@jyotsnamohan आपके हिसाब से 365 दिन दुनिया भर की मस्जिदों से दिन में 5 बार 'अल्लाह सबसे बड़ा है' के नारे लगते हैं वो बंद हो जाने चाहिए, है न..क्योंकि ग़ाज़ा का,फिलिस्तीन का,ईरान का तमाम मुस्लिम मुल्कों का इतना बुरा हाल है वो तो ठीक हो ही नहीं रहा है। ग़जब के नॉनसेंस भी रहते हैं हमारे देश में
@jyotsnamohan आपके हिसाब से 365 दिन दुनिया भर की मस्जिदों से दिन में 5 बार 'अल्लाह सबसे बड़ा है' के नारे लगते हैं वो बंद हो जाने चाहिए, है न..क्योंकि ग़ाज़ा का,फिलिस्तीन का,ईरान का तमाम मुस्लिम मुल्कों का इतना बुरा हाल है वो तो ठीक हो ही नहीं रहा है। ग़जब के नॉनसेंस भी रहते हैं हमारे देश में
@mrnobody00100 रही बात मनुस्मृति में क्या क्या लिखा है,90% हिंदुओं को तो अब पता चल रहा है मतलब इसे आज की तारीख में कोई follow नहीं करता है।केवल राजनीति के लिए ही है यह सब। दूसरी बात,मनुस्मृति में औरतों के लिए बहुत कुछ अच्छा भी लिखा है। तीसरी और अहम बात, क्या किसी और धर्म की किताब में क्या- 1/2
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मनुस्मृति पर तो बहुत बात हुई,
तो थोड़ी बात बाइबिल पर भी हो जाए.
बात निकली है तो सबका नंबर आएगा.
राहुल गांधी की स्कूलिंग और कॉलेज दोनों दिल्ली के ईसाई संस्थाओं से हुई है, इसलिए बाइबिल को वे जानते ही होंगे और ये लाइन उन्होंने पढ़ी होगी.
“यदि कोई व्यक्ति अपनी बेटी को दासी के रूप में बेचता है, तो उसे पुरुष दासों की तरह स्वतंत्र होकर जाने की अनुमति नहीं होगी. यदि वह उस स्वामी को पसंद न आए, जिसने उसे अपने लिए चुना है, तो वह उसे छुड़ाने की अनुमति दे.”
बाइबिल, ओल्ड टेस्टामेंट, एक्सोडस, अध्याय 21, पद 7–8.
बाइबिल के अनुसार, ये वे कानून हैं जिन्हें ईश्वर ने मूसा के माध्यम से इजराइलियों के सामने रखा.
इस कानून में पिता को अपनी बेटी को दासी के रूप में बेचने का अधिकार दिया गया है.
लेकिन आज के ईसाई ऐसे धार्मिक कानूनों को स्वीकार नहीं करते. वे इन्हें सिर्फ ऐतिहासिक संदर्भ में देखते हैं. इन्हें आज के समाज पर लागू नहीं करते.
वे किताब का सम्मान करते हैं पर मानते नहीं हैं, न लागू करते हैं.
यही बात हिंदू धर्म पर भी लागू होनी चाहिए.
किसी प्राचीन ग्रंथ में लिखी हर बात को आज के हिंदुओं के आचरण का प्रमाण मानना उतना ही गलत है, जितना बाइबिल के पुराने नियम के आधार पर आज के ईसाइयों को परिभाषित करना.
अगर मनुस्मृति में लिखी किसी बात के आधार पर आज के हिंदुओं को पितृसत्तात्मक बताया जा सकता है, तो उसी कसौटी से बाइबिल के इन कानूनों पर भी सवाल होना चाहिए. और अगर आज के ईसाइयों को उनके प्राचीन ग्रंथ के आधार पर नहीं परखा जाता, तो यही उदारता हिंदुओं के लिए भी होनी चाहिए.
यही असली कसौटी है. धर्मग्रंथों के पुराने नियमों और आज के समाज के बीच फर्क करना.
@priyanka2bharti तेरी भाषा निहायती घटिया है
जब तेरे पास तर्क नहीं बचते तब तू रोने लगती है (महिला कार्ड,जाति कार्ड,विक्टिम कार्ड) इसलिए तेरी औकात है नहीं कि तुझसे कोई समझदार इंसान बहस करे
@SauravDassss अबे आपिए...बहरूपिए ... तेरी औकात बहुत जल्दी जनता के सामने आ चुकी है.. देख मेरा अकाउंट, बिल्कुल आम आदमी हूँ या नहीं। जब मैं तेरी औकात समझ गया तो पूरा देश कैसे नहीं समझेगा। सवाल क्या है और तू सेलेक्टिवली बोल क्या रहा है। यह बता कि सारी महिलाएं समान हैं या नहीं? चूतीया आपिया