#बिहार#पटना: प्रदेश के नगर निकायों को 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत केंद्र सरकार से 9 हजार 169 करोड़ रुपये की राशि मिली है।
▶️मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।
▶️इस राशि से राज्य के नगर निकायों में बुनियादी शहरी सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
▶️मुख्यमंत्री ने बताया कि पटना नगर निगम को 5 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
▶️उन्होंने राशि के आवंटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
@airnewsalerts@ddnewsBihar@samrat4bjp@AIRNewsHindi
Bihar GAD के अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों एवम अन्य भर्ती एजेंसियों के द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में व्यापक परीक्षा सुधार के लिए प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में पटना उच्च न्यायालय के सिटिंग जज हरीश कुमार अध्यक्षके रूप में मनोनीत हुए हैं, सरकार से निवेदन है कि चूँकि BPSC एक संविधानिक आयोग है इसलिए इतने सारे संस्थानों के साथ जाँच कठिन लगती हैअतः BPSC के लिए अलग न्यायिक आयोग और BPSC में परीक्षा सुधार एक बड़ी समस्या है, परंतु 70 वीं BPSC सुधार का नहीं जाँच का विषय है,अतः 70 वीं में हुई गड़बड़ियों की जाँच के लिए सिटिंग जज की ही अध्यक्षता में एक अलग जाँच समिति का गठन किया जाए, परीक्षा सुधार से पहले इस गड़बड़ी और सबसे प्रमुख बात चल रही ट्रेनिंग को रोका जाए, क्योंकि ट्रेनिंग और जाँच साथ साथ नहीं चल सकती है.
#WATCH | Delhi: On death threat to Union Minister and LJP(R) President Chirag Paswan, party MP Arun Bharti says, "The death threat was issued through a registered letter sent to the Ministry of Chirag Paswan. This is a matter of concern for all of us, for his family. We have written to the Home Ministry and informed them about this. We have also said that adequate security arrangements for our party's national president should be made, this letter should be examined and action should be taken against whoever is found guilty..."
Union Minister for Food Processing Industries and LJP(R) President Chirag Paswan received a death threat today by post, which stated - "You will be killed shortly by hardcore Terrorists". Minister's Office has written to Union Home Secretary regarding the death threat to him.
A long-pending issue that directly affects the lives of people in Bihar and Jharkhand has finally found a solution.
The resolution of the 25-year-old Sone River water-sharing dispute is welcome news, particularly for Bihar’s farmers and rural communities.
Thanks to Hon Home Minister Shri @AmitShah Ji for his personal initiative and leadership in bringing the two states to an agreement.
This would ensure the availability of adequate water for drinking and irrigation to a large population across the districts of Bhojpur, Buxar, Rohtas, Kaimur, Aurangabad, Arwal, Gaya, and Patna in Bihar.
@samrat4bjp
#WATCH | Delhi: On Union Minister Chirag Paswan's statement regarding purification row, Lok Janshakti Party (Ram Vilas) MP Arun Bharti says, "...The Haldwani incident is condemnable, but tell me, when our leader expresses concern, is it for a specific party or a specific leader? No, he is expressing concern to eliminate this casteist mindset... In 2016, when Amit Shah held a meeting in Haridwar, Uttarakhand, Congress workers 'purified' the stage... We condemn that incident as well. Similarly, in 2020, when Amit Shah held a program in Kolkata, Congress student wing purified the stage with cow dung and 'Ganga Jal'; we condemn that incident too... our leader Chirag Paswan's concern is focused on this mindset and on eradicating it. It is neither in favor of nor opposed to any party or leader; rather, it stands in opposition to that kind of mindset."
"देश का हर दूसरा नागरिक OBC है, लेकिन क्या यहां संसद में हर दूसरा सांसद obc है!"
"OBC को मिलने वाली 9 लाख नौकरियां उन्हें नहीं दी गई।"
~ @sanjuydv Ji
जब आरक्षित कोटे की लाखों पद खाली पड़े है तो ये आरक्षण ज्यादा खाने वाली बात कौन धूर्त करता है?
ये सुनिए और धारणा और तथ्यों के बीच के अंतर को समझिए।
प्रोपेगंडा के माध्यम से यह धारणा बनाई गई कि ओबीसी की केवल कुछ जातियाँ ही आरक्षण का लाभ उठा रही हैं, जबकि आँकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं।
#Watch | Mounting a sharp attack on the BJP and RSS over the alleged shuddhikaran (purification) ceremony at the venue of a rally addressed by Congress president Mallikarjun Kharge in Haldwani earlier in August, the Leader of the Opposition in the Lok Sabha, Rahul Gandhi, on Saturday (August 29, 2026), said the act amounted to the practice of untouchability, which is a crime under the Constitution.
https://t.co/xBWzm5T3xu
श्यामलाल यादव जी कौन हैं?
📰 1. तीन दशक से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव
श्यामलाल यादव ने 30 साल से अधिक पत्रकारिता की है। उन्होंने जनसत्ता, अमर उजाला और इंडिया टुडे जैसे संस्थानों में काम किया और नवंबर 2011 से The Indian Express से जुड़े हुए हैं।
उनकी पहचान मुख्य रूप से खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) से बनी है।
🔎 2. RTI को पत्रकारिता का हथियार बनाया
श्यामलाल यादव की सबसे बड़ी पहचान है—सूचना का अधिकार (RTI) का बड़े पैमाने पर पत्रकारिता में इस्तेमाल।
उनके बारे में Bennett University और अन्य संस्थागत स्रोत बताते हैं कि उन्होंने 10,000 से ज्यादा RTI आवेदन दाखिल किए हैं।
उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने सरकारी व्यवस्था, प्रशासन और सार्वजनिक संस्थानों में जवाबदेही के सवाल उठाए।
उनकी खोजी रिपोर्टिंग में शामिल विषयों में:
सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राएं
सांसदों द्वारा रिश्तेदारों को सहायक नियुक्त करने के मामले
फर्जी शोध/अकादमिक जर्नल,
LIC की लैप्स पॉलिसियां,
नेताओं/अधिकारियों को मानद डिग्रियां,
जनधन खातों में बैंक कर्मचारियों द्वारा पैसा डालना,
प्रदूषित नदियों की स्थिति शामिल रहे हैं।
🌍 3. अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकारिता में भी काम
श्यामलाल यादव International Consortium of Investigative Journalists (ICIJ) के सदस्य हैं।
उन्होंने दुनिया की कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय खोजी परियोजनाओं में काम किया है, जिनमें:
Paradise Papers
FinCEN Files
Pandora Papers
Uber Files
Hidden Treasures
शामिल हैं।
यह उनके काम की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को दिखाता है।
🏆4. कई बड़े पत्रकारिता पुरस्कार
श्यामलाल यादव की एक खास उपलब्धि यह है कि वे Ramnath Goenka Award for Excellence in Journalism – Investigative Reporting को दो बार जीतने वाले पत्रकार हैं। Indian Express और ICIJ दोनों उनकी इस उपलब्धि का उल्लेख करते हैं।
उन्हें अन्य पुरस्कार भी मिले हैं, जिनमें:
Lorenzo Natali Journalism Prize — European Commission
Developing Asia Journalism Award — ADB Institute
National RTI Award
The Statesman Rural Reporting Award
ACJ Investigative Journalism Award
Ganesh Shankar Vidyarthi Award
आदि शामिल हैं।
🎓 5. शिक्षा
Indian Express की प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने University of Allahabad से MA Economics शुरू किया था लेकिन पूरा नहीं किया।
इसके बाद उन्होंने:
BJ — Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism, Bhopal
MCJ — Barkatullah University, Bhopal
से पत्रकारिता/संचार संबंधी शिक्षा प्राप्त की।
माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय उन्हें अपने पूर्व छात्रों में प्रमुख पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करता है।
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📚 6. उनकी किताबें
Journalism Through RTI: Information, Investigation, Impact
यह उनकी चर्चित किताब है, जिसमें उन्होंने बताया है कि RTI के माध्यम से पत्रकार कैसे सरकारी रिकॉर्ड से महत्वपूर्ण जानकारी निकालकर खोजी रिपोर्ट तैयार कर सकता है।
इसका हिंदी और मराठी में भी अनुवाद हुआ है और इसका नया संस्करण Routledge से प्रकाशित हुआ।
At The Heart of Power: The Chief Ministers of Uttar Pradesh
यह उनकी दूसरी महत्वपूर्ण किताब है।
इसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के 21 मुख्यमंत्रियों के राजनीतिक जीवन, शासन, सत्ता और राजनीतिक परिस्थितियों का अध्ययन किया है—आजादी के बाद के दौर से लेकर योगी आदित्यनाथ तक। किताब 2024 में Rupa Publications से प्रकाशित हुई।
इस किताब में UP की राजनीति के कई कम चर्चित प्रसंग और सत्ता के अंदर की राजनीतिक प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई है। 2025 में दिल्ली में इस किताब पर चर्चा भी आयोजित हुई थी।
“आरक्षण जहां नहीं है, वहां नीयत कैसी है…”
और वीडियो में आरक्षण, मेरिट और नियुक्ति से जुड़ा सवाल उठाया जा रहा है।
न्यायपालिका के कोलिजियम जजों और वाइस चांसलर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर न तो कोई आरक्षण है और न ही ये पद तथाकथित “मेरिट” के आधार पर भरे जाते हैं। इन महत्वपूर्ण पदों पर देश की लगभग 85% आबादी की भागीदारी लगभग नगण्य है।
आरक्षण केवल प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है। यह जातिवाद, भाई-भतीजावाद और जातीय नेटवर्क के उस नेक्सस को तोड़ने का भी एक जरूरी माध्यम है, जिसने सत्ता और संस्थानों पर कुछ खास समूहों का वर्चस्व बनाए रखा है।
पत्रकार ने पूछा - अखिलेश जी कह रहे हैं कि इस बार हम आएँगे। जवाब मिला - “अखिलेश अहीर… मट्ठा, दही, दूध निकाले!”
यही कुछ शब्द बता देते हैं कि जाति इस समाज में कितनी गहरी बैठी है।
जिस व्यक्ति ने मुख्यमंत्री रहते हुए एक्सप्रेसवे, मेट्रो, अस्पताल, शिक्षा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनेक काम किए, उसकी योग्यता और राजनीतिक सफ़र पर बहस करने के बजाय उसे उसकी जाति से जोड़कर बनाए गए रूढ़िगत पेशों तक सीमित कर दिया जाता है।
यह किसी एक महिला या एक व्यक्ति को निशाना बनाने की बात नहीं है। यह उस वर्चस्ववादी मानसिकता की एक बानगी है, जो आज भी इंसान की योग्यता से पहले उसकी जाति देखती है।
इसीलिए जाति अभी गई नहीं है। और जब तक जाति पीछा नहीं छोड़ती, सामाजिक न्याय की लड़ाई भी पीछा नहीं छोड़ेगी।
@yadavakhilesh
आरक्षण के समर्थन में वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल यादव सर ने जो कहा वह एकदम परफेक्ट है।
"जहां आरक्षण नहीं है, पहले वहां तो बराबरी की व्यवस्था लाइए, अगर ऐसा नहीं करते तो स्वाभाविक है कि मन में खोट है।"
8 सितंबर को पटना मे आरक्षण समर्थको अनुसूचित जाति जन जाति के लोगों का होगा महाजुटान /आंदोलन
बिहार मे दलित आदिवासी पिछड़े समाज को आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65% किया जाए
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू किया जाए, न्यायपालिका मे आरक्षण दिया जाए, कॉलीजियम सिस्टम समाप्त किया जाए, आरक्षण को संविधान के 9वीं अनुसूची मे शामिल किया जाए.
बिहार मे लगातार दलित हत्या पर रोक लगे एवं दलितों को न्याय मिले, ठेकेदारी मे 59% आरक्षण मिले, SC ST कर्मचार्रियों को प्रमोशन मे आरक्षण मिले
सभी मांगो के लेकर 8 सितंबर को पटना मे दलित संगठनों द्वारा बड़ा आंदोलन होगा
अमर आज़ाद पासवान, सामंत प्रधान, प्रो • शशिकांत पासवान, सोनू सम्राट, सौरव कुमार, विकास कुमार, चन्द्रमानी पासवान, मंजित रविदास, विकास निखिल, अमरजीत राम
#reservation #SCSTAct #amarazad #Andolan #bihar
गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज!
दो केंद्रीय मंत्री श्री जीतनराम मांझी और चिराग पासवान 𝐑𝐒𝐒 के निर्देश पर विपरीत दिशाओं में बात कर 𝐁𝐉𝐏-𝐑𝐒𝐒 के आरक्षण खत्म करने के मूल उद्देश्य से ध्यान भटका आरक्षण सर्मथक जनभावना का आंकलन करना चाहते है। जिनका खुद का स्वतंत्र वजूद नहीं होता वो ऐसे ही 𝐁𝐮𝐧𝐜𝐡 𝐨𝐟 𝐓𝐡𝐨𝐮𝐠𝐡𝐭𝐬 मानने वालों के निर्देशन में अभिनय करते है।
सर्वप्रथम तो आरक्षित कोटे से जीते ये मंत्री संविधान और आरक्षण विरोधियों की गोद में बैठ सत्ता का चरम सुख प्राप्त कर रहे है। इन्हें समाज और वैचारिकी से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आरक्षण से इन दोनों को सख़्त नफ़रत है तो ग़ैर आरक्षित सीटों से चुनाव लड़कर देख लें, ज्ञान चक्षु खुल जायेंगे।
आरक्षण विरोधी बीजेपी के साथ रहते श्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जी की पार्टियों की क्या स्पष्ट विचारधारा है, यह कोई नहीं जानता?
अगर ये पार्टियां आरक्षण समर्थक है तो हमारी सरकार में बिहार में बढ़ाई गयी 𝟔𝟓 % आरक्षण सीमा को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल क्यों नहीं कराते? ये घोर अवसरवादी और सुविधाभोगी नेता आरक्षण बढ़वायेंगे नहीं, विचारधारा की राजनीति करेंगे नहीं केवल और केवल मंत्री पद, सुरक्षा और बंगला प्राप्त करने के लिए येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहेंगे।
मोहन भागवत ने भी पहले आरक्षण समीक्षा की बात की थी, बिहार ने कान पकड़ कर अच्छे से उठक-बैठक करवा दी थी। अब फिर करेंगे तो बिहारी लोग 𝐑𝐒𝐒/𝐁𝐉𝐏 का मुर्गा बना देगा।
एकदम से कुछ बकलोल आज बता रहे हैं कि वह पेपर कप में चाय पीते हैं
असल में यही लोग अपने घर में सफ़ाई कर्मचारियों, काम करने वालों को अलग बर्तन में खाना देते हैं
इन्होंने कभी जाति का दंश झेला ही नहीं है
इनको एक दलित के साथ जो भेदभाव होता है उसका अंदाज़ा ही नहीं है
राहुल गांधी जी ने कड़वा सच बोल दिया तो बिलबिलाना लाज़मी है
They are a bunch of ignorant, insensitive idiots