क्या ज़बरदस्त जॉब सिक्योरिटी है
> ये पूजा सिंघल हैं, 2000 बैच की IAS अधिकारी (झारखंड कैडर)
> इन्होंने ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की और 21 साल की उम्र में भारत की सबसे कम उम्र की IAS अधिकारी बनीं
> 2022 में MGNREGA और माइनिंग लीज़ घोटाले के आरोप में ED ने इन्हें गिरफ़्तार किया
> ED के मुताबिक, 36 करोड़ रुपये नकद और 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति ज़ब्त की गई
> इन्होंने न्यायिक हिरासत में 2 साल और 4 महीने जेल में बिताए
> 2024 में ज़मानत मिली और नौकरी पर बहाल हुईं
> अभी (2026 में) ये झारखंड के IT और ई-गवर्नेंस विभाग की सचिव हैं
> इनके पास झारखंड कम्युनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड के CEO का अतिरिक्त प्रभार भी है
सरकारें विभागों का नेतृत्व करने के लिए अधिकारियों को कैसे और किस आधार पर चुनती हैं?
ईरान ने फिर से अपना तांडव शुरू कर दिया।
अमेरिका हर बार ईरान से मार खाता है, इसके बावजूद वो अपनी बेइज्जाती सुपर तरीके से कराने आ जाता है।
कितनी बुरी तरह से अमेरिका की धुनाई हो रही है।
पहले तो मंदिर निर्माण में जमीन ख़रीद में लूट हुई,अब प्रभु राम के दान की लूट हुई है।
क्या इसी लूट के पैसे से विश्व हिंदू परिषद और संघ के आलीशान कार्यालय बने हैं, इस लूट पर PM चुप क्यों है।
- विवेकानंद पाठक,महासचिव यूपी कांग्रेस
मस्जिद सिर्फ नमाज के लिए नहीं इंसानियत के लिए भी खोली जाती हैं,
भिवंडी की दीनयात मस्जिद में NEET एग्जाम देने आए स्टूडेंट्स के पेरेंट्स और प्रशासन के लोगों के लिए खास इंतजाम था।
चिलचिलाती धूप और गर्मी से बचने के लिए मस्जिद को खोल दिया गया ताकि लोग बाहर बैठने के बजाय मस्जिद के अंदर बैठे ।
सिर्फ ठहरने का इंतजाम नहीं बल्कि खाने पीने का भी भरपूर इंतजाम किया गया। I'm Muslim ☝️
कर्मा लौटता है... इजरायल का साथ देने वाले अब रो रहें हैं.
इजरायल द्वारा ग़जा में नरसंहार करने पर हंसने वाले राजेश शर्मा आज़ रो रहें हैं. क्यों कि इनका जवान बेटा जो अभी 23 साल का था अमेरिकी हमले में मारा गया है.
आदित्य शर्मा(23) एक तेल जहाज़ पर नाविक थे. उनका जहाज़ ओमान तट के निकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास था. तभी अमेरिकी मिसाइल हमला हो गया और आदित्य मारे गए.
23 वर्षीय आदित्य शर्मा, जो एक भारतीय जहाज पर काम कर रहे थे, अमेरिका के हमले में मारे गए, उसी अमेरिका के जिसकी तारीफ में उसके पिता राजेश शर्मा रात-दिन प्रशंसा से भरे जुमले बाँधते थे।
इजरायल-अमेरिका का भक्त बनकर गाजा के बच्चों की मौत का जश्न मनाते थे, आज वही राजेश शर्मा अपने बेटे आदित्य की लाश देख रहे हैं।
नफरत की राजनीति की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि वह आखिरकार इंसानियत को ही निगल जाती है, जब बेगुनाह लोगों का खून बहता है, तो राजेश जैसे लोग उसे अपनी वैचारिक जीत समझते हैं।
लेकिन युद्ध किसी का सगा नहीं होता, न अमेरिका किसी का सगा है, न इज़राइल किसी का सगा है, आज अगर राजेश का परिवार अपने बेटे को खोने के दर्द से गुजर रहा है, तो उस दर्द का मज़ाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए, लेकिन हमें राजेश से तनिक भी सहानुभूति नहीं है।
हां आदित्य के जाने का अफसोस है, अमेरिका से बदला लिया जाना चाहिए, लेकिन लेगा कौन? नरेंद्र मोदी? ट्वीट करने की भी हिम्मत है?
आदित्य शर्मा के पिता राजेश शर्मा की कामना हुई पूरी!
राजेश शर्मा गज़ा के मुसलमानों का सफ़ाया चाहता था सो ईश्वर ने सुन
ली और विश्वगुरु के दोस्त अमेरिका के हाथों उसके कुल का सफाया
करवा दिया.....जैसी जाकी सोच है, वैसी ताकी प्रीत।
मरने वाले के प्रति संवेदना है 🙏🏻 ...लेकिन ऐसे विकृत मानसिकता वालों के प्रति कोई सहानुभूति नही!
सरकारों के दम पर नहीं रहा
मुसलमान 75, सालों से अपना दम पर जिंदा रहा है
हमको सरकार पर नहीं अल्लाह पर भरोसा है
हम अपना रिज़्क़, खुद ज़मीन से निकाल लेंगे,,,