@VigilanceBihar BEO Hrishikesh Singh of Buxar Cause Division is very corrupt, he has a setting with all the HMs, he harasses the teachers with HM and does not do any work without taking money. Lots of charges against him but always no action taken by the education department.
ये घटना त्रिवेन्द्रम स्थित Kalyan Jewellers की है! एक पिता नें 29/11/2013 को अपनी बेटी की शादी के लिए एक नेकलेस खरीदा जिसका कुल वजन 49.580 ग्राम था तथा डिजाइनर स्टोन का वजन घटाने के बाद लगभग 43.500 ग्राम !
कुछ दिनों पहले 17/03/2018 को वो इस नेकलेस को बैंक के पास गिरवी रखने के लिए गये तो उन्हें झटका लगा जब बैंक के मुल्यांकनकर्ता (bank appraiser) नें जाँच के बाद बताया कि नेकलेस में सिर्फ 12 ग्राम के लगभग सोना है क्योंकि मोतियों के अंदर बाकी वैक्स भरा गया है !
जब वो इस बात को लेकर वापिस कल्याण ज्वेलर्स के पास गये तो वहां के ब्रांच मेनेजर नें बोला कि ये सही है कि ये वैक्स भरा जाता है और ये बात सभी को पता होती है !
जरा सोचिये...
अगर पता हो तो कौन मुर्ख मोम को सोने के भाव खरीदेगा.....???
पिता द्वारा विरोध जताने पर मेनेजर बोला कि चलिए हम ये नेकलेस वापिस ले लेंगे तथा आपको आज के सोने के भाव पर पर आपको पैसे वापिस कर देंगे जितना सोना है !
लेकिन परिवार नहीं माना और बोला कि उन्हें वो वास्तविक रकम चाहिये जो उनसे खरीदते समय ली गई थी और उन्होंने नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कर दी !
21/03/2018 को कल्याण ज्वेलर्स के स्टाफ का एक सदस्य समझौता करने के लिए पुलिस स्टेशन आया और बोला कि हम ग्राहक की मांग अनुसार इन्हें इस नेकलेस की वही कीमत लौटा देंगे जो इनसे ली गई थी!
90 % लोग सोना खरीदने के बाद बेचते नही है वो सोच रहे है हमारे पास इतना सोना पड़ा है पर हकीकत में वो गलत फहमी के शिकार है सोने का पैसा देकर वैक्स खरीद कर रखा हुआ है , गहने जितने भी है सब मे 50% खोट है!
एक बार अपने आभूषणों व सोने की जांच अवष्य दूसरे जगह करवाएं!
साभार फ़ेसबुक
कृपया जनकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाए जिससे कोई भी ऐसी ठगी का शिकार न हो!🙏
*"माफ़ करना बहन, हम हार गए..."*
वह निकली थी घर से, हाथ में कलम और आँखों में सवेरा लिए,
सोचा था नन्हे-मुन्नों को 'क' से 'कबूतर' और 'ख' से 'खरगोश' सिखाएगी,
क्या पता था, सड़क के उस मोड़ पर... मौत उसका इम्तेहान ले जाएगी।
वह स्कूटी, वह बस्ता, वह जिम्मेदारियों का बोझ,
सब वहीं सड़क किनारे बेजान पड़ा रह गया,
अररिया की उस सुबह ने देखा, कैसे इंसानियत का दम घुट गया।
जो आई थी दूर से, यहाँ शिक्षा का दीप जलाने,
उसे हमने क्या दिया? चंद गोलियां और खामोश अफसाने।
उस पिता का सोचो, जिसने नाज़ से बेटी को भेजा था,
आज तिरंगे नहीं, कफ़न में लिपटी उसकी उम्मीदों का जनाज़ा था।
माफ़ करना शिवानी... माफ़ करना बहन!
तुम तो जीत गई अपनी ज़िम्मेदारियों की जंग,
मगर महफ़ूज न रख सके तुम्हें, आज फिर हार गया यह समाज तुम्हारे संग।
एक बार फिर 'बेटी' हार गई...
एक बार फिर हैवानियत जीत गई।
#JusticeForShivani
माननीय मुख्यमंत्री @NitishKumar जी तुरंत संज्ञान लीजिए- अररिया में शिक्षिका शिवानी जी की दिनदहाड़े हुई निर्मम हत्या में संलिप्त अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करें। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। #justiceForShivani@samrat4bjp@bihar_police@BJP4India
टीचर रंजीत ने मेरी बहन को मार डाला
साल 2023 में जब शिवानी इस स्कूल में आई तो यहां पर मौजूद रंजीत नाम के टीचर ने उसे प्रपोज किया, लेकिन शिवानी ने उसे उसी समय मना कर दिया था। शिवानी ने रंजीत से कहा, मैं UPSC क्लियर करना चाहती थी। अभी मुझे पढ़ना है, शादी के लिए बहुत टाइम है। इसके बावजूद रंजीत नहीं समझा। वो स्कूल में हर दिन शिवानी से किसी न किसी बहाने से बात करता था।
ये सिलसिला करीब 1 साल तक चला, इसके बाद रंजीत ने अभी से कुछ महीने पहले दूसरी लड़की से शादी कर ली। 2-3 महीने तक वो ठीक रहा। इसके बाद फिर से वो वही हरकतें करना शुरू कर दिया था। शिवानी को तंग करने के लिए वो कभी बाइक से उसपर धूल उड़ाया करता था, तो कभी कुछ और हरकतें करता था।
- Dainik Bhaskar
रीजैक्शन बरदाश्त नहीं, इसलिए करवा दी हत्या
रंजीत को रीजैक्शन बरदाश्त नहीं हुआ होगा, इसलिए उसने मेरी बहन की हत्या कर दी। रंजीत को अभी लगा होगा कि उसपर शक नहीं जाएगा, क्योंकि वो अब शादीशुदा हो गया है, लेकिन उसने ही मेरी बहन को मार डाला है।
इसमें मेरी बहन के स्कूल के प्रिंसिपल उमेश कुशवाहा का भी हाथ है। जब हमलोगों ने रंजीत के बारे में उन्हें कंपलेन किया तो वो उसे बचाते नजर आए थे। उन्होंने रंजीत के बारे में थाने में शिकायत करवाने से भी रोक दिया था।
प्रिंसिपल भी करवा सकते हैं मेरी बहन का मर्डर
कुछ दिनों पहले मेरी बहन ने प्रिंसिपल से SL(स्पेशल लीव) मांगा था, लेकिन उन्होंने देने से मना कर दिया था। उनका कहना था ये सभी को नहीं मिलता है। इस मामले को लेकर हमलोग DEO के पास शिकायत लेकर पहुंचे थे। इसको लेकर प्रिंसिपल को DEO ने फटकार भी लगाया था। ये मामला मीडिया में भी आया था। इस वजह से हेडमास्टर के इमेज पर धक्का भी लगा था। इसका बदला लेने के लिए वो भी मेरी बहन की हत्या करवा सकते हैं।
BPSC शिक्षिका की हत्या के बाद लोगों ने निकाला कैंडिल मार्च
जिला पार्षद सबा ने बताया, 3 दिसंबर को अररिया में BPSC महिला टीचर की हत्या हो गई। हम सारी महिलाएं-पुरुष इसको लेकर कैंडिल मार्च निकाल रहे हैं। हमारी सरकार से यही मांग है कि हत्यारे को फांसी की सजा दी जाए। क्योंकि अगर इन्हें सजा नहीं मिली तो हम भी कभी अब यहां पर सेफ फील नहीं कर पाएंगे।
बता दें कि बुधवार की सुबह करीब 8:30 बजे शिवानी स्कूटी से स्कूल जा रही थी। इसी दौरान कुछ बदमाशों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
खेत में काम रहे किसान सुधीर यादव ने बताया कि वो स्कूटी से जा रही थीं। तभी बाइक से 2 लड़के आए और पास से गोली मार कर भाग गए। गोली लगते ही वो जमीन पर गिर पड़ी।
इसके बाद मैंने आसपास के लोगों को बुलाया और सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल से अररिया सदर अस्पताल 70 किमी दूर है।
दूसरे राज्य से बिहार के अररिया में शिक्षक की नौकरी करने आयी शिवानी की गोली मारकर हत्या कर देना दुःखद ही नहीं अत्यंत भयावह है । बिहार पुलिस से आग्रह है की शीघ्र ही आरोपियों की गिरफ्तारी किया जाये और कड़ी सजा दिया जाये
@bihar_police@samrat4bjp
@Theonenameddamn No one will respond, and according to the railways, you'll be the one to suffer the loss. Many trains are already running, but the government will only monitor private trains. Any special train is running more than five hours late. The government is not responsible for this.
@firstbiharnews बिहार में बहुत जिले जहां के बहुत BEO करप्ट है और इनमें HM भी मिले हुए है। बक्सर के चौसा प्रखंड का BEO को करप्शन का प्रूफ भी है लेकिन उसको केवल स्पष्टीकरण देकर हमेशा छोड़ दिया जाता है। BEO पर कोई कार्रवाई नहीं किया जाता है।
भाजपा प्रवक्ता 1 घंटे से बैठकर एनडीए सरकार विकास की गाथा सुन रही थीं... लेकिन जैसे ही मैंने बिहार के संदर्भ में objectively विभिन्न विकास सूचकांकों की बात की तो वो डिबेट छोड़कर चुपके से निकल लीं!
@Bihar_se_hai@BaatBiharKii@jansuraajonline@IndexBihar
@TeacherGoal @BiharEducation_@sidarths@Anish97098 @Dinesh_Bharti_ @imravisawarn@btetctet@Bihartet19 ये कहा तक सही है जिनका हो गया ट्रांसफर उनका रद्द कर दिया जाए। वो भी तो तभी से ही परेशान है जब से सभी है। सभी का ट्रांसफर होना चाहिए इसके लिए आवाज उठानी चाहिए ये नहीं कि जिनका हो गया उनका भी रद्द हो।20000 लोग अभी तक सुकून में है। बाकी लोगों का भी होगा इसके लिए प्रयास किया जाए
@TeacherGoal @BiharEducation_@sidarths@Anish97098 @Dinesh_Bharti_ @imravisawarn@btetctet@Bihartet19 बिल्कुल जो इच्छुक है सबका ट्रांसफर होना चाहिए
लेकिन जिनका ट्रांसफर हो गया वो भी ज्वाइन नहीं करना चाह रहे है। सभी को घर में स्कूल खोल दिया जाए? आप को संवेदना नहीं है आपकी भाषा से लग रहा है जो लोग अपना विद्यालय भी ज्वाइन कर लिए है। 20000 लोगों ने विद्यालय ज्वाइन कर लिया है।
ट्रांसफर के बाद योगदान का नियम ::::: 👇
Eshikshakosh से ट्रांसफर आदेश और योगदान प्रपत्र दोनों डाउनलोड करके उसपर खुद का और नए स्कूल HM से हस्ताक्षर कराकर eshikshakosh पर अपलोड करेंगे।
सड़क छाप नेताओं और यूट्यूबरो की दुकानदारी पड़ ACS एस सिद्धार्थ का कड़ा प्रहार। अब ट्रांसफर से असंतुष्ट शिक्षक को ज्वाइनिंग की बाध्यता नहीं । लेकिन अगले 1 साल तक ट्रांसफर नहीं मांगेगे ऐसे लोग । वाह ACS महोदय लव यू शेर है आप ❤️❤️❤️
@sidarths@BiharEducation_
"शिक्षा मंत्री और ACS साफ शब्दों में कह चुके हैं — 'हर किसी को संतुष्ट नहीं किया जा सकता।' यह ट्रांसफर नीति उन हजारों शिक्षकों के लिए बनी थी जो वर्षों से अपने घर-परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर मजबूरी में नौकरी कर रहे हैं। लेकिन अफसोस, MLC ब्रजवासी जी को इन शिक्षकों का दुःख कभी दिखाई नहीं दिया।
एक साल से लगातार ट्विटर कैंपेन चला, अनगिनत बार धरना-प्रदर्शन हुए। शिक्षक सड़क पर थे, लेकिन आप कभी साथ नहीं आए। आपकी चुप्पी ने तब भी हमें तकलीफ दी थी। लेकिन जैसे ही आपके करीबी 1-2 शिक्षकों को अपने ही पंचायत का स्कूल नहीं मिला, अचानक आपकी अंतरात्मा जाग गई। अब आपको ट्रांसफर नीति में खामी दिखने लगी।
ब्रजवासी जी, आपने 1 लाख 90 हजार शिक्षकों की भावनाओं को कभी समझा ही नहीं। आज जब लाखों शिक्षकों के घर लौटने का सपना पूरा होने जा रहा है, तो आपके निजी स्वार्थ इसकी राह में रोड़ा बन रहे हैं। यह सिर्फ कुछ चहेतों का खेल नहीं है, ये लाखों शिक्षकों की वर्षों की तपस्या का फल है। अगर इस ऐतिहासिक प्रक्रिया पर आपकी वजह से रोक लगती है तो शिक्षक समाज आपको कभी माफ नहीं करेगा।
नेता वही होता है जो जनभावनाओं के साथ खड़ा होता है, ना कि सिर्फ अप