1.जैसाकि विदित है कि दिनांक 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुग़लकाबाद मे��� संतगुरु श्री रविदास जी के पवित्र गुरुघर को बुलडोज़र और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया था। इसके विरोध में देशभर की संगत जब लोकतांत्रिक ढंग से सड़कों पर उतरी तो तब उन्हें लाठीचार्ज, आँसूगैस, गिरफ्तारियाँ और मुकदमों आदि का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
2.इतना ही नहीं गुरुघर की भूमि भी छीन ली गई और आज भी संगत को लोहे के अस्थायी टीन शेड में अपने गुरुजी को माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है और आज भी समाज की स्मृति में अंकित है।
3.अब पंजाब चुनाव नज़���ीक आते ही वही भाजपा संतगुरु श्री रविदास जी के नाम पर कलश यात्रा निकालकर गुरुजी के बेगमपुर शहर के लक्ष्य से समाज को भटाकने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पंजाब के धलेता गाँव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने पर जब ��ंगत और बसपा ने आवाज़ उठाई तो गिरफ्तारियाँ की गईं। अन्त में फिर आम आदमी पार्टी की सरकार को झुकना पड़ा और गुरुघर का पुननिर्माण कराना पड़ा।
4.ऐसे में समाज भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहें। पराधीनता का अन्त एवं बेगमपुरा का संकल्प संतगुरु श्री रविदास जी सम्मान यात्रा जो तुग़लकाबाद से धलेता गाँव तक पहुँच रही है, जिसमें समूह संगत सादर आमंत्रित हैं। और संतगुरु श्री रविदास जी बेगमप���रा के आदर्श, सम्मान, समानता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाए तथा गुरुघरों की गरिमा, धार्मिक अधिकारों और संतगुरु श्री रविदास जी के सपनों के अनुरूप पराधीनता मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प को मज़बूत बनायें।
अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेशालय का दायित्व होता है कि वह ��रिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं होती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत कर सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा सम��-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप ल��ाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई��� यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित ��ोती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधि���ाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जि��ेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
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निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज ���ग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनी��ी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन: लेसा में निजीकरण हेतु वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर 8000 पद कम किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के हर प्र��रूप और हर कोशिश का किया जायेगा पुरजोर विरोध।
राजधानी लखनऊ में लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में आज बिजली कर्मियों ने दफ्तरों के बाहर आकर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्म��यों के लगभग 8000 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने की पूरी संभावना है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल प्रणाली केवल निजीकरण के लिए लागू की जा रही है और निजी कंपनियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि टीजी 2 के लगभग 1350 पद, जूनिय�� इंजीनियर्स के 287 पद और अभियंताओं के 45 पद समाप्त किए जाने से लेसा में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया है और त्यौहार के समय हर स्तर के कर्मचारी में लखनऊ से हटाए जाने का भय व्याप्त हो गया है जिसका कार्यप्रणाली पर भारी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े शहरों में वर्टिकल प्रणाली लागू कर इन शहरों की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के अन्तर्गत देने की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा कि देश के जिन शहरों में निजी कंपनियां अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत काम कर रही हैं उन शहरों में इसी प्रकार की प्रणाली लागू है जिससे कम कर्मचारियों से अधिक काम लिय�� जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली के नाम पर अत्यधिक अल्प वेतन भोगी लगभग 6000 संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जिससे बिजली व्यवस्था तो चरमरा जाएगी ही साथ ही इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाना अमानवीय कृत्य भी है।
दीपावाली के पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने आज विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा तथा निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में आज रेजिडेंसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में सभा के अन्त में वरिष्ठ बिजली मजदूर नेता गिरीश पांडे जी की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और दो मिनट मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प���रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रां���ैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए ��्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्य���शन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजा�� देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति ��ें हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक ड���मेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किस�� की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की ��ा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांच��� विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मं���्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का उल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारि���ों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक्टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में ल���ये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।"
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कार��ोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के एक महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुए समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
समझौते के ठीक पांच साल पूरा ��ोने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।"
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केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की मिलीभगत से संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की साजिश : संघर्ष समिति ने सार्वजनिक किये डॉक्यूमेंट: राष्ट्रीय स्तर के आन्दोलन की तैयारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्री��� पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ मिली भगत में अपना समांतर सेक्रेटेरि��ट चला रहा है और संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की गुपचुप योजना तैयार की जा रही है। संघर्ष समिति ने इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सचिवालय के पत्र व्यवहार को आज यहां सार्वजनिक किया।
संघर्ष समिति ने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने 09 सितंबर देश के सभी ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों को एक पत्र भेजा है जिस पत्र से बिल्कुल स्पष्�� हो जाता है की केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की शह पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ऊर्जा निगमों के कार्य में सीधे दखलंदाजी कर रहा है। श्री आलोक कुमार अपने पत्र में देश के विभिन्न ऊर्जा निगमों से डाटा ऐसे मांग रहे हैं मानो वही देश के विद्युत मंत्री बन गए हों।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि ऊर्जा क्षेत्र के निजी��रण के लिए ही ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाया गया है और यह एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिए का काम कर रही है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने शीघ्र रखेगी।
उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सेक्रेटेरिएट की दखलंदाजी तत्काल ��ंद न की गई और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से जुड़े हुए ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद से न हटाए गए तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसके विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
संघर्ष समिति ने कहा की पत्र में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने लिखा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 08 सितंबर को एक मीटिंग किया था ज��समें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को भी बुलाया गया था । इस मीटिंग में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से यह कहा कि वह विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन में कॉस्ट रिडक्शन के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को एक सुझाव दें। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी ऊर्जा निगमों से इनपुट डाटा मांगे और प्���स्ताव बनाए। इसी आधार पर श्री आलोक कुमार ने देश के सभी ऊर्जा निगमों के चेयरमैन से इस संबंध में डाटा मांगा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह सारे घटनाक्रम बहुत ही गंभीर है और सरकारी काम में सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक संस्था की इस प्रकार की दखलंदाजी देश के इतिहास में पहली बार हो रही है।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कि यह सब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के इशारे पर हो रहा है। श्री आलोक कुमार ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ने अप्रैल 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सामने भी एक प्रेजेंटेशन किया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में ऑल इंडियाडिस्कॉम एसोसिएशन का प्रादुर्भाव अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत निजीकरण को अंजाम देने हेतु बनाई गई संस्था है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के शीर्ष पदाधिकारी भी बने हुए हैं जिससे यह मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव का बनता है।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वित���ण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के ��रएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन क�� निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ���े निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिय�� डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबा��� में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
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त्योहारों को देखते हुए अगले दो माह आंदोलन के साथ उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता:निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे त्योहारों के मद्देनजर अगले दो माह तक बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड करें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में हम शुरू से ही किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं अतः त्योहारों में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ध्यान रहे अगले दो माह पितृ पक्ष, नवरात्र, रामलीला, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे अति महत्वपूर्ण पर्व हैं।
इस बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज लगातार 283 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति ने आ��� सप्ताहांत में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने यूपी ट्रांस्को को स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने पर इसे प्रदेश का गौरव बताया है जो उचित ही है । तो सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की ट्रांसमिशन बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार हो रहे सुधार के बाद भी इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ट्रांसमिशन की तरह वितरण कंपनियां भी लगातार सुधार कर रही हैं ऐसे में इनका निजीकरण क्यों ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 23 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बि��� में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जन��ा के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 32 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बि���ली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक सप्ताहांत संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी।
राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डी के मिश्रा जी के आकस्मिक निधन पर आज सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय डी के मिश्रा जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्प��त किए।
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स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने के बावजूद निजीकरण के चलते यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी का अस्तित्व खतरे में : टीबीसीबी बन्द कर राज्य के सभी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट यूपी ट्रांस्को को देने की मांग
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का अवार्ड मिलने के बावजूद ट्रांसमिशन में चल रहे निजीकरण से यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी का अस्तित्व ही खतरे में है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ट्रांसमिशन में निजीकरण को न रोका गया तो यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी कुछ ही वर्षों में समाप्त ��ो जाएगी और इसकी श्रेष्ठता इतिहास की बात हो जाएगी।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद प्रदेश की सभी ट्रांसमिश की परियोजनाए यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को ही प्रदान की जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया ��ि उत्तर प्रदेश में ट्रांसमिशन के क्षेत्र में जबरदस्ती थोपे गए टैरिफ बेस्ड कंपीटीटिव बिडिंग (टीबीसीबी) के कारण नई बनने वाली ट्रांसमिशन की सभी परियोजनाएं, सब स्टेशन और लाइनें निजी क्षेत्र में जा रही है। उन्होंने बताया कि एक समय उत्तर प्रदेश ट्रांसमिशन के क्षेत्र में देश का सबसे अग्रणी प्रान्त था। देश में सबसे पहले 400 केवी और 765 केवी ट्रांसमिशन के सब स्टेशन और लाइन बनाने और संचालन करने का कार���य उत्तर प्रदेश ने हीं किया।
अब यही यूपी ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, जिसे स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का अवार्ड मिला है, 220 केवी और ऊपर की क्षमता का एक भी सबस्टेशन या लाइन नहीं बना सकता कयोंकि यह निर्णय है कि 220 केवी और इससे अधिक क्षमता के सब स्टेशन और लाइनें टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के नाम पर बनाई जाएगी। स्वाभाविक है कि जब यूपी ट्रांस्को से 220 केवी और ऊपर का ट्रांसमिशन का कार्य छीन लिया ��या है तो यह सारा काम या तो पावर ग्रिड के पास जा रहा है या निजी क्षेत्र में मुख्यतः अदानी ट्रांस्को के पास जा रहा है।
इसके अतिरिक्त 100 करोड रुपए से अधिक की 132 केवी की ट्रांसमिशन परियोजनाओं का कार्य भी टीबीसीबी के नाम पर निजी घरानों के पास ही जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश का ट्रांसमिशन का नेटवर्क देश का सबसे बड़ा ट्रांसमिशन का नेटवर्क है किन्तु टीबीसीबी के चलते अब उप्र के ट्रांसमिशन नेटवर्क का बहुत बड़ा भाग निजी घरानों के पास है। निजी घरानों के ट्रांसमिशन चार्जेज काफी अधिक हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन की दो तिहाई से ज्यादा की आपूर्ति निजी क्षेत्र से होती है । ट्रांसमिशन में भी बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र के आने से निजी क्षेत्र से मिलने वाली महंगी बिजली पर निजी घरानों को ट्रांसमिशन चार्जेज भी अधिक देने पड़ रहे हैं। इससे सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे प्रदेश की जनता को मिलने वाली बिजली की कीमत बढ़ जाती है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उत्तर प्रदेश में नई बनने वाली ताप बिजली परियोजनाओं मुख्यतया 1980 मेगावॉट की घाटमपुर , 1320 मेगावॉट की मेजा, 1320 मेगावॉट की बारा और 1320 मेगावॉट की खुर्जा तापीय परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली बिजली के निष्कासन हे���ु बनने वाली ट्रांसमिशन लाइन और सब स्टेशन सब निजी क्षेत्र मुख्यतया अदानी ट्रांस्को के पास हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की नई बनी ताप बिजली परियोजनाओं ओबरा सी और जवाहरपुर से निकलने वाली पॉवर ट्रांसमिशन लाइन भी अदानी ट्रांस्को और पॉवर ग्रिड के पास हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति करने वाला प्रदेश है किन्तु यह गंभीर चिंता की बात है कि उत्तर प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी देश में श्रेष्ठतम होते हुए भी उप्र का ट्रांसमिशन का सारा नेटवर्क निजी घरानों के नियंत्रण ��ें जा रहा है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए का एरियर खतरे में पड़ने की आशंका : निजीकरण हेतु प्रीपेड मीटर लगाकर डाउन साइजिंग करने की साजिश : निजीकरण के ���िरोध में प्रान्त भर में विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आशंका जताई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते विद्युत वितरण निगमों का 115000 करोड़ रुपए का एरियर खटाई में पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर डाउन साइजिंग की जा रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सीतापुर, गोण्डा आदि स्थानों पर पकड़ा गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला निजी कंपनियों और दोषी उपभोक्ताओं की मिलीभगत के साथ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह ध्यान देने की बात है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे सबसे बड़ा तर्क घाटे का दिया जा रह�� है। संघर्ष समिति ने कहा कि वैसे तो पावर कार्पोरेशन ��्रबंधन घाटे के झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े दे रहा है। किन्तु स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों की पुराने मीटर की रीडिंग शून्य करने या नष्ट करने के समाचार बहुत खतरनाक संदेश दे रहे हैं जिसे समय रहते न रोका गया तो बिजली राजस्व का बकाया वसूलना नामुमकिन हो जाएगा और वस्तुतः घाटा और बढ़ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में विद्युत वितरण निगमों का उपभोक्ताओं पर लगभग 115000 करोड रुपए का बिजली राजस्��� का बकाया है। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के आंकड़ों के अनुसार लगभग 110000 करोड रुपए का घाटा है। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही यह बात कह रही है कि 115000 करोड रुपए का राजस्व वसूल लिया जाए तो कोई घाटा नहीं रहेगा, उल्टे पावर कॉरपोरेशन 5000 करोड रुपए के मुनाफे में आ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार लगभग 34 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं और इनमें से लगभग 06 लाख स्मार्ट मीटर अभी तक वापस नहीं किए ��ए हैं। कितने लाख मीटर में पुरानी रीडिंग शून्य की गई है या नष्ट की गई है यह एक बड़ी जांच का विषय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर निजीकरण की प्राथमिक शर्त है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद निजीकरण होने पर निजी कंपनियों को राजस्व वसूली में किसी दिक्कत का सा��ना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें स्वतः राजस्व मिलता रहेगा।
स्पष्ट है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और इस नाम पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण के पहले बड़े पैमाने पर डाउनसाइजिंग करना प्रारंभ कर दिया है।
वर्ष 2017 के मापदंडों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 20 कर्मचारी और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों का नियम था। बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की डाउन स���इजिंग करने के लिए मापदंड में प्रतिगामी परिवर्तन किया गया। उपभोक्ताओं की संख्या 2017 की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद अब शहरी क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 18:30 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 12.5 कर्मचारी का मापदण्ड बनाकर बड़ी संख्या में संविदा कर्मी निकाले जा रहे हैं। यह सब निजी घरानों की मदद के लिए किया जा रहा है।
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उड़ीसा में निजी कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने हेतु स्वतः संज्ञान लेकर विद्युत नियामक आयोग ने सुनवाई की तारीख तय की : उड़ीसा के निजीकरण के विनाशकारी परिणाम को देखते हुए उप्र में बिजली के निजीकरण का निर्णय रद्द करने की मांग: निजीकरण के विरोध मे सितम्बर माह में किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के सम्मेलन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उड़ीसा में हुए बिजली वितरण के निजीकरण के प्रयोग के विनाशकारी परिणाम आने के बाद उ���्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि निजीकरण के विरोध में सितंबर माह में किसानों, गरीब व मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों के सम्मेलन प्रदेश भर में किए जाएंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए 10 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय की है। पहले यह तारीख 28 अगस्त को तय की गई थी लेकिन 29 अगस्त को उड़ीसा में स्थानीय अवकाश होने के कारण इसे 10 अक्टूबर को पुनर्धारित कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उड़ीसा के सभी उपभोक्ता फोरमों की ओर से श्री किशोर पटनायक ने 16 अगस्त को टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों के विरुद्ध उपभोक्ता सेवा में पूरी तरह अक्षम रहने और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करने के आरोप लगाते हुए इन कंपनियों का विद्युत वितरण का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी। उपभोक्ता फोरमों ने उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग रेगुलेशन 2004 की धारा 9(1) और (4) के अंतर्गत उपभोक्ता सेवाओं में पूरी तरह विफल रहने के आरोप लगाते हुए दाखिल की थी।
उपभोक्ता फोरमों ने अपनी प्रेयर में कहा है कि विद्युत परिषद को विघटित करने का और उसके उपरांत विद्युत वितरण का निजीकरण करने का सबसे पहला प्रयोग उड़ीसा में हुआ। यह दोनों ही प्रयोग पूरी तरह विफल रहे हैं। निजीकरण के परिणाम विनाशकारी हैं और उपभोक्ता दर दर भटक रहे हैं।
उपभोक्ता फोरमों का आरोप है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली की कटौती की जा रही है, बिना प्रॉपर नोटिस के विद्युत विच्छेदन किया जा रहा है, बेतहाशा बढ़े हुए गलत बिल भेजे जा रहे हैं और सबसे अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है।
उपभोक्ता फोरमों ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि उड़ीसा के पूर्व बिजली कर्मियों को टाटा पावर द्वितीय श्रेणी का नागरिक मानती है। उनको बिना काम के किनारे बैठा रखा गया है और उनका करियर बर्बा��� हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में सबसे पहले 1999 में निजीकरण किया गया था। निजीकरण के एक साल बाद ही अमेरिका की एईएस कंपनी वापस चली गई। रिलायंस पावर की बाकी तीनों कंपनी का लाइसेंस फरवरी 2015 में विद्युत नियामक आयोग ने पूरी तरह अक्षम रहने के कारण रद्द कर दिया था।
2020 में चारों कंपनियों का लाइसेंस टाटा पावर को दिया गया और अब विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब उपभोक्ता सेवा का स्वत: संज्ञ���न लेते हुए 15 जुलाई 2025 को टाटा पावर की चारों कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है। टाटा पावर का लाइसेंस निरस्त करनी हेतू 10 अक्टूबर को सुनवाई हो रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में कृषि क्षेत्र उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत कम है। बिजली के क्षेत्र में घाटा मुख्यतः ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में होता है। निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा जैसे औद्योगिक ।प्रांत में विफल रहा है और निजीकरण के लाइसेंस निरस्त करने हेतु सुनवाई हो रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की गरीब जनता पर निजीकरण न थोपा जाय।
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उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार का भुगतान किया:घाटे के नाम पर निजीकरण की दलील देने वाले किस मद में डिस्कॉम एसोशिएशन को कर रहे हैं भुगतान-संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समित���, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि विगत 03 जून 2025 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उप्र के पांचो विद्युत वितरण निगमों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान किया है। संघर्ष समिति ने सवाल किया है कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन घाटे के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की दलील दे रहा है और दूसरी ओर एक निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को करोड़ों रुपए का चंदा दे रहा है, यह बहुत गम्भीर मामला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन से लेकर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन को चंदा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय।साथ ही हितों के टकराव को देखते हुए उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरम���न डॉ आशीष गोयल को निर्देश दिया जाय कि वे या ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री का पद छोड़ दें या पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद से उन्हें हटा दिया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन और चंदे की ऊपर से दिखाई दे रही रकम "टिप ऑफ द आईस बर्ग" है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाला ह���। संघर्ष समिति ने कहा कि ��त्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को बहुत बड़े घोटाले से बचाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति ने यह आरोप पुनः लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन विद्युत वितरण निगमों में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन कर रही है और विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण में पूरी मदद कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के पीछे देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ है और इस एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु किया गया है।आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर इसीलिए निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है। इस एसोसिएशन में निजी क्षेत्र की कई विद्युत वितरण कंपनियां सम्मिलित हैं और उप्र सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण हेतु दस्��ावेज तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता लेने के लिये 10 लाख रुपए और 01.80 लाख रुपए जी एस टी मिलाकर 11.80 लाख रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त इनीशियल कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में 10 लाख रुपए का अलग भुगतान किया है।इस प्रकार उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कुल 21.80 लाख रुपए का भुगतान विगत 03 ज���न 2025 को किया।
उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के निर्देश पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम,दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम,पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम,मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और केस्को ने इसी प्रकार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को अलग-अलग 21 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान 03 जून 2025 को किया है।
इस प्रकार उप्र पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड और उप्र के विद्युत वितरण निगमों ने कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को किया।
संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन यह बताये कि एक करोड़ तीस लाख अस्सी हजार रुपए के भुगतान हेतु पॉवर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग से पू���्व अनुमति ली है या नहीं।और यदि अनुमति नहीं ली है तो इस चंदे की धनराशि को खर्च में जोड़कर उपभोक्ताओं पर भार डालने का आधार क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के नाम पर एक निजी संस्था को करोड़ों रुपए का चंदा देना और उसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना कितनी नैतिकता है?
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निजीकरण की प्रक्रिया पर संघर्ष समिति ने उठाये सवाल : बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण ��े बाद सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो जनता पर यह भार क्यों डाला जा रहा है:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण के बाद भी सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी ���ो निजीकरण से क्या लाभ होने जा रहा है ?
संघर्ष समिति ने एक बार पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि तमाम घोटालों से भरे निजीकरण की सारी प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है। अतः वे प्रभावी हस्तक्षेप कर निजीकरण को निरस्त करने की क��पा करें।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में जारी ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 2.2 (बी) में लिखा है कि जिस विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है अगर वहां औसत बिजली विक्रय मूल्य और औसत राजस्व वसूली में अधिक अन्तर है तो निजीकरण के बाद सरकार निजी विद्युत कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर बिजली आपूर्ति तब तक सुनिश्चित करेगी जब तक निजी कम्पनी मुनाफे में नहीं आ जाती।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की उक्त धारा के अनुसार सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निजी कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर सरकार कितने वर्ष बिजली आपूर्ति कराएगी और इस हेतु सरकार को कितने अरब रुपए की धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्युत वितरण निगमों के घाटे का सबसे बड़ा कारण बहुत महंगी दरों पर निजी विद्युत उत्पादन घरों से बिजली खरीद के करार है। ऐसे बिजली क्रय करार भी हैं जिनसे बिना बिजली खरीदे प्रति वर्ष 6761 करोड रुपए फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार सरकार निजीकरण के बाद निजी घरानों को महंगे पावर प���चेज एग्रीमेंट के एवज में सब्सिडाइज्ड बल्क पावर सप्लाई करेगी और इसका खर्चा सरकार उठायेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सब्सिडाइज्ड बल्क सप्लाई का प्रतिवर्ष कितना खर्चा आएगा और यह कितने वर्ष तक जारी रखा जाएगा ।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अलावा स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (ई) के अनुसार निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे तथा देनदारिय��ं का सारा उत्तरदायित्व भी सरकार का होगा ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (एफ) के अनुसार सरकार 05 से 07 वर्ष तक या और अधिक समय तक निजी घरानों को वित्तीय सहायता भी सरकार देगी और यह सहायता तब तक देती रहेगी जब तक निजी कंपनियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाए और मुनाफा न कमाने लगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार 42 जनपदों की सारी जमीन मात्र ₹1 प्रतिवर्ष ���ी लीज पर दी जाएगी। वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर और अन्य स्थानों पर जिनका निजीकरण किया जा रहा है जमीन बेशक कीमती है उसे मात्र 01रुपए की लीज पर दिए दिया जाना कौन सा रिफॉर्म है ?
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यही सब करना है तो सरकारी क्षेत्र के विद्युत वितरण निगमों को लगातार सु��ार के बाद कौड़ियों के मोल बेचने की जरूरत क्या है ?
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 272 दिन पूरे हो जाने पर आज भी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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बिजली अभियंताओं पर लगातार उनके कार्यालयों में घुसकर हो रहे जानलेवा हमले पर विद्युत अभियंता संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कियाः फील्ड में कार्य कर रहे अभियंताओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए इंजीनियर प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग:
आज दिनांक 23 अगस्त 2025 को अधीक्षण अभियंता जनपद बलिया ���े कार्यालय में घुसकर हमलावरों द्वारा गाली गलौज करते हुए मारपीट की गई।
अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि अधीक्षण अभियंता जिले का सबसे बड़ा अधिकारी होता है और अगर उसी के साथ उसके कार्यालय में घुसकर जानलेवा हमला होता है तो यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। अगर जिले का सबसे बड़ा अधिकारी ही सुरक्षित नही है तो अन्य बिजली कर्मी कैसे सुरक्षित रहेंगें।
संघ ने उपरोक्त घटना ���र कड़ा विरोध दर्ज करते हुए हमलावरों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार कराए जाने की मांग की है।
जितेंद्र सिंह गुर्जर ने यह भी कहा कि इससे पूर्व थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर के अंतर्गत दिनांक 24 जुलाई 2025 को अपने सरकारी कार्यालय में कार्य कर रहे उपखंड अधिकारी (विद्युत) श्री शुभम अग्रहरी पर नामजद हमलावरों द्वारा सरकारी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की तथा उपखंड अधिकारी के साथ गाली गलौज करते हुये मारपीट की, जिसका वीडियो प्रदेश भर मे वायरल हो रहा था। उपखंड अधिकारी के द्वारा उपरोक्त घटना की तहरीर तत्काल थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर में दे दी गई थी, परन्तु आज एक माह व्यतीत होने के उपरांत भी उपरोक्त घटना की एफआईआर तक भी दर्ज नहीं की गयी है जिससे हमलावरों के हौंसले लगातार बढ़ रहे हैं। उपरोक्त घटना की सूचना संघ द्वारा ऊर्जा प्रबंधन को समय-समय पर दी गयी है लेकिन ऊर्जा प्रबंधन फील्ड में राजस्व बढ़ाने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का कार्य कर रहे अभियंताओं को सुरक्षा देने हेतु गंभीर नही है और यह उनके प्रबंधकीय दायित्वों का निर्वहन करने में भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। ऊर्जा प्रबंधन मारपीट की घटनाओं के मामले में मूक दर्शक बना बैठा है��� ऊर्जा प्रबंधन बिजली अभियंताओं को सुरक्षा मुहैया कराने में पूर्ण रुप से विफल रहा है।
उपरोक्त घटनाक्रम से विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे अभियन्ताओं एवं कर्मचारियों में इस प्रकार की घटनाओं के उपरांत प्रबंधन से उचित सहयोग न मिलने तथा जिला प्रशासन से न्याय न मिलने ��े कारण घोर निराशा व्याप्त हो गयी है तथा फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं का मनोबल गिर रहा है।
संघ के महासचिव ने माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से मांग की है कि ऊर्जा निगमों में लगातार बिजली अभियंताओं पर उनके कार्यालयों में घुसकर हो रही मारपीट की घटनाओं में शामिल हमलावरों पर कठोर कार्यवाही की जाए तथा अभियंताओं को प्रर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के दृष्टिगत शासन स्तर पर लंबित ’’इंजीनिय�� प्रोटेक्शन एक्ट’’ को लागू किया जाए जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने में अपना पूर्ण योगदान देते रहें।
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निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी : ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल*
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में ऑल इंडिया डिस्काम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिव��धियों पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण को लेकर की जा रही कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाय। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पता चला है कि नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई विद्युत वितरण कंपनियां की बैठक में निजी घरानों के साथ मिली भगत में गठित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में न केवल रुचि ले रही है अपितु इस एसोशिएशन की आड़ में निजी घरानों का हित साधने की कोशिश भी की जा रही है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन में विद्युत वितरण निगम के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों के साथ निजी घरानों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं । एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल के पद पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्य��त सचिव आलोक कुमार सेवानिवृत्त आई ए एस है। एसोशिएशन के जनरल सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ आशीष गोयल का पॉवर कारपोरेशन का चेयरमैन रहते हुए इस प्रकार निजी घरानों के साथ एसोसिएशन बनाना सरकारी गोपनीयता का हनन है और हितों के टकराव का मामला भी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पारदर्शिता का तकाजा है कि ऐसी परिस्थितियों में डॉक्���र आशीष गोयल को या तो अपने को आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से अलग कर लेना चाहिए अन्यथा स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी पता चला है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपए का चंदा ले रही है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर एक बड़े निजी घराने के सीईओ को रखा गया है। यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कई करोड़ का चंदा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है तो सरकार को यह जांच करना चाहिए कि यह संगठन किसने बनाया है, किस उद्देश्य से बनाया है, देश के विद्युत वितरण निगम किस मद में इसे चंदा दे रहे हैं और इसका ऑडिट कैग से कराया जाना चाहिए। सरकार की अनुमति के बिना ���स प्रकार संगठन बनाकर करोड़ों करोड़ों रुपए का चंदा लिया जाना पूरी तरह अनैतिक और अनुचित है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव सेवा निवृत आई ए एस श्री आलोक कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक ले रहे हैं और उन्हें निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है जिसकी जांच होनी चाहिए और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न कर पाने से हताश और निजीकरण करने के लिए उतावले पॉवर कारपोरेशन के पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी घरानों के साथ मिलकर संविधानेतर कार्य कर रहे हैं ।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन बिजली कर��मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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बिजली की माँग 30251 मेगावॉट पहुंचने के बाद निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाये रखने की बिजली कर्मियों से अपील : निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं को कोई कठिनाई न होने पाये: निजीकरण के विरोध में अगले सप्ताह से केन्द्रीय पदाधिकारियों के प्रांतव्यापी दौरे
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली कर्मियों से अपील की है कि निजीकरण के विरोध में चलाये जा रहे आंदोलन के दौरान बढ़ी हुई बिजली की मांग को देखते हुए बिजली उपभोक्ताओं को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 266 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक जनसंपर्क कर विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 19 अगस्त को रात 10.21 बजे 30251 मेगावॉट बिजली की माँग पहुंच गई जिसके आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है। जून में 31486 मेगावॉट की अब तक की सबसे अधिक मांग रही है। अगस्त सितम्बर में बिजली की मांग इससे भी अधिक रहने की सम्भावना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में चल रहे संघर्ष में उपभोक्ताओ�� को साथ लेकर चल रहे हैं । यह अपने आप में एक कीर्तिमान है कि विगत 266 दिन के आन्दोलन में बिजली कर्मियों ने आन्दोलनरत रहते हुये भी महाकुम्भ में बिजली की अद्वितीय व्यवस्था बनाये रखी और मई जून की भीषण गर्मी में अधिकतम बिजली आपूर्ति के कीर्तिमान बनाये। संघर्ष समिति का बिजली कर्मियों को निर्देश है कि आंदोलन के कारण किसी भी उपभोक्ता को कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा है कि जहां बिजली कर्मी आंदोलन के साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं का भी समाधान कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन बिजली कर्मियों का दमन कर कार्य का वातावरण लगातार बिगाड़ रहा है। हजारों बिजली कर्मियो�� का जून, जुलाई माह का वेतन काम करने के बावजूद नहीं दिया गया है जो सबसे अधिक निन्दनीय है। संघर्ष समिति ने कहा कि चाहे जितना दमन किया जाए बिजली कर्मियों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण वापस नहीं होता और उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियां निरस्त नहीं की जाती।
संघर्ष समिति का निर्णय है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर होने पर सभी ऊर्ज��� निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर देंगे और शुरू होगा सामूहिक जेल पर हुआ आंदोलन।
आज राजधानी लखनऊ में संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों की बैठक में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई गई। अधिकतम अभियंताओं तक जनसंपर्क तेज करने की दृष्टि से अभिय��्ता संघ ने आज से परियोजना वार ऑनलाइन मीटिंग करना प्रारम्भ किया है। आज हरदुआगंज और पारीछा ताप बिजली घरों के अभियंताओं की ऑनलाइन मीटिंग हुई। अगले सप्ताह से संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के प्रांतव्यापी दौर प्रारंभ होंगे।
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निजीकरण का टेण्डर होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन का संघर्ष समिति ने जारी किया एलर्ट : निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई निर्णय लेने के पहले संघर्ष समिति से बात की जाए- विद्युत नियामक आयोग को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर मांग की है कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग कोई मंजूरी न दे और इस मामले में संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने हेतु विद्युत नियामक आयोग वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने निजीकरण की गतिविधियां तेज होते देख बिजली कर्मचारियों को सचेत करते हुए एलर्ट जारी किया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निज��करण का टेण्डर होने के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन की तैयारी रखी जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण होने के बाद बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा अतः निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई भी अभिमत देने के पहले विद्युत नियामक आयोग को संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इस बावत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर वार्ता का समय मांगा है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के बाद लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों की छटनी हो जायेगी और लगभग 16 हजार 500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। कॉमन केडर के अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों पर नौकरी ��ाने और पदावनति का खतरा उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में निजीकरण से सबसे अधिक दुष्प्रभाव बिजली कर्मियों पर पड़ने जा रहा है अतः बिना बिजली कर्मियों का पक्ष सुने नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए अपितु सीधे सीघे पॉवर कार्पोरेशन द्वारा भेजे गये आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को निरस्त कर देना चाहिए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्व��रा जोर जबरदस्ती से निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाये जाने के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को एलर्ट जारी करते हुए आह्वान किया है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर किया जाता है तो बिजली कर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और साम��हिक जेल भरो आंदोलन के लिये तैयार रहें।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा अवैध ढंग से नियुक्त किये गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेन्ट ग्रांट थार्टन के साथ मिलीभगत कर आ.एफ.पी. डाक्यूमेंट कुछ निजी घरानों की मदद करने के लिए बनाया गया था। उ.प्र. शासन ने संभवतः इन्ही बातों को देखते हुए श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया और अब नए निदेशक वित्त श्री संजय मेहरोत्रा बन गये हैं। अतः ��्री निधि नारंग द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के दस्तावेज को वैसे ही निरस्त कर देना चाहिए।
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उड़ीसा और चण्डीगढ़ में निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है ���ि चण्डीगढ़ में हाल ही में किया गया बिजली का निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उ.प्र. ��ें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने कहा कि उड़ीसा सहित देश के सभी भागों में और उ.प्र. में आगरा और ग्रेटर नोयडा में निजीकरण का प्रयोग पहले ही विफल हो चुका है। ऐसे में इस विफल प्रयोग को उ.प्र. के 42 जनपदों पर थोपने का कोई औचित्य नहीं है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रॉजैक्शन कंसल्टेंट के चयन के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट में निजीकरण हेतु चण्डीगढ़ को टेस्ट केस बताया गया है। चण्डीगढ़ के विद्युत विभाग को गोयनका की एमीनेंट पॉवर कंपनी लिमिटेड को 01 फरवरी 2025 को बिजली कर्मियों के प्रबल प्रतिरोध के बावजूद सौंपा गया था। चण्डीगढ़ का निजीकरण करते समय यह तर्क दिया गया थ�� कि निजीकरण के बाद 24 घण्टे निर्बाध गुणवत्ता परक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। उ.प्र. में निजीकरण के पीछे भी यही तर्क दिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया कि चण्डीगढ़ में निजीकरण के बाद आए दिन 02 घण्टे से 06 घण्टे तक बिजली की कटौती की जा रही है और आम नागरिकों को भीषण गर्मी में बिना बिजली के उबलना पड़ रहा है। निजीकरण के बाद मात्र 06 महीने में ही चण्डीगढ़ में बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी से उतर गयी है। उन्होंने बताया कि चण्डीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बाबला ने कहा है कि निजीकरण के बाद आम उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है और निजी कंपनी की हेल्पलाईन भी पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी है। चण्डीगढ़ रेजीडेंट एसोसिएशन वेलफेयर फेडरेशन के अध्यक्ष हितेश पुरी का बयान है कि घरेलू उपभोक्ताओं खास कर गरीब उपभोक्ताओं की बिजली कटौती आए दिन हो रही है, जो 06 महीने पहले सरकारी क्षेत्र में नहीं हो��ी थी। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मुख्य सचिव को सीधे अपने हाथ में कमान लेनी पड़ी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किये गए आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट चण्डीगढ़ के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट के आधार पर तैयार किया गया है। चण्डीगढ़ में लगभग 22 हजार करोड़ रुपए की विद्युत विभाग की परिसम्पत्तियों को बेचने हेतु मात्र 124 करोड़ रुपए ��ी रिजर्व प्राइस रखी गयी थी और इस डाक्यूमेंट के आधार पर चण्डीगढ़ का विद्युत विभाग मात्र 871 करोड़ रुपए में बेच दिया गया।
संघर्ष समिति ने कहा कि उ.प्र. पॉवर कार्पोरेशन के चेयरमैन और पूर्व निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा कार्पोरेट घरानों की मिलीभगत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 01 लाख करोड़ रुपए की परिसम्पत्तियों को बेचने हेतु चण्डीगढ़ की तर्ज पर रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड़ रुपए रखी गयी है। इस प्रकार यह ��र.एफ.पी. डाक्यूमेंट लूट का दस्तावेज है, अतः इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उ.प्र. के 42 गरीब जनपदों में बिजली के निजीकरण का भयावह प्रयोग करने के पहले उ.प्र. में ही ग्रेटर नोयडा और आगरा के निजीकरण की समीक्षा किया जाना बहुत जरुरी है। उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोयडा में निजी कंपनी के खराब परफार्मेंस को देखते हुए उ.प्र. सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोयडा का ��िजीकरण का करार रद्द कराने के लिए मुकदमा लड़ रही है। इसी प्रकार आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी ने पॉवर कार्पोरेशन का 2200 करोड़ रुपए का बिजली राजस्व हड़प लिया है और निजी कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने के चलते पॉवर कार्पोरेशन को 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।
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