अयोध्या राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा घोटाला सामने आने के बाद तमाम श्रीराम के उपासक और उनके नाम पर अपना "अध्यात्म बाजार" चलाने वाले खामोश हैं! उनकी आस्था इस घोटाले से आहात नहीं हो रही है! इसमें वे धर्म का अहित नहीं देख रहे हैं! इनका "विश्वास" नहीं हिला!
दरअसल ये माहौल और समय देखकर अपना बाजार लगते हैं! ये किसी के नहीं है! उस धर्म के नहीं जिसके नाम पर खूब पैसा बना रहे हैं!
कुछ देर में एंकर 👇
आइए आपको बताते हैं- पेपर रद्द होने के फायदे
• पेपर रद्द होने से आपको परीक्षा देने की अच्छी प्रैक्टिस हो जाती है.
• परीक्षा देने के बाद आपके अंदर जो आलस भरा होता है, वो पेपर रद्द होते ही दूर हो जाता है.
• अगर आपका पेपर खराब गया है तो दूसरी बार में उसे बेहतर करने का मौका मिलता है.
• आप हमेशा कॉम्पटिशन के मोड में रहते हैं.
इसलिए पेपर लीक होना और पेपर रद्द होना देश हित में है. इससे हमारे युवा हमेशा तैयार रहते हैं, सजग रहते हैं.
अगर आप अखिलेश यादव से सहमत है तो रीट्वीट करे तुरंत
हमारी माँग है कि सुप्रीम कोर्ट तत्काल संज्ञान लें और बंगाल की मतगणना की CCTV पूरे देश के सामने लाइव उपलब्ध कराई जाए,
अखिलेश यादव से सहमत वाले हजारी लगाओ आज . ये बात खाली विपक्ष की नहीं है पूरे देश की है बाकी आप लोगो की मर्जी है
जिस आप सांसद के यहाँ महज 10 दिन पहले ED रेड होती है वह बीजेपी में आज शामिल होते हैं! शामिल होते हैं इससे बड़ी बात पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनका खुल का स्वागत करता है! इससे कुछ बातें साफ होती है
1- ED का राजनितिक टूल के रूप में इस्तेमाल होता है विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए जिससे मजबूर होकर वे बीजेपी में शामिल हो जाते हैं
2-अगर यह बात सही नहीं है बीजेपी के हिसाब से तो इसका मतलब पार्टी ऐसे ED रेड को बहुत हलके में लेती है और एजेंसी के आरोप पर भरोसा नहीं करती है! जब तक कोर्ट से उन आरोपों पर सजा न मिल जाए
3-अगर यह सही है तो आज से किसी नेता पर बीजेपी को सिर्फ ED रेड के आधार आरोप नहीं लगाना चाहिए ! क्योंकि पार्टी खुद ऐसे नेताओं का पुरे सम्मान के साथ स्वागत करती है
इसमें तीनो बाते गलत नहीं हो सकती है! कोई एक बात को तो स्वीकार तो करना होगा ना!
अब जब भी एंकर कूदते हुए बोलें- मोदी सरकार ट्रंप के आगे झुकी नहीं है. हमने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया.
तब BJP के वरिष्ठ नेता राम माधव का ये वीडियो उनके मुंह पर फेंककर मारें. अपने आप बोलती बंद हो जाएगी.
"ये अयोध्या एक धोखा है!"
योगी राज की अयोध्या पर अयोध्या के परम विद्वान आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण के भाषण का एक और हिस्सा।
"कम से कम अयोध्या के घाट तो छोड़ दीजिए।
वे वेडिंग शूट (Wedding shoot) के लिए नहीं बने हैं।
वे रील बाजों के लिए नहीं बने हैं।
भला आदमी आधा घंटा ठहर नहीं सकता है, ऐसी राम की पैड़ी हो गई है!!
अयोध्या के हाईवे पर हनुमान और वाल्मीकि बैठे हुए हैं।
न सिर पर कोई छतरी। न कोई आवरण।
वे ट्रकों की धूल फांक रहे हैं।
गाड़ियों से शीशा खोलकर थूकते हुए ड्राइवर उनके दो फ़ीट दूर से गुज़रते हैं।
सब कुछ आपके लिए तमाशा है।
सब आपके लिए सिंबल है।
आप खेल की तरह देवी देवताओं का इस्तेमाल करेंगे।
फिर मंदिरों में बैठे भगवान क्या करेंगे, अगर सड़कों पर भी उन्हीं से सजावट होनी है?
अयोध्या में आप दक्षिण के पेड़ लगा रहे हैं। ये पॉम ट्री हैं?
अरे अयोध्या की जलवायु के वृक्ष कहां हैं?
आप पांच गुना-दस गुना पेमेंट करते हैं, फिर उन पेड़ों की रखवाली करते हैं।
इस अयोध्या में रामायणियों की कथा परंपरा ही शून्य हो चुकी है ।"
अयोध्या को शास्त्रों में “अयोध्य” कहा गया है, यानि जिसे शत्रु जीत न सके।
मगर विडंबना तो देखिए, जिस अयोध्या को दुनिया नहीं जीत पाई,
उसे राम की विरासत के कलियुगी टेंडर के विजेता ठेकेदारों ने मिलकर हरा दिया!!
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी के भाषण तो ऐसे होते थे जैसे उनकी सरकार आयी तो रूपया गिरेगा ही नहीं। रूपया है कि गिरता ही जा रहा है लेकिन प्रधानमंत्री @narendramodi की तरफ़ से कोई बयान नहीं आ रहा है। ये भाषण 2014 का है। सुनिए।