नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए
इस फ़स्ल में जो भेजिए बस आम भेजिए
ऐसा ज़रूर हो कि उन्हें रख के खा सकूँ
पुख़्ता अगरचे बीस तो दस ख़ाम भेजिए
मालूम ही है आप को बंदे का ऐडरेस
सीधे इलाहाबाद मिरे नाम भेजिए
ऐसा न हो कि आप ये लिक्खें जवाब में
तामील होगी पहले मगर दाम भेजिए
- अकबर इलाहाबादी
आओ उनके हुकुम की उदूली करें
पर सब पूछते हैं कि वो कौन है
और कहाँ रहता है
मैं बताऊँ कि वो जल्लाद है
वो वही है जो कहता है
हक़ छोड़ दो
तुम यहाँ से वहाँ तक कहीं देख लो
गाँव को देख लो और शहर देख लो
अपना घर देख लो
अपने को देख लो
कि इस हक़ की लड़ाई में तुम किस तरफ़ हो
आपसे कह रहा हूँ अब अपनी तरह
कि मैं सताए हुओं की तरफ़ हूँ
और जो भी सताए हुओं की तरफ़ है
उसको समझता हूँ कि अपनी तरफ़ है
-रमाशंकर यादव विद्रोही
मी लॉर्ड, आइए; आपको हम कॉकरोच अपने बारे में कुछ बताएँ!
मी लॉर्ड, हम कॉकरोच अद्भुत जीवट वाले होते हैं। हमारी कई प्रजातियाँ बिना भोजन के महीने भर आराम से सक्रिय रह सकती हैं; यानी हम भूख से जल्दी हारने वाला जीव नहीं है। हम बर्दाश्त करने में हिन्दुस्तानी नागरिक जैसे ही हैं।
मी लॉर्ड, हम कॉकरोच काफी देर तक बिना हवा के रह सकते हैं;
मी लॉर्ड, हम अँधेरी, गर्म और नमीदार जगहों में छिपते हैं; रोशनी पड़ते ही भागना पड़ता है। इसलिए हम अँधेरे में पलने वाली व्यवस्था के प्रतीक हैं, न कि ख़ुद किसी को नुकसान पहुंचाते हैं।
मी लॉर्ड, हम कॉकरोच धरती पर करोड़ों वर्षों से मौजूद हैं। हम 320 मिलियन वर्ष से अधिक पुराने हैं।
मी लॉर्ड, हम आरएसएस के प्रिय हो सकते हैं, क्योंकि हम एक साथ चालीस बच्चे जनते हैं। मतलब अंडों से इतने तो हो ही जाते हैं, जो कॉकरोच राष्ट्र बनाने के काम आते हैं।
मी लॉर्ड, हम वो योद्धा हैं, जो सिर कटने के बाद भी काफी समय तक जीवित रह कर लड़ने का माद्दा रखते हैं।
मी लॉर्ड, हम कॉकरोच मनुष्यों की तुलना में अधिक विकिरण सह सकते हैं। परमाणु बम गिरेंगे तो हम बचेंगे, आप तड़प-तड़प मरेंगे।
मी लॉर्ड, हम कॉकरोच फेफड़ों से नहीं, शरीर के किनारों पर मौजूद spiracles और अंदर की tracheal tubes से सांस लेते हैं। हमारे शरीर में सामान्यतः 10 जोड़ी spiracles रहते हैं। आप भी कॉकरोच हो जाइए, दिल्ली में रहोगे तो मरोगे नहीं।
मी लॉर्ड, हम कॉकरोचों की सबसे बड़ी खूबी यह नहीं कि हम गंदगी पैदा करते हैं; हमारी खूबी यह है कि हम अँधेरे, दरारों और बंद कमरों में छिपी गंदगी का पता बता देते हैं। इसलिए लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले को कॉकरोच कहना दरअसल अपने ही अँधेरे का वैज्ञानिक स्वीकार है। और आपको लगता है कि हम सबसे ख़तरनाक़ हैं क्योंकि हम अंधेरे का पता बता देंगे!
CNG के दाम 1₹ और बढ़े
दो दिन पहले 2₹ बढ़े थे। CNG को inferiority complex फ़ील हो रहा था कि जब पेट्रोल डीज़ल के दाम 3₹ बढ़े हैं तो उसके 2₹ ही क्यों बढ़े। जबकि वह भी पेट्रोल डीज़ल की तरह ही बड़ी बड़ी गाड़ियाँ खींचती हैं। और पर्यावरण भी बचाती हैं। फिर उसके साथ भेदभाव क्यों? लिहाज़ा आज की 1₹ की बढ़ोतरी के साथ ही वो भी 3₹ की बढ़ोतरी के at par पहुँच गई है।
मुबारक हो CNG 🥳
PM केयर्स फंड में अकूत धन जमा हुआ है. आखिर वो कब काम आएगा?
इस संकट के वक्त जनता पर बोझ लादने की जगह, उस पैसे का इस्तेमाल करना चाहिए.
आखिर उसे रखकर क्या फायदा? जनता का पैसा है, जनता को राहत दी जाए.
मुझे लगता है लिखना एक हल है।
समाधान है समस्याओं का
व्यवस्थाओं को बनाए रखने का
मुझे लगता है लिखना एक हल है
कभी-कभी यह पेड़ों को कटने से
क्या पता है आपको बचाता भी तो है
और कभी-कभी कागज कम होने के कारण लकड़ी को कटवाता भी है..!
समझे नहीं समझे तो कोई बात नहीं?
आमोद मिश्रा शुभम्
सोचता हूँ कि इस तमाशे से किनारा कर लूँ
खुद को महफ़िल से कहीं दूर उतारा कर लूँ
पाँव की बेड़ियाँ बनती हैं ये घर की दीवारें
कैसे रिश्तों से मैं अब ख़ुद को गवारा कर लूँ
डर है दुनिया मुझे 'बागी' या 'छली' न कह दे
वरना हसरत है कि एकांत को सहारा कर लूँ
छोड़ कर सब मैं भी 'सिद्धार्थ' की राह पे चल दूँ
अपनी रुह को ही मैं बस राज-दुलारा कर लूँ
रिश्तों में 'अमीर' खुद को यूँ गिरफ्तार कर लूँ
कि मन ही मन में बुद्ध को स्वीकार कर लूँ।
— अ'मीर🌷
#बुद्धपूर्णिमा....!🤍
प्रसिद्ध लेखक कमलेश्वर ने एक बात बातों बातों में मुझे कहा कि वे पढ़ते हुए कुछ नोट नहीं करते क्योंकि इससे पढ़ने का क्रम टूट जाता है। उन्होंने कहा कि कुछ भी पढ़ते हुए जो सारगर्भित होता है उनको याद रह जाता है। मैंने भी पढ़ने के दौरान कुछ भी नोट करना छोड़ दिया तो पाया कि मुझे कविताएँ और शेर तो याद रह जाते थे लेकिन गद्यांश याद नहीं रहते थे। जबकि मैं ऐसे अनेक लोगों से मिला जो उपन्यास-कहानियों के लंबे लम्बे अंश अपनी स्मृति से सुना देते हैं। प्रियदर्शन जी इसके एक जीवंत उदाहरण हैं। जबकि मुझे तो अपना लिखा भी याद नहीं रहता। कई बार अपना लिखा पढ़ते हुए भी लगता है जैसे किसी और का लिखा पढ़ रहा हूँ!
सो दुनिया में जीना बसना दिल को मरने मत देना,
यार किराए-दार को घर पर क़ब्ज़ा करने मत देना !!
जॉब ज़रूरी होती है साहब मजबूरी होती है,
जॉब के घनचक्कर में पड़ कर ख़्वाब बिखरने मत देना !!
ऐसी लहरें ऐसी बहरें कब क़िस्मत से मिलती हैं,
अच्छे माँझी अब नय्या को पार उतरने मत देना !!
~ इदरीस बाबर
आएगा गुफ्तगू का सलीका तो कम से कम ,
शायर बहुत जरूरी है एक खानदान में ..
रहता है सिर्फ एक ही कमरे में आदमी ,
उसका गुरूर रहता है बाकी मकान में ..!!
~महशर अफरीदी 🌻
अगर तुम अपनी पसंदीदा पार्टी की
गलतियों पर चुप हो,
तो तुम देश प्रेमी नहीं,
सिर्फ एक 'पार्टी प्रेमी' हो
पार्टियां आएंगी जाएंगी
लेकिन देश रहना चाहिए
-अटल बिहारी बाजपेई जी
#political
@
जिसने मेरी ही तरफ़ तीर चलाया.. मैं था
और जो इस तीर से बच कर निकल आया..मैं था !!
इन चिराग़ों के अब इतने भी क़सीदे न पढ़ो
यार, तुमने जिसे रातों को जलाया .. मैं था !!
ख़ाक पर ढेर है क़ातिल ये करिश्मा क्या है
कि निशाने पे तो मुद्दत से ख़ुदाया .. मैं था !!
~ इरफ़ान सिद्दीक़ी
हम तो वो तारीख़ हैं ज़हनों में रहना है जिसे
कागज़ी पुर्जे नहीं जो फाड़ डाले जाएंगे
जिस ज़मी पे मैं खड़ा हूँ ये मेरी पहचान है
आप आंधी हैं तो क्या मुझको उड़ा ले जाएंगे
- वसीम बरेलवी