वैष्णव जन अर्थात् शुद्ध, पवित्र, उत्तम विचार वाला व्यक्ति। अब विचार करो ये गुण तो आर्यों के मूल गुण होतें हैं और वो आर्य ही तो होता है जो निस्वार्थ भाव से सबकी की पीड़ा समझता है और प्राणी मात्र से सुख के लिए कार्य भी करता है। आओ…सभी के विचारों को पवित्र कर सबको आर्य बनाएँ।
आर्य समाज का नौवाँ नियम- आर्यों का पतन इस हद तक हुआ की वो ये तक भूल गये कि, या तो मैं समाज के लिए कार्य करके समाज को अपने आर्य विचार के अनुरूप प्रभावित करूँ अन्यथा अनार्य हुआ समाज मुझे और मेरी आने वाली पीढ़ियों तक को प्रभावित करेगा।
आज…आर्य महासंघ समाज को प्रभावित कर रहा है।
आर्य समाज का दूसरा नियम- इसको नियम के उल्लंघन मात्र आर्यों के देश में जितनी जनसंख्या उतने-उतने ईश्वर लोगों ने अपने अपने स्वार्थ में बनाये। धन्य है वो लोग जो आर्य समाज की शरण में आ रहें है और सच्चे ईश्वर को जान रहे हैं।
ध्यान रहे..आर्यों की बढ़त में संसार के सुख में बढ़त है तो आओ आर्य की उन्नति की खबरें सुनने की आदत डालें। प्रत्येक सोमवार रात आठ बजे आर्य समाचार सुनें। सभी आर्य-आर्याएँ लिंक पर क्लिक कर अभी चैनल को subscribe करें और करावें।
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करोड़ों साल तक अपराजय रहने वाला देश आर्यावर्त्त अपने नाम तक भी नहीं बचा पाया इसका कारण जानते हो..? इसका कारण था हमने एक ईश्वर, एक धर्म, एक भाषा, एक पहचान वाले सिद्धांत को छोड़ दिया परिणाम सबके सामने है आज देश का हर राज्य अपने आप में अलग देश माँग रहा है। आओ एक बने आर्य बने
कवि दिनकर जी भी जानते थे कि, हिंदू शब्द भारतीय शब्द नहीं है जिसको बोलकर हम गर्व करें, हिंदू शब्द तो मुग़लों द्वारा दी जाने वाली गाली है। जब से हमने अपने मूल नाम आर्य को छोड़ा है तब से न मात्र हमारा अपितु हमारे महान पूर्वजों का रोज़ अपमान किया जाता है। समाधान- आर्य समाज है।
संगठन के कारण ही दुनिया को नरक बना देने वाली विचारधारा के विश्व में आज 56 देश है। और संसार भर के आर्यों को एकता सूत्र में बांधने का सामर्थ्य रखने वाला महा संगठन आर्य महासंघ। आप सभी को चक्रवर्ती राज्य तक दिला सकता है। तो आओ अपने स्वार्थों को छोड़ संगठन शक्ति में बंधे और बांधे।
ये लाखों हिंदू जगन्नाथ शब्द का अर्थ भी ठीक से जान लेते तो आज इस जड़ (मूर्ति वाले) जगन्नाथ के रथ के बजाए सर्वज्ञ, चेतन, निराकार जगन्नाथ के ज्ञान (वेद विद्या) का रथ खींच रहे होते। वेद विद्या का प्रचार- प्रसार ही धर्म है न कि इस हज़ारों टन वज़नी रथ को खिंचना।
धर्म प्राणिमात्र के लिए एक होता है पर मज़हब नहीं। और अधिकतम मज़हब सत्य से कोशों दूर होते हैं। और जब इनकी मान्यताओं के विपरीत कोई सत्यनिष्ठ कार्य कर देता है तो ये मज़हबी दैत्य वही करते हैं जो यूरोप में गैलीलियो,सुकरात व भारत में स्वामी श्रद्धानन्द, महा. राजपाल, आदि के साथ किया।
ये सेक्यूलरिज़म वो कीड़ा है जो किसी व्यक्ति तो क्या पूरी सभ्यता, संस्कृति को खा जाता है। यही कीड़ा भारत को 1947 से खाए जा रहा है। अगर अपनी सुरक्षा, राष्ट्र रक्षा चाहते हो तो सेक्यूलरिज़म छोड़, धार्मिक बनो और सभी को बनाओ।
धार्मिक अर्थात् आर्य।
आर्य महासंघ वो शक्ति पुंज है जो एक दिन संसार के प्रत्येक मनुष्य को वेद विद्या से प्रकाशित करेगा।
आर्य महासंघ ने एक माह में जींद व कुरुक्षेत्र जनपदों में दो आर्य सम्मेलन, देश भर में दस सत्र व संध्या की कक्षा लगाई हैं। आओ आर्य महासंघ के साथ जुड़ उन्नति करें,अन्यथा कुछ हाथ न लगेगा।
संगठन ही व्यक्ति हो , संगठन ही भक्ति हो
संगठित हर काम में , एक अद्भुत शक्ति हो
जब इरादे नेक हों , द्धेय सबके एक हो
मंत्रणा से मन मिले , मन में यह आसक्ति हो
मन में न हो भिन्नता , न किसी से खिन्नता
आर्यत्व मन में हो भरा , आर्यत्व की अभिव्यक्ति हो
#जय_आर्य#जय_आर्यावर्त्त
विद्याया सर्वसिद्धिः स्याद्विद्ययाऽमृतमश्रुते- वेद विद्या के अध्ययन से समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं, यहां तक कि उसके समक्ष अमृत-रस अक्षनपान के रूप में उपलब्ध हो जाता है। सांगोपांग वेद विद्यापीठ आर्ष गुरुकुल टेटसर दिल्ली के ब्रह्मचारियों का वेद आरम्भ संस्कार का मोहक दृश्य।
हम स्वयं को ऋषियों महर्षियों की संतान कहने के अधिकारी तब ही होते हैं जब हम उनके बताए मार्ग पर चलें। ऋषि पतंजलि ने योग को “योगः चित्तवृत्तिनिरोधः” के रूप में परिभाषित किया, पर दुर्भाग्य देश का ये है शारीरिक व्यायाम को ही योग बना डाला।अब आर्य ही समाज में अष्टांग योग सत्यापित करें!
नारी जाति को भी विद्या मिले ऋषि दयानंद के इसी सपने को लेकर बढ़ रहा आर्य महासंघ का आर्या गुरुकुल महाविद्यालय करनाल! जिसमें 13 से 19 जून तक भिन्न भिन्न प्रांतों से आई 38 आर्याओं ने उपदेशिका कक्षा में भाग लिया। आर्याओं का ये तप निश्चित ही आर्यावर्त्त की नीव का पत्थर साबित होगा।
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"कृण्वन्तो विश्वर्मायम्"अर्थात् संसार के सभी मनुष्यों को आर्य(श्रेष्ठ एवं प्रगतिशील) बनाओ। ये आर्य निर्माण के कार्य का अंतिम लक्ष्य है।और लक्ष्य तक पहुँचने की सही दिशा आर्य महासंघ ने समाज को दी है। तो आओ राष्ट्रहित के महान कार्य आर्य निर्माण में आर्य महासंघ के सहभागी बनें
सत्ता का आकर्षण और अधर्म से शीघ्र सफलता मिलती देख पथ से भटकना स्वाभाविक है। आर्यों को चाहिए कि ऐसी हर इच्छा को मार कर वेदोक्त पक्षपात रहित न्याय के पथ पर दृढता पूर्वक चलते रहें।आर्य महासंघ इसे समाज में स्थापित कर रहा है।
#जय_आर्य#जय_आर्यावर्त्त
धर्मपथ पर चलकर ही राष्ट्र की रक्षा संभव है। इसलिये संसार के प्रत्येक व्यक्ति को धर्मपथ पर चलना ही चाहिए, विशेषतः क्षत्रिय को क्योंकि बिना धर्म को जाने और माने, क्षत्रिय न तो अपनी, न समाज की और न ही राष्ट्र की रक्षा कर सकता है। फिर वह चाहे संसार का सबसे बड़ा दल ही क्यों न बना ले।