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गुलशन में महकता जैसे गुलाब देखा है
महफ़िल में बे-पर्दा हुस्न-ए-शबाब देखा है,
उसकी हसरत -ए- दीदार में हर रोज़
मैंने आफ़ताब को होते महताब देखा है ..!!❤️
नहीं लिख पाता कोई कवि
दिनभर कविताएँ,
नहीं गा पाता कोई गायक
दिनभर गीत,
नहीं बिखेर पाता कोई फूल
दिनभर सुगन्ध,
नहीं भर पाता कोई पक्षी
दिनभर उड़ान,
अकेला मैं सोचता रहता हूँ..
दिनभर तुम्हारा प्यार..
-पवन