क्योंकि वीपी सिंह की सरकार ने, भाजपा के (लोकसभा और राज���यसभा) समर्थन के साथ बौद्धों को 1990 की मई में दलित का दर्जा दिया था। अतः, वो दलित में गिने जाते हैं।
भाजपा का जातिवाद और आरक्षण प्रेम अनन्य है। तब से है जबसे ये सत्ता में थे नहीं। बाहरी समर्थन की सरकार में बाजपेयी से ले कर कई नेताओं ने डिबेट किए बौद्धों के पक्ष में।
कांड करते टाइम बच्ची नहीं है
और पकड़े जाने पर बच्ची है
माँ-बाप ने पैदा करके छोड़ दिया है, पढ़ाई लिखाई करनी नहीं है, आवारागर्दी करवा लो इनसे
फिर भविष्य में अपनी नाकामियाबी का ठीकरा सवर्णों पर और ब्राह्मणों पर फोड़ेगी।
एक सामान्य वर्ग के छात्र के रूप में,
"निष्पक्ष शिक्षा" और "निष्पक्ष परीक्षाओं" की बातें उन लोगों से सुनना कठिन लगता है, जो हर वर्ष होने वाली हर प्रतियोगी परीक्षा में देश की आबादी के एक बड़े वर्ग को लगभग 50% सीटों पर समान अवसर से वंचित किए जाने पर मौन रहते हैं।
यदि निष्पक्षता की बात करनी है, तो वह सभी के लिए होनी चाहिए-हर छात्र के लिए, बिना किसी भेदभाव के।
Why media is no longer covering the IIT Bombay case?
When there is proof of student cheating, & no proof of professor doing anything wrong, then why isn't Professor being reinstated?
Professor Dulla deserves an apology & compensation for the harassment he had to go through!
Make patriarchy great again #MPGA
Titanic is what patriarchy actually looks like
>74% of women survived 19% of men survived.
>There was no law that said men had to die. There was no police forcing them.
>It was just an unwritten code "women and children first."
>Men who were called "patriarchs" and "oppressors" stood back, put women in boats, smoked a last cigarette and went down with the ship.
>1,500 men drowned so that 74% of women could live.
>If patriarchy was only about male power and female oppression, those lifeboats would have been full of first-class men.
>They weren't. They were full of women.
>Feminism tells you patriarchy kills women.
>Titanic tells you patriarchy told men to die for women.
We worship Shivaji Maharaj’s legacy, then use his forts as public dustbins. 🫡
History in our WhatsApp status, garbage on our heritage. What a proud legacy! 🙏🏻💀
सरकार की कमज़ोर पैरवी?आधी अधूरी जानकारी?
अरे कांग्रेसी जी,
सरकार तो डंके की चोट पर आरक्षण दे रही थी, BRAUSS ज��से फ़र्ज़ी रिपोर्ट बनवा रही थी, DMK का वकील ला रही थी, सारे हथकंडे अपना चुकी थी!
वो तो हमारे वकील और हमारा डेटा सबपर भारी प��़ा!
इसके कांग्रेस और भाजपा फेल हो गई!
समझे?
महाराष्ट्र, भाजपा सरकारें और आरक्षण पर अंतहीन अध्यादेश
भाजपा सरकार जहाँ भी है, आरक्षण बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। महाराष्ट्र में ‘मराठा आरक्षण’ चार बार कोर्ट ने निरस्त किया है, भाजपा सरकार या तो अध्यादेश लाती है, या योजना का नाम बदल कर लागू कर देती है।
मजे की बात यह है कि जब तक हायकोर्ट ��से निरस्त करता है, 3-5 वर्ष लगते हैं। इस बीच, ये इस लूपहोल का लाभ उठाते हैं कि निरल्त नहीं हुआ, तो आरक्षण चालू रहेगा। यानी, आप कोर्ट में याचिका लगाओ, पैसे खर्च करो और सरकार नए नाम से वही कानून ले आती है।
यही कार्य मध्यप्रदेश में चल रहा है। चार बार हायकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के बाद, अब भाजपा कॉन्ग्रेस को ब्लेम कर रही है कि उन्होंने लीगल पेपर खराब कर दिए। यह नहीं कि शांति से बैठ जाएँ।
और चटुआ गिरोह आपक�� यह बताने पर तुला है कि कॉन्ग्रेस सौ प्रतिशत आरक्षण ले आएगी। यह सब हमारे सामने धड़ल्ले से हो रहा है और फिर भी @BJP4India इस घटिया नीति को बढ़ाते हुए, हमें यह कह रही है कि कॉन्ग्रेस आई तो बढ़ा देगी।
भाजपा आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक है। उनका मन कुलबुला रहा है कि निजी क्षेत्र में कॉन्ग्रेस से पहले कैसे ला कर लहरिया लूट ले। उसके पास यही अंतिम राम… सॉरी ‘मोदी-बाण’ बचा हुआ है कि देखो हमने निजी में भी आरक्षण दिया, हमें वोट द��।
संभव है कि सवर्णों को एक बहुत बड़ा झुनझुना 30 जनवरी-1 फरवरी 2027 को आए: EWS बच्चों को फॉर्म भरने, फीस देने आदि में आर्थिक छूट मिलेगी। यह छूट तब भी OBC से कम होगी। SC/ST यदि निःशुल्क पढ़ेंगे तो OBC 50% पर और तत्काल में EWS के लिए 25% छूट की घोषणा की जाएगी। यह इसलिए करेंगे ताकि दलित नारा�� न हो जाए कि निर्धन सवर्णों को उनके बराबर कैसे माना जा रहा है!
हालाँकि, सवर्ण समाज यह लॉलीपॉप नहीं चूसेगा और इसकी डंडियों को पिघला कर एक डंडा बनाएगा और सामूहिक रूप से भाजपा को चुनावी उपहार में देगा।
Amount of money given as compensation under SC/ST act in last 5 years = 2627 crores
2020-21= 593.42 crores
2021-22= 610.11 crores
2022-23= 392.70 crores
2023-24= 535.30 crores
2024-25= 495.29 crores
(Source: Ministry of social justice)
If naming airports or Government schemes after the name of Gandhi family was wrong then how come giving Modi's name to airports is right?
This will set a new precedence, a new competition, If Yogi ji is doing it then why not us? Tomorrow Rekha Gupta will do it, day after tomorrow Bhajan Lal Sharma, then Mohan Yadav then someone else.
I think it is better to name the Airport after Atal ji or Savarkar ji, or may be Golvalkar ji.
You could have chosen the name of Local Freedom Fighter May be Mangal Pandey who comes from UP itself.
Or may be any Hindu ruler of that area May be Maharaja Surajmal (Hails from western UP), or Samrath Hemu who also hails from western UP.
Think about it.
At central level, SC/ST reservation is 22.5%
But in Madhyapradesh,
SC/ST reservation is 36%
That's why OBC cannot have 27%
So, If you are so worried about your OBC brothers, please reduce your 36% to 22.5% (like you get at centre).
Khud unka haq liya, ab blame GC ko?
Gajab 😂
ये कोई देवेंद्र यादव शुद्र हैं, मैं नहीं कहता, स्वयं कहते हैं क्योंकि और कुछ भी कहें बेचारे चर्चा में नहीं आ पाएँगे; और दूसरी बात यह कि इन्हें लगता है ब्राह्मणों से ये झाड़ू पोछा करवाएँगे तो दलितों का उद्धार हो जाएगा।
पहले तो इनका चूतियापा सुनिए। देवेंद्र भाई, चाहते तो आप जंतर मंतर पर रुकी हुई बस भी रोक सकते थे, चितकबरी अंडरवियर वाले की तरह कुछ आप भी कर सकते थे, या बैड बिट्च लिखवा कर नाच भी सकते थे, बट ब्रो वोक अप एंड चोज़ वायलेंस!
ये मुझे समझ में नहीं आया कि ब्राह्मण झाड़ू-पोछा करेगा तो इसके समा�� का उद्धार कैसे हो जाएगा?
यदि ऐसी कोई स्टडी है तो मैं आज से झाड़ू देना चालू कर देता हूँ, मेरा तो छोड़ो अगर यह सत्य होता तो मोदी जी हाथ में झाड़ू ले कर ही टहलते! नहीं… नहीं…. मैं यहाँ मटकी नहीं बोलूँगा! बिल्कुल नहीं, भले मोदी जी ये बोलते रहें कि वो अति पिछड़े समाज से आते हैं!
और यह भी कि मोदी जी ख़ुद ही मुझ पर मोदी एक्ट का केस कर दें, यह शोभा नहीं देगा। वैसे झाड़ू-मटकी तो कुछ लोग स्वयं ही त्याग नहीं रहे!
देवेंद्र यादव जैसों को देखते हूँ तो पीड़ा होती है कि कहाँ ये स्वतंत्रता से पूर्व 1910 में स्वयं को यादव क्षत्रिय महासभा का अंग मानते थे, फिर शरद यादव के चक्कर में स्वयं के गौरव पर पिछड़ेपन का कपड़ा ओढ़ लिए और अब शुद्र बनने के लिए लालायित हैं कि कहीं पर तो लोग इन्हें नेता ��हेंगे!
दर्जनों ट्रेन, दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशन आदि बंद कर दिए गए हैं। एक के बाद एक मूर्खतापूर्ण निर्णय!
इनसे हजार लोग हैंडल नहीं हो पा रहे। ये स���वयं इन चूतियों को बड़ा बना रहे हैं।
कहीं मोदी जी लॉकडाउन की घोषणा न कर दें। चटुआ गिरोह आता ही होगा कोई मास्ट्रस्ट्रोक ढूँढने।
शेर जब दो कदम…
This is what we have come to, after blackmailing by some so-called shoshits-peedits??
So we are trying to uplift people by promoting cheating & destroying discipline in our educational institutions?