"SC-ST-OBC उम्मीदवारों का CUT OFF सामान्य वर्ग से ज्यादा क्यों? - श्रीमती अनुप्रिया पटेल
चूंकि आरक्षित वर्ग के लोग अभी भी आर्थिक रूप से सक्षम न होने के साथ समान अवसर से वं��ित हैं। ऐसे में इस वर्ग के अभ्यर्थी उम्र सीमा छूट, परीक्षा फीस छूट का लाभ लेने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में संविधान प्रदत्त आरक्षण के प्रावधान की आत्मा की रक्षा के लिए इससे जुड़ी इस शर्त को हटाया जाना चाहिए। अगर आरक्षित वर्ग को नौकरी हासिल करने के लिए सामान्य वर्ग से ज्यादा अंक लाने होंगे तब आरक्षण की मूल अवधारणा कैसे बचेगी।
कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढें वनमाही वाली कहानी चरितार्थ हो रही है उत्तर प्रदेश में 17 अतिपिछड़ी जातियों के लिए। जिस आरक्षण के लिए यह विशाल आवादी पार्टीगत सौदागरों एवं इच्छ���धारी मठाधीशों का तलवा चाटते हुए यूज एंड थ्रो का शिकार होती फिर रही है उस आरक्षण का दरवाजा अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान द्वारा अपने संवैधानिक संघर्षों के बदौलत कबका खोल दिया गया है लेकिन इतनी बेंवत नहीं है कि एकजुट ताकत का निर्माण करते हुए उसे प्राप्त कर ले और बात करते हैं हक अधिकार व सामाजिक न्याय की। जनसुन��ाई पोर्टल के शिकायत निस्तारण हेतु उपजिलाधिकारी धनघटा संतकबीरनगर को प्रेषित तहसीलदार धनघटा की उक्त रिपोर्ट पर्याप्त है उत्तर प्रदेश में 17 अतिपिछड़ी जातियों की निर्विवाद लड़ाई लड़ने के लिए जो राजनैतिक श्रेयबाजी हेतु तथाकथित आपत्तिकर्ताओ को खड़ा कर पर्दे के पीछे से शिकार खेला जा रहा है और मामला राज्य स्तरीय अपील में शासन स्तर पर लंबित है। अतः वीर भोग्या वसुंधरा यह धरती वीरों की है कायरो�� और कतवारों की नहीं जो निजी स्वार्थ में समाज को टुकड़े टुकड़े गैंग में बांटकर सत्ता की मलाई काटने को आमादा है। मैं सार्वजनिक घोषणा करता हूं जरिए शोशल मिडिया कि वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित भूमिहीन मजदुरा वर्ग निष्ठा एवं इमानदारी से मूवमेंट का साथ दें आरक्षण दिलाकर रहूंगा। राजनीति कोई कितन��ं करें लेकिन अनुच्छेद 341 के अनुपालन में हमारे जायज संघर्षों को कोई माई का लाल मिटा नहीं सकता, समय चाहे जो भी लगे। तमाम लोग अपने अपने मान शोशल मिडिया पर अनावश्यक ज्ञान बांट हुए हू हल्ला मचा रहे हैं, उन मुर्खों को सीधा चैलेंज करता हूं कि यदि इतने ही ज्ञानी और जानकार होते तो आज अनिल प्रजापति को मौका नहीं मिलता,इस नाते पछताओ मत और अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान के साथ आओ अन्यथा वजूद नष्ट होना तय है क्य���ंकि निचला तपका पढ़ लिखकर जागरूक हो रहा है। @narendramodi @AmitShah @blsanthosh @myogiadityanath @myogioffice @UPGovt @DM_Sknagar @UPSamajKalyan @BJP4India @BJP4UP
निदेशक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध संस्थान लखनऊ द्वारा समाज कल्याण विभाग ने य�� जो रिपोर्ट तैयार करवाई है समझने वालों के लिए इसके कई अर्थ निकलकर सामने आ रहे हैं किन्तु यहां तो भैंस के आगे बीन बजाओ भैंस बैठ पगुराय वाली कहानी चरितार्थ हो रही है और आरक्षण सबको चाहिए। कुम्हार ही वास्तविक शिल्पकार है यह जानते हुए भी इस रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और शासन प्रशासन की मिली भगत से योजनाबद्ध 17 अतिपिछड़ी जातियों के साथ वोट की राजनीति होती चली आ रही है अन्यथा रातोंरात सवर्ण आरक्षण ल���गू करने के तर्ज पर कबका यह बहुप्रतीक्षित मुद्दा साल्व किया जा सकता था। बात यदि उत्तराखंड की करें तो वहां की सरकार ने अपने प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कुम्हारों समेत 48 उपजातियों को शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत अनुसुचित जाति मान लिया है जबकि उत्तर प्रदेश का हिस्सा वह भी रहा है अर्थात किसी भी राज्य सरकार को पहले से निमित्त जातियों को उसके समूहों में परिभाषित करते हुए जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने का पावर है। उक्त रिपोर्ट पर गौर करने से स्पष्ट होता है कि 25 अप्रैल 2000 तक वंचित अतिपिछड़ी जातियों का मुख्य आधार एवं मानव सभ्यता का प���रथम शिल्पी कुम्हार/प्रजापति शिल्पकार श्रेणी के तहत संवैधानिक रूप से आनलाइन जाति प्रमाण पत्र निर्गत होने वाले एन आई सी पोर्टल पर अनुसूचित जाति में विराजमान रहा उसके बाद कूटरचित तरीके से इन्हें पिछड़ी मे डाला गया है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार शासनादेश दिनांक 31 दिसंबर 2016 को ही आफलाइन इन्हें पिछड़ी सूची से बाहर निकाला जा चुका है जो एक बड़ी प्रशासनिक त्रुटि दर्शाती है। राजनैतिक श्रेयबाजी की हो���़ में सरकार यदि अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान के संवैधानिक संघर्षों को दबाकर अपनी मुहर लगानी चाहती है ��ो भी हमें कोई एतराज़ नहीं क्योंकि मेरा लक्ष्य निचले पायदान को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है और अंतोगत्वा मा उच्च न्यायालय से अनुच्छेद 341 के अनुपालन में मामला निपट भी जाएगा यदि शासन प्रशासन और सरकार नहीं सुनती है तो भी। वैसे राष्ट्रपति महोदया एवं संसद भवन कार्यालय के निर्देशानुसार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के अनुसूचित जाति सूची संशोधन प्रकोष्ठ द्वारा प्रमु�� सचिव समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को संशोधन के लिए स्पष्ट पत्र भेजा जा चुका है फिर भी यदि भूमिका रचनी है तो राष्ट्रपति आपका, प्रधानमंत्री आपका, मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक आपका है फिर व्यवधान किस बात का। यह बात वंचित अतिपिछड़ी जातियां समझ नहीं पा रही है कि सरकार इस मुद्दे को चुटकी बजाकर निपटा सकती है किन्तु हमारे बीच के स्वार्थी नेताओं को आगे कर लालीपाप के सहारे दोहन और शोषण बदस्तूर जारी रखा जा रहा है और जब कोई विकल्प सत्ता का शेष नही बचेगा तो बकायदे रायता फैलाते हुए इस मुद्दे को निपटाया जाएगा प्लानिंग कुछ इस तरह से दिख रही है। @narendramodi @AmitShah @blsanthosh @myogiadityanath @myogioffice @UPGovt @BJP4India @BJP4UP @DM_Sknagar @UPSamajKalyan@ABPNews @RaviKum95676572 @rituraj_news @News18UP @ND_UPN @ANINewsUP @BKnews74455511
ये चीन का एक सरकारी स्कूल जिसमें फीस न के बराबर 1 युआन = 13 रुपए है।
इतने ही खर्च में स्कूल में बच्चों को विज्ञान प्रयोगशाला और डिजिटल कक्षा मुहैया कराई जाती है।
चीन ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देती है तो परिणाम भी विश्वस्तरीय निकलकर आते हैं।
The evening clinic had slowed down. Footsteps seemed to echo longer. The fan was increasing its noise. Or was it an illusion after a long day?
The sun was returning to the Marina Beach horizon. Yet there were patients outside, illnesses aren't aware of office hours.
Dr. X opened the next file. An elderly gentleman entered. Late 60s? Clean white shirt, tucked carefully into pitch-black trousers, perfectly worn with dignity.
“May I use the restroom, Dr?”
“Sure, of course.”
The gentleman returned and settled comfortably in the chair. Repeatedly adjusted his clothes. Dr. X watched. No pain. No anxiety. Habit.
“How many times last night?”
The man frowned in surprise. “6.”
The students looked up. Dr. X continued.
“And the stream is weaker than before.”
“Well, yes.”
“You feel the bladder is not fully emptied.”
Slow nod.
“You stand at the toilet and wait.”
After a brief silence ,“Yes, indeed.”
Dr. X turned to his students.
“Did you listen to his prostate speaking?” Silence.
Turning to the patient, Dr. X asked:
“Any burning?”
“No.”
“Fever?”
“No.”
“Blood in urine?”
“No.”
Dr. X nodded once. “This is Benign Prostatic Hyperplasia.”
A worried look crossed the patient’s face. “Cancer?”
“No. Enlargement of the prostate gland. Unlikely to be cancer.”
Dr. X turned to the students.
“The prostate surrounds the urethra, like a ring. With age and hormonal changes, the prostate enlarges.”
He clasped his hands. “The urethra, which we know carries urine, passes through the center. As the prostate enlarges, naturally the urine channel narrows.”
He paused.
“Like stepping on a garden hose.”
An intrepid student asked, “Why night symptoms?”
Dr. X smiled.
“At night, fluid shifts from the legs back into the circulation. Kidneys produce more urine. More urine, narrow channel- nocturia.”
Tests?
Urine test to rule out infection.
Ultrasound scan for prostate size and residual urine.
PSA, when indicated.
Dr. X took the patient inside the cubicle for a quick physical.
“Will I sleep again, Dr?”
“Oh, yes! The night belongs to you.”
After a few written tests and a prescription, the gentleman left.
Dr. X turned to his students.
“Age does not shout. It whispers. When the night is broken by footsteps to the bathroom, listen to the prostate.”
The Honourable CM Mr.M.K.Stalin in conversation with Famous scientist, ISRO Nambi Narayanan. Watching Mr.Stalin, one can never stop admiring his utter simplicity, humility, humanity & love for the common man. Of course, he is known throughout India as a peerless administrator. Has there been a better CM in the history of India? The ppl of Tamilnadu, gratefully recall his selfless sacrifices, immense hardwork, contributions towards the upliftment of Tamils. The people's CM! 🤩
संतकबीरनगर पुलिस कृप��ा ध्यान दें कि आप लोगों के बार बार डायरेक्शन के बावजूद हेयदृष्टता एवं भेदभाव के चलते यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र छात्राओं पर दो दिन लगातार हुए प्राण घातक हमले में कोरमपुर्ति के अलावा आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी और गोलबंद आरोपियों की दहशतगर्दी कायम है। अतः लचर कानून व्यवस्था एवं भ्रष्ट कार्यप्रणाली से तबाह होकर आज पुनः एसपी,डीएम,एल आई यू, आईबी, डीजीपी, मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्र��� को डाक से पत्र भेजकर प��ड़ित परिजनों के रक्षा सुरक्षा एवं मुकदमे में धारा बढ़ोतरी के साथ गिरफ्तारी के लिए गुहार लगाई जा रही है कृपया संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही कराने का कष्ट करें। @narendramodi @AmitShah @blsanthosh @myogiadityanath @myogioffice @dgpup @BJP4India @BJP4UP @Uppolice @UPGovt @DM_Sknagar @santkabirnagpol
सन 2012 में सफदरगंज मेडिकल कॉलेज वर्तमान में वर्धमान महावीर कॉलेज में एक मामला आया कि छात्रों को जानबूझकर फैल किया गया,
कोर्ट ने भालचंद्र मुंगेकर कमेटी बनाई जांच के लिए, उसके बाद जो परिणाम सामने आए उसने रोंगटे खड़े कर दिए, रिपोर्ट ने साफ़ किया कि SC/ST छात्रों की कॉपियों पर जाति के टैग लगे हुए थे, उनको चिन्हित करके चुन चुन कर फैल किया गया, उनको मानसिक प्रताड़ना दी गई,
बाद में दोषी प्रोफेसरों पर SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और पीड़ित छात्रों को ₹10 लाख मुआवज़ा तय हुआ,
जातिवाद आज भी चरम पर है और उसका आधार जाति ही होता है, अनदेखा करने से ख़त्म नहीं होगा, ��ूजीसी के नए रेगुलेशन इसी भेदभाव को ख़त्म करने के लिए लाए गए थे,
लेकिन मनुवादी स्टे ले आए अब वह खुलकर जातिवाद भी करेंगे और कार्यवाही भी नहीं होगी 🔥🔥🔥
4 लाख भी क्यो देते हो?
20 बच्चों की जान उसने तुम्हारे चिल्लर के नहीं बचाई है।
क़ीमत उन परिवारों से पूछो जिनके चिराग बुझने से उसने बचाए हैं ।
#KanchanBai
माननीय कोलेजियम के जज साहब का मानना है कि भेदभाव के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया गया तो उसका दुरुपयोग हो सकता है, इसलिए ऐसा क़ानून नहीं होना चाहिए। अब कह रहे हैं कि अगर न्यूनतम मज़दूरी तय कर दी गई, तो लोग काम पर रखना बंद कर देंगे—इसलिए शोषण चलता रहना चाहिए।
क़ानून के दुरुपयोग की आशंका कभी भी क़ानून न बनाने का आधार नहीं हो सकती। अगर ऐसा होता, तो श्रम क़ानून, महिला सुरक्षा क़ानून या मानवाधिकार क़ानून कभी बने ही नहीं होते।
यह सोच न्याय की नहीं, बल्कि मौजूदा असमानता और जा���ीय प्रिवलेज को बचाए रखने की सोच है। इनकी तथाकथित “मेरिट” और न्याय की समझ आधुनिक संवैधानिक मूल्यों और वैश्विक न्याय की समझ से मेल नहीं खाती, जहाँ न्याय का मतलब कमज़ोर को सुरक्षा देना होता है, न कि ताक़तवर की सुविधा बनाए रखना।
ये हमारे लिए सौभाग्य और गौरव की बात है कि आज संत रविदास जयंती के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट को ‘श्री गुरु रविदास म��ाराज जी’ एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा। ये हम सबके लिए अत्यंत खुशी का दिन है। ये श्री गुरु रविदास महाराज जी के शाश्वत आदर्शों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है। समानता, करुणा और सेवा का उनका संदेश हम सभी को गहराई से प्रेरित करता है।
विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहे भेदभाव पर रोक लगाने हेतु लायेगये U.G.C विनियमन कानून के नाम पर Sc /st/obc समाज के लोगों के आंख में धूल झोंकने में भा.ज.पा. सरकार एक बार फिर सफल हुई। भा.ज.पा की ��ीति थी कि "चोर से कहो चोरी करो" और "जनता से कहो जागते रहो" इसी तर्ज पर जहां एक तरफ U.G.C समता कानून के माध्यम से Sc /st/obc को खुश करने की ढोंग कर रही थी, वहीं दूसरी ओर ऊंची जातियों से इसका विरोध भी करवा रही थी, जिसकी आशंका थी, वही हुआ सरकार के इशारे पर मा0 सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करवा कर आखिर U.G.C विनियमन कानून को कार्यान्वयन पर रोक लगवा दी। जहां कानून बनने से Sc /st/obc खुश वही मा0 न्यायपालिका से स्टे हो ��ाने से स्वर्ण जातियां भी खुश। इसे कहते हैं शतरंज की चाल सांप भी मर गया लाठी भी नहीं टूटी । भा.ज.पा के धोखे से सावधान रहो।
UP में 69 हज़ार शिक्षक भर्ती में दलित, पिछड़े समाज के बच्चों के आरक्षण की लूट हुई,
मामला सुप्रीम कोर्ट में है,
जज लोग तारीख पर तारीख दे रहे हैं,
लेकिन UGC गाइड लाइन्स पर रोक का फैसला एक ही सुनवाई में सुना दिया,
क्योंकि यहाँ मामला अपने लोगों का था,