बहाना ढूंढ ही लेता है खूँ बहाने का,
है शौक कितना उसे सुर्ख़ियों में आने का।
मिले हैं जख़्म उसे इस क़दर कि अब वो भी,
कभी किसी को नहीं आईना दिखाने का।
बुलन्दियाँ मुझे ख़ुद ही तलाश कर लेंगी,
अता तो कीजिए मौक़ा नज़र में आने का।
करिश्मा कोहकनों ही के बस का होता है,
किसी पहाड़ से दरिया निकाल पाने का।
कहीं तुझे भी न बे-चेहरा कर दिया जाए,
तुझे भी शौक़ बहुत है शिनाख़्त पाने का।
एहतराम इस्लाम
जमाल' अब तो यही रह गया पता उसका,
भली सी शक्ल थी अच्छा सा नाम था उसका !!
किसे ख़बर थी कि ये दिन भी देखना होगा,
अब ए’तिबार भी दिल को नहीं रहा उसका !!
जो मेरे ज़िक्र पर अब क़हक़हे लगाता है,
बिछड़ते वक़्त कोई हाल देखता उसका !!
मुझे तबाह किया और सब की नज़रों में,
वो बेक़ुसूर रहा, ये कमाल था उसका !!
~ जमाल एहसानी
रोंगटे खड़े करने वाला संवाद है— सुनिएगा ज़रूर
कलियुग के शतरंज मै राम नियम है, तो कृष्ण चाल है
मर्यादा मै रहना है तो श्री राम से सीखो
और मर्यादा मै रखना है तो श्री कृष्ण से सीखो
हरे कृष्ण - हरे राम !!
दूसरा फ़ैसला नहीं होता,
इश्क़ में मशवरा नहीं होता !!
ख़ुद ही सौ रास्ते निकलते हैं,
जब कोई रास्ता नहीं होता !!
जब तलक रू-ब-रू न हो कोई,
आइना आइना नहीं होता !!
अपना समझा तो कह दिया वर्ना,
ग़ैर से तो गिला नहीं होता !!
कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता है,
मुफ़्त में तजरबा नहीं होता !!
~ नवाज़ देवबंदी