यासे बंटी और बबली से जब सच्चे सवाल पूछो तब उनके अंग अंग में मिर्ची लग जाती है
और यह बिना जवाब दिए दुम दबाकर कट लेते हैं
सवाल:- राहुल जी, आपने कहा होम मिनिस्टर ने फायरिंग का ऑर्डर दिया, लेकिन फायरिंग तो हुई ही नहीं?
बंटी बबली बिना जवाब दिए दुम दबाकर भाग लिए
सब मुकदमे हटाकर जुनेद पर हैवी मुकदमे डालो
इसका इमाम ताजा हो जाएगा ईमान लेकर
आया था बोला था हमारा मजहब सिखाता है
उसने पहले बोला था मेरे घर पर बुलडोजर चले
तो कोई ग़म नहीं तो अब क्यों रो रहा हे..?
इस बार मौलाना ने जुनेद को पेल दिया 🔥😎
संसद में गुंडों जैसा व्यवहार, सीना ठोककर झूठ और सड़क छाप भाषा...
राहुल गांधी को सच में इलाज की ज़रूरत है
यह देश विरोधी, बदतमीज़ व बेशर्म इंसान भारत जैसे महान देश के सदन में बैठ देश का नाम डुबा रहा है
ऐसे मानसिक रूप से दिवालिया व्यक्ति का विपक्ष का नेता होना राष्ट्र पर कलंक है
🚨 BIG BREAKING
ED uncovers assets worth nearly ₹500 crore during its probe into the alleged ILLEGAL coal mining case in Dhanbad, Jharkhand.
Movable assets worth over ₹160 crore have also been SEIZED.
🚨 Just IN 🚨
NSA Ajit Doval has arrived at Parliament.
Yesterday, Home Secretary Govind Mohan, IB Chief Tapan Deka, and Union Minister JP Nadda met Home Minister Amit Shah in Parliament.
प्रियंका गांधी जी, एक व्यक्तिगत सवाल.
क्या आपके परिवार में दादा, नाना, दादी, नानी या परदादा-परनानी में किसी को डायबिटीज थी?
अगर हां, और उन्हें इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती थी, तो उन्हें जो इंसुलिन दिया गया हो वह गाय या सूअर के पैंक्रियास से प्राप्त किया गया होगा. 1980 के दशक की शुरुआत तक यही इंसुलिन के प्रमुख स्रोत थे. बाद में जेनेटिक इंजीनियरिंग से मानव इंसुलिन का उत्पादन शुरू हुआ.
गोमूत्र पर रिसर्च का मजाक उड़ाने से पहले प्रियंका गांधी को पता होना चाहिए कि पहला एंटीबायोटिक पेनिसिलिन फफूंद से बना, डायबिटीज की एक दवा छिपकली की लार से बनी, सूअर की आंत से हेपारीन जैसी दवा बनी. एक पेड़ की छाल से कैंसर की एक दवा टेक्सॉल बनी. वाइपर सांप के जहर पर रिसर्च से बीपी की एक दवा बनी है. बहुत लंबी लिस्ट है.
और ये एलोपैथिक दवाएं हैं.
जब कुत्ता, सूअर, गाय, छिपकली, सांप पर रिसर्च हो रहा होगा तो भी प्रियंका गांधी जैसे लोगों ने मजाक उड़ाया होगा. वैज्ञानिक अपना काम करते रहते हैं.
डायबिटीज जैसी कोई बीमारी होती है, इसका पहला जिक्र भारतीय शास्त्रों में मिलता है. चरक ने सबसे पहले बताया कि रक्त और मूत्र में मिठास आ जाना समस्या है. तब से समाधान खोजा जा रहा है.
इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा का कृपया मजाक न उड़ाएं.
वैज्ञानिक रिसर्च का विस्तार अनंत है. गोमूत्र उससे परे नहीं है. हो सकता है कि गोमूत्र पर रिसर्च से कुछ न निकले. फिर भी होने चाहिए रिसर्च. अब फफूंद से पेनिसिलीन बनेगी, ये किसने सोचा था.
सफलता का गारंटी कार्ड लेकर कौन सा रिसर्च होता है?
गोमूत्र वाला मजाक उड़ाकर प्रियंका गांधी वायनाड के अपने विशेष वोट बैंक को गुदगुदा रही हैं, गाजा और हमास वाली ऑडियंस भी यही सुनना चाहती है.
ये भी समस्या है कि वे न साइंस की स्टूडेंट रही हैं, न साइंटिफिक मेथड या रिसर्च मैथड उनको आता है.
अभिजीत दीपके सौरव दास, आशुतोष काला, सोनम वांगचुक जैसे बड़े कॉकरोच घूम घूम कर जश्न मना रहे हैं।
छोटे कॉकरोच या तो पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं या सड़को गलियों में पिट रहे हैं।
कोक्रोचिन ट्रोल हो रही हैं, उनकी सेक्सी हरकतों और बातों से उनके मां बाप, सोसाइटी से मुंह छिपाते फिर रहे हैं।
आदित्य ठाकरे को "पेंगुइन" कहने पर नागपुर के समित ठक्कर को 21 दिन तक जेल में रखा गया।
उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर सुनयना होली को भी कई रातें जेल में बितानी पड़ीं।
उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर अर्नब गोस्वामी को भी जेल जाना पड़ा।
शरद पवार की आलोचना वाली एक कविता सिर्फ सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए केतकी चितले को 40 दिन से ज्यादा जेल में रहना पड़ा। जबकि उस कविता में शरद पवार का नाम तक नहीं था।
केजरीवाल ने अपनी आलोचना करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए पंजाब पुलिस को इंदौर तक भेज दिया था।
अपना कार्टून बनाने पर ममता बनर्जी ने एक कार्टूनिस्ट को 15 दिन तक जेल में रखा।
लेकिन कॉकरोच चाहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के लिए गंदी भाषा और अपशब्द बोले जाएं, फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो।
कोर्ट ने नाबालिगों और पहली बार गलती करने वालों को तो रिहा कर दिया, लेकिन क्या उनके मां-बाप या आम लोग भी उन्हें छोड़ देंगे? ऐसा होता तो नहीं दिख रहा। क्योंकि कल ही मध्य प्रदेश में कुछ कॉकरोचों की पिटाई की खबर आई है, और शायद दूसरे राज्यों से भी ऐसी खबरें आएंगी।
Actor Sudesh Berry brutally roasted CJP and praised Modi.
CJP are all loafers, troublemakers, uneducated, and mad. He added that all they do is abuse Modi to get more likes and increase their income.
ओ रे मुल्ला नसरुद्दीन!
इन छात्रों का क्या होगा?
क्या नहीं होगा?
क्यों परेशान हुए?
खां में खां तू क्यों नंगा हुआ?🤣
यही चुटियापा वो शबाना बेगम ने भी किया 🤣
सोनू सूद ने पड़ा लं@ड़ चुत@ड़ में घुसाया खां में खां🤣
Saurav Das is justifying all the abusive language used for Prime Minister of India!
"Narendra Modi Is Not God And This Is A Democracy. Learn To Take Jokes"
Using highly objectionable morphed images of PM, Abusing PM and his mother openly should be taken as joke?
दस हजार की भीड़ प्रदर्शन कर रही है. कुछ लोग संसद के गेट की तरफ बढ़ते हैं. भीड़ बेकाबू हो जाती है. पुलिस फायरिंग कर देती है.
8 लोग पुलिस की गोलियों मारे जाते हैं.
नहीं ये इस साल नहीं, 1966 में हुआ था. इंदिरा गांधी पीएम थीं. साधु-संत गोवध पाबंदी का कानून चाहते थे, क्योंकि संविधान में सरकार को ऐसा कानून लाने का निर्देश है.
8 मौत उस समय का आंकड़ा है जब हर हाथ में मोबाइल फोन और उसका कैमरा नहीं होता था.
इस देश ने क्या-क्या नहीं देखा है.
अब तो पुलिस को ही लोग पीट देते हैं और आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट वह आदेश वापस ले जिसमें कहा गया है कि हिस्ट्रीशीटर्स को राहत नहीं मिलेगी.
मतलब उनको पुराने अपराधियों को राहत दिलवानी है.
1966 की उस घटना के बाद कई राज्यों ने ऐसे कानून बनाए. बलिदान व्यर्थ नहीं गया.