माननीय @PMOIndia,
#गौ_सम्मान_आह्वान के अंतर्गत प्राप्त 15 करोड़ हस्ताक्षर करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक हैं। कृपया जनभावना का सम्मान करते हुए गौ माता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान हेतु सकारात्मक पहल करें। धन्यवाद।
#GauSamman#GauMata
@PMOIndia माननीय @PMOIndia,
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@WithCMGehlot @ashokgehlot51 ●भर्ती का नाम- #सूचना_सहायक_2013 ●नोटिफिकेशन वर्ष - 2013 ●कार्यकाल - सीएम
@ashokgehlot51
●कुल पद - 6300 लगभग ●अब तक ज्वाइनिंग- 4452 ●शेष ज्वाइनिंग - 1848 * सूचना सहायक भर्ती 2013 को आखिर 10 साल बाद भी गहलोत सरकार पूरी क्यों नहीं करा पाई?
@RahulGandhi@kharge
क्या है बर्बरीक कुंड की महिमा...??
भारत में एक ऐसा मंदिर है, जिसके रहस्य के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया है, ये मंदिर देश से लेकर विदेश तक अपने कुंड के लिए मशहूर है।भारत में एक ऐसा मंदिर है, जिसके रहस्य (Secret) के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया है, ये मंदिर देश से लेकर विदेश तक अपने कुंड के लिए मशहूर है, दरअसल इस मंदिर में एक ऐसा कुंड है जो हमेशा ही पानी से भरा रहता है, और इस कुण्ड में नहाने के लिए साल भर लोगों का तांता लगा रहता है,बर्बरीक कुंड यानि श्याम कुंड के बारे में, जो भारत के राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर(Jaipur) में स्थित एक मशहूर मंदिर खाटू श्याम बाबा के मंदिर का हिस्सा है, खाटू वाले बाबा के मंदिर में स्थित ये कुंड अपने अंदर बहुत से रहस्यों को दबाए हुए है। बाबा श्याम के इस विख्यात मंदिर की कई मान्यताएं और कहानियां (Stories) है, बाबा के मंदिर में मौजूद ये कुंड अपनी उत्पत्ति को लेकर भी कई रहस्य छिपाए हुए है, कहा जाता है कि आज से हजारों साल पहले जब यहां केवल मिट्टी ही थी, तब यहां रोज गाय आया करती थी, और जानवर आया करते थे और इस स्थान पर पहुंचने के बाद गाय का अपने आप दूध देने लगती थी, रोज हो रहे इस घटनाक्रम को देखने के बाद आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों ने वहां खुदाई का काम शुरू कर दिया, और जब उन्होंने गड्ढा खोदना शुरू किया तो उनका सामना एक गजब रहस्य से हुआ, दरअसल, खुदाई करते हुए जब वो लगभग 30 फीट(Feet) तक नीचे पहुंचे तो उन्हें एक बक्सा मिला जिस पर लिखा था, बर्बरीक कथाओं की माने तो इस बक्से के अंदर महाभारत काल के बर्बरीक का असली सिर मौजूद था, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने इस बक्से को लेजाकर उस समय के राजा रतन सिंह को दिया, चौकाने वाली बात तो ये रही कि जिस स्थान से वो शीश प्रकट हुआ ठीक उसी स्थान से पानी का तेज प्रभाव शुरू हो गया जिसे आगे जाकर श्याम कुंड कहा गया, हर साल लगने वाले मेले में आने वाले भक्त पहले इसकुंड में आकर नहाते हैं, और फिर जाकर बाबा के दर्शन कर सके।
कौन थे बर्बरीक..?
बर्बरीक महाभारत के एक महान योद्धा थे, उनके पिता घटोत्कच और माता अहिलावती थे, बचपन से ही बर्बरीक को उनकी माँ ने सिखाया था, कि युद्ध हमेशा ही हारने वाले की तरफ से करना चाहिए, और बर्बरीक भी हमेशा इसी सिद्धांत को याद में रखकर युद्ध भूमि में जाया करते थे, कहा जाता है कि बर्बरीक ने भगवान शिव और माता आदिशक्ति की घोर तपस्या की थी, जिसके बाद खुश होकर भगवान ने उन्हें कुछ सिद्धियां दी थी, जिन्हें पाने के बाद बर्बरीक और भी ज्यादा बलवान हो गए थे, जानकारी के मुताबिक इन शक्तियों का प्रभाव इतना ज्यादा था कि वो महाभारत जैसे विशाल युद्ध को भी पलक झपकते ही बंद करवा सकते थे, और युद्ध में भाग ले रहे सभी वीरों को मौT के घाT उतार सकते थे, लेकिन उनके अपनी माता को दिए हुए वचन के कारण भगवान श्रीकृष्ण की चिंता काफी ज्यादा बढ़ी हुई थी, जिसके चलते बर्बरीक के युद्ध में शामिल होने से पहले ही भगवान ने साधु का रूप धारण करके उनसे उनका सिर मांग लिया, जिसके बाद उनकी सारी शक्तियों को उन्होंने मां रणचंडी को बलि चढ़ा दिया, वहीं इतना बड़ा बलिदान देने के बाद उन्हें शीश का दानी कहा गया, वहीं अपना ये बलिदान देने के बाद उन्होंने महाभारत युद्ध की समाप्ति तक इस युद्ध को देखने की कामना करी बलिदान से खुश होकर श्रीकृष्ण ने वरदान देकर उनके सिर को एक पहाड़ पर रख दिया, जिसके बाद बर्बरीक ने पूरा युद्ध देखा। आखिर क्या है श्याम कुंड की मान्यताएं श्याम कुंड को लेकर कई तरह की मान्यताएं जताई जाती है, कहा जाता है कि श्याम कुंड में नहाने से कई पाप दूर हो जाते हैं, और अगर कोई बाबा के दरबार पर पहुंचकर अच्छे और निश्चल मन से कुंड में स्नान करता है तो उसे एक नया शरीर मिल जाता है,इसके अलावा अगर कोई हारा हुआ हो उसका कोई काम न बन रहा हो और वो जाकर बाबा के कुंड में स्नान करे तो बाबा हारे का सहारा बनकर उसका साथ देते हैं, इसके अलावा इस कुंड में नहाने से शरीर और मन दोनों की ही अशुद्धियों का नाश हो जाता है, और अगर किसी स्त्री को पुत्र रत्न की प्राप्ति न हुई हो और वो जाकर बाबा के कुंड में नहा ले तो उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है...
जय श्रीकृष्णा, जय गोविंदा ✨🙏🕉️💖
बचपन से ही हमें स्कूलों में पढ़ाया गया है कि प्रकाश की गति खोज...... डेनमार्क के खगोलविद ओले क्रिस्टेंसेन रोमर ने की थी.
साथ ही कहा जाता है कि... रोमर से पहले गैलीलियो और न्यूटन जैसे महान वैज्ञानिकों ने काफी प्रयास के बाद भी प्रकाश के वेग को नहीं जान पाए थे.
हालांकि, गैलीलियो इतना तो समझ गए थे कि ब्रह्मांड में प्रकाश की गति सबसे तेज है लेकिन वे ये कभी नहीं जान पाए कि वास्तव में प्रकाश की गति है कितनी ???
अंततः.... रोमर ने पहली बार 1676 में प्रकाश का वेग निर्धारित किया था.
जबकि, वास्तविकता काफी चौंकाने वाली है.
क्योंकि, आधुनिक समय में महर्षि सायण, जो वेदों के महान भाष्यकार थे , ने 14वीं सदी में प्रकाश की गति की गणना कर डाली थी...
जिसका आधार ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 50 वें सूक्त का चौथा श्लोक था.
असल में ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 50 वें सूक्त का चौथा श्लोक कहता है....
तरणिर्विश्वदर्शतो ज्योतिष्कृदसि सूर्य ।
विश्वमा भासि रोचनम् ॥
-ऋग्वेद 1. 50 .4
अर्थात... हे सूर्य...
तुम तीव्रगामी एवं सर्वसुन्दर तथा प्रकाश के दाता और जगत् को प्रकाशित करने वाले हो.
उपरोक्त श्लोक पर टिप्पणी करते हुए महर्षि सायण ने निम्न श्लोक प्रस्तुत किया था...
तथा च स्मर्यते योजनानां सहस्त्रं द्वे द्वे शते द्वे च योजने एकेन निमिषार्धेन क्रममाण नमोऽस्तुते॥
-सायण ऋग्वेद भाष्य 1. 50 .4
अर्थात, आधे निमेष में 2202 योजन का मार्गक्रमण करने वाले प्रकाश तुम्हें नमस्कार है.
इस उपरोक्त श्लोक से हमें प्रकाश के आधे निमिष में 2202 योजन चलने का पता चलता है.
अब हम समय की ईकाई निमिष तथा दूरी की ईकाई योजन को आधुनिक वर्तमान इकाईयों में परिवर्तित कर सकते है.
किन्तु, उससे पूर्व हम प्राचीन समय तथा दूरी की इन इकाईयों के मान को जान लेते हैं.
इस बारे में हमारी मनुस्मृति कहती है...
निमेषे दश चाष्टौ च काष्ठा त्रिंशत्तु ताः कलाः |
त्रिंशत्कला मुहूर्तः स्यात् अहोरात्रं तु तावतः || ........मनुस्मृति 1-64
इस तरह मनुस्मृति 1-64 के अनुसार
पलक झपकने के समय को 1 निमिष कहा जाता है !
18 निमीष = 1 काष्ठ;
30 काष्ठ = 1 कला;
30 कला = 1 मुहूर्त;
30 मुहूर्त = 1 दिन व् रात (लगभग 24 घंटे )
अतः एक दिन (24 घंटे) में निमिष हुए :
24 घंटे = 30x30x30x18= 4,86,000 निमिष
जबकि, आधुनिक गिनती की इकाई के हिसाब से 24 घंटे में सेकेंड हुए ...
24x60x60 = 86,400 सेकंड
इस तरह....
86,400 सेकंड =4,86,000 निमिष
अतः 1 सेकंड में निमिष हुए :
1 निमिष = 86400 /486000 = 0.17778 सेकंड
अंततः.... 1/2 निमिष = 0.17778/2 = 0.08889 सेकंड
इसी तरह अगर हम योजन की बात करें तो....
श्री मद्भागवतम 3.30.24, 5.1.33, 5.20.43 आदि के अनुसार
1 योजन = 8 मील लगभग
तो, 2202 योजन = 8 x 2202 = 17,616 मील
अब हम अपने ऋग्वेद में उल्लेखित प्रकाश की गति को यदि आधुनिक गणना पद्धति में बिठाते हैं तो... हम पाते हैं कि....
सूर्य प्रकाश 1/2 (आधे) निमिष में 2202 योजन चलता है.... अर्थात,
0.08889 सेकंड में 17, 616 मील चलता है.
अर्थात, 0.08889 सेकंड में प्रकाश की गति = 17,616 मील
तो, 1 सेकेंड में = 17,616 / 0.08889 = 1,98,177 मील (3,18,934.966 किलोमीटर) लगभग
तथा, हैरानी की बात है कि आज की आधुनिकतम विज्ञान भी प्रकाश गति को.... 1,86,000 मील (3,18,934.966 किलोमीटर) प्रति सेकंड ही बताती है.
कहने का मतलब है कि.... खगोल विज्ञान के जिस ज्ञान को आधुनिकतम विज्ञान ने 1676 में खोजा और बताया ...
वो ज्ञान तो हमारे ऋग्वेद में हजारों लाखों साल पहले से ही उल्लेखित है.
इसका मतलब हुआ कि.... जिस समय ये पश्चिमी सभ्यता के लोग जंगलों में नंग धड़ंग रहते थे....
और, चूहे बिल्ली आदि मार कर खाया करते थे....
उस समय हमारे विद्वान ऋषि-मुनि खगोलशास्त्र और विज्ञान में अंतरिक्ष की गहराइयाँ एवं प्रकाश की गति नाप रहे थे...!
क्योंकि, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ऋग्वेद को निर्विवाद रूप से मानव सभ्यता का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है.
तो, हमारी ऐसी अनमोल उपलब्धियों के कारण हमें अपने धर्मग्रंथों तथा अपने सनातन धर्म पर आखिर क्यों गर्व नहीं होना चाहिए ????
जय श्री राम, जय श्री हनुमान, हरि गोविंदा, जय सनातन संस्कृति 🙏
●भर्ती का नाम- #सूचना_सहायक_2013
●नोटिफिकेशन वर्ष - 2013
●कार्यकाल - सीएम @ashokgehlot51
●कुल पद - 6300 लगभग
●अब तक ज्वाइनिंग- 4452
●शेष ज्वाइनिंग - 1848
* सूचना सहायक भर्ती 2013 को आखिर 11 साल बाद भी गहलोत सरकार पूरी क्यों नहीं करा पाई? @RahulGandhi@kharge आखिर कब तक?
टोंक मे गौ तस्करी और पशु क्रूरता जैसे अपराध कर रहे लोगो के पक्ष मे झूठे वीडियो जारी कर कुछ धूर्त लोगो द्वारा पुलिस पर दबाव बना कर दिन रात गौसेवा करने वाले गौसेवको के खिलाफ मोब लिंचिंग जैसे झूठे मुकदमे दर्ज किये जा रहे है कृपया निष्पक्ष जांच करने की कृपा करे 🙏
@TonkPolice_
@ashokgehlot51 ऐसे हजारों बार ज्ञापन दिया है सूचना सहायक भर्ती 2013 ने पर कोई सुनवाई नही की आपने। ऐसा समर्पण नहीं चाहिए जिसमे दो परीक्षा पास अभ्यर्थी पिछले 10 वर्षो से अपनी नियुक्ति के लिए भटक रहे है 🙏
@_lokeshsharma बार बार पहला राज्य है
पहला राज्य सही कहा पहला ही जो 9 साल से सूचना सहायक 2013 के अभ्यर्थियों को इंतजार करा रहा जो नौकरी की सभी शर्त पूरी करने के बाद भी नियुक्ति नहीं दे रहा हैं। @ashokgehlot51@Hemaram_INC@MadanPrajapat_