एक बार किसान खेतों में घास काट रहे थे"
तब निकलते वक्त रमा पायलट जी ने राजेश पायलट साहब से कहा!
देखिए बार बार गिर रहे है फिर भी इसको उठाने में में लग रहे हैं!
तब राजेश पायलट साहब हंसे और"
रमा पायलट जी से बोले की आज से 20 वर्ष पहले मैं भी यही घास काटा करता था!
राजेश पायलट जी🙏
सचिन पायलट जी पर सियासी भविष्यवाणी"
सचिन पायलट साहब का चेहरा बड़ा प्यारा और मासूम राजनीतिज्ञ है!
इतना अच्छा इंसान राजनीति में है"
मैं सचिन पायलट का नई कांग्रेस मे एक उदय देख रहा हूं!
यह राष्ट्रीय लेवल पर एक दिन बहुत बड़े नेता बनेंगे और CM भी बनेंगे"
~योगेश्वरानंद गिरी महाराज
बताओ कैसे कैसे लोगों से पाला पड़ जाता है, एक तो इतनी गर्मी, मास्टर इनके दरवाजे पर जाकर जनगणना करते हैं यह खुद को कूल समझ रहा है, अभी डाटा गलत भरकर चला जाएगा फिर बोलेगा सरकार को हमारे बारे में पता ही नहीं है।
ऐसे लोगों के लिए 112 बुलाकर पिछ*वाड़ा लाल करवा देना चाहिए।
सरकार में एंट्री से पहले ही भ्रष्टाचार....
गत दिनों एक बेरोजगार का दो सरकारी नौकरी में नंबर आया।🥇🥇✌🏻
एक कॉलेज लेक्चरर में (ग्रेड पे-6000/-) और दूसरा नायब तहसीलदार में (ग्रेड पे-4200/-)
मैं सोच रहा था कि निश्चित रूप से वह कॉलेज लेक्चरर ज्वाइन करेगा। नायब तहसीलदार ज्वाइन करने पर तो वह कोई 20 साल बाद में जाकर ग्रेड पे 6600/- तक पहुंच पाएगा।
लेकिन बंदे ने बड़ी मार्केबल बात कही कि गुरु मैं नायब तहसीलदार ज्वाइन करूंगा।
कारण स्पष्ट करते हुए मुझे गुरु ज्ञान दिया कि प्रोबेशन के बाद रजिस्ट्री कमीशन से नोट छापना शुरू करूंगा तो रिटायरमेंट तक जारी रहेगा।
पैसा,गाड़ी,बंगला,माला,गुलदस्ता, ड्राई फ्रूट के पैकेट और फुल ठरका भी।
मुझे बोला, कौन पूछता है कॉलेज लेक्चरर को, कुल मिलाकर होता तो माड़साब ही है।
ऐसा ही एक वाकया गत माह हुआ जब मैने जोधपुर के मेरे एक प्रिंसिपल मित्र को किसी काम से फोन लगाया तो बोला यार जाखड़ साहब मैने प्रिंसिपल की नौकरी छोड़ दी है और आजकल नायब तहसीलदार बन गया हूं....!!😖
प्रिंसिपल (ग्रेड पे-6600/-) से नायब तहसीलदार (ग्रेड पे 4200/-)
मेरा सिर चकराने लग गया कि इधर तो मोदीजी देश के इन्हीं युवाओं के भरोसे 2047 में विकसित भारत का सपना ले रहे हैं और यह बंदा दिन के उजाले में सरकारी एंट्री से पहले ही भ्रष्टाचार के मार्ग से खुद को विकसित करने में लग गया ।।।।
हद कर दी बंदे ने,
यार और बेरोजगार ने...🤥 - गुरु हरवीर सिंह जी जाखड़
लिपिक ग्रेड -II/कनिष्ठ सहायक भर्ती 2018 की जांच हो तो 2-3 हजार फर्जी लिपिक ग्रेड -II/एलडीसी जो आज UDC तक बन चुकें ये सभी पकड़ में आ सकते हैं।
कुछ तो ऐसे भी हैं जो फर्जीवाड़े से नौकरी लगने के बाद बोर्ड में भी नौकरी कर चुकें।
SOG ने ऐसे 800-1000 लोगों पर संदेह किया है परंतु वो फाइल अब दबी हुई है SOG आखिरकार LDC भर्ती 2018 की जांच क्यों नहीं कर रही ??
कभी-कभी ज़िंदगी ऐसी कहानियाँ लिख देती है जिन्हें पढ़कर लगता है फिक्शन तो बहुत नरम है, और दर्द इससे कहीं ज़्यादा कड़ा हे 😢
नेपाल की उभरती हुई सुपरस्टार मॉडलिंग, फिल्मों और Miss World Nepal की रनर-अप रही निशा तेज़ी से आगे बढ़ रही थीं।
न सिर्फ अपनी, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें वो अपने कंधों पर उठाए चल रही थीं। 🌟
साधारण परिवार से आई उस लड़की ने सपना देखा था“मैं आगे बढ़ूंगी, और अपने परिवार को भी आगे लेकर जाऊँगी।”
जी
2018-19 में उनका करियर आसमान छू रहा था। ब्रांड्स, कैंपेन, इवेंट्स हर तरफ सिर्फ एक नाम गूंज रहा था निशा घिमिरे।
वो भारत भी आईं, अपना हुनर निखारने… दुनिया उनके लिए खुलती जा रही थी।
लेकिन फिर… ज़िंदगी ने पल भर में सब छीन लिया। 🚗💥
एक भयानक एक्सीडेंट ने उनकी पूरी दुनिया उलट दी।
करियर खत्म, शरीर घायल, और लंबा, दर्दनाक इलाज जिसका खर्च उनका परिवार झेल नहीं पा रहा था।
और सबसे दर्दनाक बात?
वो इंडस्ट्री, वो लोग, वो दोस्त—जो कभी उनके साथ खड़े दिखते थे—सब ग़ायब हो गए।
किसी ने कॉल तक नहीं किया।
किसी ने लागत नहीं उठाई।
कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने उनकी हालत से “कंटेंट” तो बनाया…
पर मदद? बस नाम की।
स्पॉटलाइट में पोज़ देने वाली लड़की अब अस्पताल के बिस्तर पर अकेली पड़ी थी ज़िंदगी और मौत के बीच झूलती हुई। 💔
और तभी एक इंसान सामने आई—मेघा चौधरी।
वही मेघा, जिसे कभी निशा के मैनेजर ने कहकर टाल दिया था “आप बहुत छोटी हैं, ब्रांड को सूट नहीं करेंगी।”
लेकिन जब सबने मुँह मोड़ लिया,
वही मेघा आगे बढ़ीं।
उन्होंने पूरा इलाज करवाया।
सारी मेडिकल बिल्स उठाईं।
थेरेपी, दवाइयाँ, देखभाल—सबका खर्च वो अकेले उठाती रहीं।
और जब 01.09.2021 को निशा ने अंतिम सांस ली…
मेघा ने उनके अंतिम संस्कार से लेकर हर जिम्मेदारी निभाई।
यहाँ तक कि निशा के भाई-बहनों की पढ़ाई भी अपने ज़िम्मे ले ली—
ताकि जिस परिवार को उठाने का सपना निशा ने देखा था, वो सपना फिर भी पूरा हो सके। 🙏❤️
👉 निशा की कहानी हमें याद दिलाती है:
तालियाँ सिर्फ चमक में बजती हैं…
लेकिन असली इंसानियत उस खामोशी में नज़र आती है
जब सब चले जाते हैं, और सिर्फ एक दिल साथ खड़ा रहता है। 🌹✨
उनका उदय प्रेरणा है।
उनका संघर्ष दर्द है।
लेकिन उनके नाम पर हुई इंसानियत
वही सबसे बड़ा सबक है।
एक आदरणीय मास्टर जी सेवानिवृत्त हुए। वह और उनकी पत्नी इंदौर के एक फ्लैट में रहते थे। उन्होंने दशहरा में अपने गाँव जाने की योजना बनाई।
गाँव जाने से पहले मास्टर जी ने सोचा कि अगर उनकी गैरमौजूदगी में कोई चोर घुस गया तो वो घर की सारी अलमारी और पेटी तोड़ कर क्षतिग्रस्त कर देंगे क्योंकि उसे कुछ नकद तो मिलेगा नहीं।
इसलिए उन्होने 1000 रुपये और एक चिट्ठी टेबल पर रख दिए। चिट्ठी में उन्होंने लिखा था:👇
हे अजनबी, मेरे घर में प्रवेश करने के लिए आपने कड़ी मेहनत की इसके लिए आपको हार्दिक बधाई।😄
लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की हमारे पास कोई ज्यादा कुछ नहीं है - टीचर जो ठहरे।
मुझे सच में बहुत शर्म आ रही है कि आपकी मेहनत और आपका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।😊
इसलिए मैंने आपकी पैरों की धूल के सम्मान में यह थोड़े से पैसे मेज पर छोड़ दिए हैं। कृपया इसे स्वीकार करें।😃
और मैं आपको आपके बिजनेस को बढ़ाने के कुछ तरीके बता रहा हूं। आप कोशिश कर सकते हैं, आपको सफलता जरूर मिलेगी।
मेरे फ्लैट के सामने आठवीं मंजिल पर एक बहुत प्रभावशाली भ्रष्ट मंत्री रहता है।
नामी बेईमान प्रॉपर्टी डीलर सातवें मंजिल पर रहता है।
सहकारी बैंक के अध्यक्ष हैं जो छठे तल पर रहते हैं।
पांचवी मंजिल पर प्रमुख उद्योगपति।
चौथी मंजिल पर नामी वकील हैं।
व तीसरी मंजिल पर एक भ्रष्ट राजनीतिक नेता हैं।
उनका घर गहनों और नकदी से भरा है।
मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं की आपकी व्यावसायिक सफलता उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएगी और उनमें से कोई भी पुलिस को रिपोर्ट नहीं करेगा।
दशहरा के बाद जब मास्टर जी और उनकी पत्नी वापस अपनी फ्लैट में लौटे तो उन्हें टेबल पर एक बैग रखा मिला। बैग में 10 लाख रुपए नकद और एक पत्र रखा देखकर मास्टर जी और उनकी पत्नी हैरान रह गये।
पत्र में लिखा था:
गुरुजी आपके निर्देश और शिक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सर।👏
मुझे इस बात का अफ़सोस है की मैं पहले क्यों आपके करीब नहीं आ पाया।
आपके निर्देशानुसार मैंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। मैंने इस छोटी सी राशि को धन्यवाद के रूप में छोड़ दिया है।
भविष्य में भी मैं आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन की कामना करता हूँ...।😂
भवदीय,
आपका आज्ञाकारी चोर शिष्य...🫣🙏
🚨 कृपया अपने राय जरुर दें आपने कौन सी गलती की है ?
डिप्रेशन में लोग अक्सर ऐसे फँसते हैं ये 15 गलतियाँ होती हैं, और इनसे बचने का तरीका
1.सोचते हैं मैं अकेला हूँ → बचाव*: रोज़ एक इंसान से बात करें, मैसेज ही सही।
2.नींद पूरी नहीं लेते→ बचाव*: रात 10 बजे फ़ोन बंद, 7 घंटे सोएँ।
3.खाना छोड़ देते हैं→ बचाव*: दिन में 3 बार कुछ न कुछ खाएँ, फल भी चलेगा।
4.खुद को दोष देते हैं→ *बचाव*: डायरी में लिखें—"ये बीमारी है, मेरी गलती नहीं।"
5.सोशल मीडिया पर घंटों बिताते हैं→ *बचाव*: दिन में 30 मिनट से ज़्यादा न देखें।
6.घर से बाहर नहीं निकलते→ *बचाव*: रोज़ 10 मिनट टहलें, बालकनी में भी।
7.नकारात्मक ख़बरें पढ़ते रहते हैं→ *बचाव*: न्यूज़ ऐप बंद करें, किताब पढ़ें।
8.पुरानी गलतियाँ याद करते हैं→ *बचाव*: "पास्ट ओवर" लिखकर कागज़ फाड़ें।
9.कोई लक्ष्य नहीं रखते→ *बचाव*: रोज़ 1 छोटा काम—जैसे बिस्तर ठीक करना।
10.डॉक्टर से मदद नहीं लेते→ *बचाव*: पहला कदम—मनोचिकित्सक से अपॉइंटमेंट।
11.सब कुछ परफ़ेक्ट चाहते हैं→ *बचाव*: "70% भी काफ़ी है" का नियम अपनाएँ।
12.अकेले रहना पसंद करते हैं→ *बचाव*: हफ़्ते में 1 बार दोस्त/परिवार से मिलें।
13.शारीरिक मेहनत नहीं करते→ *बचाव*: 5 मिनट स्ट्रेचिंग या झाड़ू लगाना।
14.खुद से झूठ बोलते हैं "मैं ठीक हूँ"→ *बचाव*: सच्चाई स्वीकारें—"मुझे मदद चाहिए।"
15.उम्मीद छोड़ देते हैं→ *बचाव*: हर रात लिखें—"कल 1% बेहतर होऊँगा।"
नोट - डिप्रेशन में पड़ना आसान है, बाहर निकलना मुश्किल—लेकिन असंभव नहीं।
इनका नाम सोनाक्षी यादव हैं, ये राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं!
इन्हें 1000 रुपए रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने गिरफ्तार किया हैं,
ये हजार रुपए पीएम आवास योजना में घर पास करने के लिए एक गरीब आदमी से ले रही थी !
आरोप हैं कि पहले भी 1500 लिए थे और इसके बाद और 1500 देने की बात तय हुई थी !
आखिर ऐसी कौन सी वजह हैं जिससे 50 से 60 हजार कमाने वाला पढ़ा लिखा सरकारी कर्मचारी , एक गरीब जिसके पास रहने को घर तक नहीं हैं, उससे हजार दो हजार रुपए रिश्वत मांगता हैं ?
कितनी शर्मनाक बात हैं ये ?
क्या खुद को सैलेरी से घर नहीं चल पाता हैं?
अनुष्का शर्मा ने अपनी दादी अपने चाचा चाची तक को शादी में नही बुलाया इन्हें पता ही टीवी से लगा की हमारी पोती हमारी भतीजी की शादी हो रही है शायद शर्म लगती इस को अपने आम परिवार वालो से शायद तभी सिर्फ 20 मेहमान बुलाये होंगे।
सुरेश रैना ने 2015 में शादी की जिस मामा की गोद में खेला उस मामा को शादी में नही बुलाया मामा से मीडिया वालों ने बात की मामा आंसुओ के साथ भावनाये व्यक्त करते नजर आये। कारण था सुरेश रैना को मामा से शर्म आती थी आखिर बड़ा आदमी जो ठहरा।
जसप्रीत बुमराह का 84 साल का दादा जो 17 साल से अपने पोते को देखने को तरस रहा था जसप्रीत से मिलने अहमदाबाद आया जहाँ जसप्रीत की माँ ने दादा को भगा दिया इसके बाद दादा ने साबरमती नदी में आत्महत्या करली।
महेंद्र सिंह धोनी इन्होंने अपनी आत्मकथा पर बनी फिल्म में अपने भाई को ही नहीं दिखाया ।
इस तरह के लोग आज युवा पीढ़ी के आदर्श है इन लोगो को आज युवा पीढ़ी फॉलो करती है इनकी फैन है।
और एक भुवनेश्वर कुमार था जिसने अपनी शादी में पूरा गांव बुलाया और शादी की खुशी में अपने जिले में चल रहे कन्या गुरुकुल में लाखों रुपए का दान दिया था ! ये होते है संस्कार।
इससे सीखो कुछ उन ओछे सेलिब्रिटीज से नही जो अपने दादा-दादी, मामी-मामी, चाचा-चाची गांव वालों तक को अपना परिवार नही समझते।
एक वरिष्ठ वकील 46 दोषियों को मौत की सजा (फांसी) से बचाने के लिए बहस कर रहा था...
तभी उसका सहायक अंदर आया और उसे एक छोटा सा कागज दिया,
वकील ने इसे पढ़ा और अपनी जेब के अंदर रखा और अपनी बहस जारी रखी...,,
लंच ब्रेक के दौरान,
न्यायाधीश ने उससे पूछा "आपको पर्ची पर क्या जानकारी मिली थी"
वकील ने कहा "मेरी पत्नी मर गई"
जज चौंक गया और बोला “फिर तुम यहाँ क्या कर रहे हो...., अपने घर क्यों नहीं गए"
वकील ने कहा….,
"मैं अपनी पत्नी के जीवन को वापस नहीं ला सकता, लेकिन इन 46 स्वतंत्रता सेनानियों को जीवनदान देने और उन्हें मरने से रोकने में मदद कर सकता हुँ"।
न्यायाधीश, जो एक अंग्रेज था, उसने सभी 46 पुरुषों को रिहा करने का आदेश दिया।
वकील कोई और नहीं बल्कि महान सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
3300 करोड़ क्या यदि 33000 करोड़ की
प्रतिमा भी उनकी लगे तो वह कम ही होगी...🌷🙏