@JaikyYadav16 बता दूं, अगर बुरा न मानो तो
क्योंकि इन पार्टियों को पता है घोषणा पत्र सिर्फ जारी करना है, उसपे अमल करने की नौबत नहीं आएगी
जबकि 300+ वाली पार्टी को सोच विचार के घोषणा पत्र देना है क्योंकि उन्हें पता है इसे लागू करना पड़ेगा।
@Shubhrastha कुछ बातें परदे के अंद��� की जाती हैं। यही दोष है बिधूरी जी का। संसदीय मर्यादा होती है, देश देख रहा होता है इसलिए संयम रखन�� चाहिए था..
बाकी सब ठीक है।
@RubikaLiyaquat मेरे पिता भी बोलते थे "कान तोप" (cover the ear)
सबके मां बाप एक जैसे ही होते हैं। वो बस मां बाप होते हैं। कुछ अमानवतावादी लोगों की तरह नहीं जो हर बात में हिंदू मुस्लिम देखने की कोशिश करते हैं। 🙄
@AamAadmiParty@KapilMishra_IND@BJP4India आप वालों से मेरे दो सवाल
१) क्या आप मानते हैं सारे MLA/MP बिकाऊ हैं?
२) उनके अंदर देश हित में निर्णय लेने की क्षमता नहीं है? हर निर्णय बिकाऊ है?
@Pashupatikumar2@Woodland@Sustainability PK, nothing is more attractive than loyalty. This speaks in volume about your character how down to earth you are. "Waste isn't waste until we waste it"
@TajinderBagga@ZeeNews@BJP4Delhi बग्गा जी, पब्लिक लाइफ के लोगो को ऐसी भाषा शोभा नही देती।
लेकिन, ज्यादा चिंता का विषय है इस ट्वीट को लाखों, हज़ारों के द्वारा पसंद किया जाना और रिट्वीट किया जाना। इसस��� पता चलता है, केजरीवाल जी के बारे में जनता क्या सोचती है।
@anamikamber स्वागत।
किंतु, मदरसा अगर हिन्दोस्तां में है तो राष्ट्रगान अब तक क्यूं नही होता था, यह विषय है। देश ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति जैसे पदों पर मदरसों की विचारधारा रखने वाले व्यक्ति को कैसे देख सकता है, यह विषय है।
@DrKumarVishwas कुमार जी, नाम लीजिये। कुछ नही होता। देश को इशारों से समझ नही आता अब। धर्म , देशहित और मानवता की लड़ाई में यह एक निर्णायक दौर है, अब खुल कर आगे आने का समय है। आर पार का समय आ चुका है। देश और इतिहास आपस��� अपेक्षा रखता है।
@ppbajpai@BJP4India@narendramodi पूण्य जी, PM लोकप्रिय होना चाहिए, उनक��� मंत्रिमंडल PM का विशेषाधिकार होता है। विरोध में अक्सर इंसान विवेक खो बैठता है। आप हाल तक प्रबुद्ध माने जाते रहे हैं। विवेक का साथ न छोड़िये। दीदी की हार पर भी आपकी टिप्पणी अपेक्षित है।
@msisodia@sudhirchaudhary@PMOIndia भाई सिसोदिया, जब तुलना ही कर रहे हो तो जनसंख्या की भी कर लो, तुष्टिकरण की भी कर लो!
विश्व के 10 विकसित देश मिलकर जितना कर रहे हैं उतना ही प्रेशर हमारे देश के कम विकसित स्वास्थ प्रणाली पर है। इंतज़ार करो तबतक अपनी राजनीति ज़िंदा रखो।