अंदर का जहर चूम लिया धुलके आ गए
जितने शरीफ लोग थे सब खुलके आ गए
यूजीसी के नए नियम किसी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं। ये नियम विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जाति के नाम पर होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के लिए हैं। सामंतवादी इन नियमों के खिलाफ खुलकर मैदान में आ गए हैं। यानि कि सामंतवादी जातीय उत्पीड़न को अपना अधिकार मानते हैं और उसे जारी रखना चाहते हैं।
किस बिल में छिपे हैं 'बंटेंगे तो कटेंगे' का नारा लगाने वाले ?
अगर आपको UGC कानून से भय है तो अपने बच्चों को न्याय के मूल सिखाएँ। समानता सिखाएँ। सम्मान देना सिखाएँ। भारत में जातिगत भेदभाव, जातिवादी टिप्पणियों की अब कोई जगह नहीं है।
- श्याम मीरा सिंह, पत्रकार
#UGCRegulations#We_support_UGC_Act
मैरी कॉम
Before - Real champion of my life
Now - एक रुपया नहीं कमाया
लड़की का कमाई खा के बैठता है
लड़कों किसी को चांद पे मत ले जाना नहीं तो वही से ऐसा हाल होता है
#marrykom#husbandandwife
2012 में निर्भया कांड ने पूरे भारत को एकजुट कर दिया था।
राष्ट्रपति भवन तक लोग सड़कों पर उतर आए थे और गुस्सा साफ़-साफ़ कांग्रेस सरकार पर था।
लेकिन 2014 के बाद क्या हुआ?
🚨 प्रज्वल रेवन्ना के मामले पर देश नहीं उबलता
🚨 हाथरस की दरिंदगी पर भी वैसा आक्रोश नहीं दिखा
🚨 उन्नाव में कुलदीप सेंगर पर भी देशभर में ग़ुस्सा नहीं उमड़ा
आख़िर ऐसा क्या बदल गया? 😢
इंसाफ़ की ज़ुबान समझ आने से ही इंसाफ़ होगा।
न्याय के लिए भाषाई समावेश भी निर्णायक बिंदु है।
The dispensation of justice is contingent upon the utilization of a language that is comprehensible to all parties involved.
Linguistic inclusivity is a determinative factor in the true administration of justice.