दिल्ली में आंदोलन और हंगामे के शोर के बीच धीरे से एक अहम और सुखद जानकारी सामने आई है।और यह ऐतिहासिक है।
संयुक्त राष्ट्र में पहली बार जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई गई है।
भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश मंत्री @asuvathaman पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने UN में यह मुद्दा उठाया और कहा कि
हिंदू धर्म सिर्फ़ एक धर्म नहीं, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता है।
जबरन धर्मांतरण से प्राचीन संस्कृतियों का विनाश हो रहा है। ऐसी संस्कृति जो पर्यावरण को पूजना सिखाती है, जब आप उसे खत्म करेंगे तो नुकसान धर्म, संस्कृति के साथ साथ पर्यावरण का भी हो रहा है।
ग्लोबल वार्मिंग के ये वे पहलू हैं जिन पर ध्यान नहीं दिया गया है।
मैं मोदी को राजनीति नहीं सिखा रहा, क्योंकि मैं एक पत्रकार हूँ। मोदी को राजनीति परिस्थितियाँ सिखा रही हैं, वह भी सीधे चेहरे पर तमाचा मार कर और थूक को चटवा कर।
मेरे शब्द कठोर नहीं हैं, सत्ता की चर्बी संघ और भाजपा के हर नेता और चाटुकार समर्थकों की आँखों पर चढ़ी हुई है। उसका निराकरण इस तरह के लुच्चों द्वारा झुकवा कर होते देखना प्रसन्न भी करता है कि तुम यही डिज़र्व करते हो, और दुखी भी कि क्या इस देश में नल्ले, अनपढ़ लोग शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र लिवा लेंगे!
IT सेलिए बहुत अच्छे चुटकुले लिख रहे हैं। एक को देख कर लगा कि वही चुटिया सलाहकार होगा जो ऐसे निर्णय लिवाता है। एक को तो IB, CBI, CID और CIA घर में रिपोर्ट करती है।
मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि यदि प्रधान से त्यागपत्र लेना ही था, तो मोदी को रील वाली बकलोली क्यों करवायी?
कब तक इसके पीछे छुपोगे कि 'देशहित में लिया निर्णय'? देशहित के निर्णय पुलिस का मनोबल तोड़ कर नहीं लिया जाता। देशहित के निर्णय में लाल क़िले पर खालिस्तानी झंडा नहीं होता। देशहित में सत्ता का ईगो आड़े नहीं आता। सत्ताधीश के ईगो और राजनीति से प्रेरित अनुपस्थित कार्रवाइयों ने इस राष्ट्र की बहुत क्षति कर दी है।
पृथ्वी की परिधि और पाई का मान बताने वाले व शून्य के जनक ,महान गणितज्ञ ,खगोलशास्त्री , ज्योतिषाचार्य ,महाविद्वान शिखाधारी #आर्यभट्ट जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन"💐🙏
Hello
@ghaziabadpolice
सारा ध्यान हिन्दुओं को हाउसअरेस्ट पे ही है या
इन जाहिल जिहादी इंसानियत के हत्यारों के
लिए भी आपके कानून की किताब मे कोई धारा है
खुलेआम लोगों को सलीम की हत्या के लिए
बोला, एड्रेस निकाल कर हत्यारों को दे दिया..
हिन्दुओं Repost जबतक गिरफ्तार न हो जाए 🖐️
The likes of Zubair do the dog-whistling, a random mulla searches and gives away the address, another random mulla stabs and kills. Govt seems to have forgotten how Zubair tweeted and 5000 radical muslims reached Dasna temple to rape, kill and destroy.
मेरे द्वारा संघ की आलोचना पर बहुत लोग बिफरे परे हैं, जैसे कि संघ एक परफैक्ट अवधारणा है, त्रुटि तो हो ही नहीं सकती है। जो बोला जाता है, उसमें कोई सारतत्व होगा, बस हमें पता नहीं है कि वो क्या है। मोहन भागवत का शब्दशः कथन लिखा मैंने। कोई फिलॉसफी नहीं कही गई थी।
प्रश्न स्पष्ट था: “मृतकों के लिए क्या कोई आर्थिक सहयोग निधि बनाई जा सकती है?” यह नहीं पूछा कि संघ उन्हें बचाता क्यों नहीं, विरोध क्यों नहीं करता?
पर मोहन जी को यह बात तीखी नहीं लगी थी। उन्हें तीखी यह बात लगी थी कि उनके लोगों के पास बंगाल में मारे गए स्वयंसेवकों का नाम और पता भी नहीं था। और यह बात मैंने आर्थिक सहयोग से पहले उन्हें सीधे बोली।
मोहन जी की आयु, अनुभव और पद के सामने मैं इतना छोटा था (और हूँ) कि उनके एक कथन पर मेरा अस्तित्व मिटाया जा सकता है। वो चाहते तो कहते कि इसको निकाल बाहर करो, पर उनका बड़प्पन कि उन्होंने अपने अनुभव के प्रयोग से मुझे केवल यही कहा कि संघ ने हिन्दुओं का ठेका नहीं ले रखा है।
आगे जो हुआ वह भी बता देता हूँ। मोहन जी का अगला बड़प्पन यह था कि उसी कार्यक्रम के उपरांत जब मैं वहीं भोजन कर रहा था तो उन्होंने तीन बार तीन लोगों को मेरे पास भेजा।
एक ने कहा: मोहन जी ने मुझे कहा कि उस नवयुवक को मैंने कुछ कठोर वचन कह दिए।
मैंने उत्तर दिया: “वो पिता तुल्य हैं। पर मुझे आप यह समझा दीजिए कि यदि संघ ने हिन्दुओं का ठेका नहीं ले रखा है तो ये दो सौ लोगों को आपने पूरे देश से, खर्चा कर के क्यों बुलवाया है? यही ठेका लेना है, क्योंकि संगठन के पास वह शक्ति है, जो समाज को नेतृत्व को दे सकता है।”
झंडे के लिए मरता हुआ स्वयंसेवक ‘तेरा वैभव अमर रहे माँ’ गाते हुए गोलवलकर जी के ‘बंच ऑफ थॉट्स’ के साथ खप जाएगा। परंतु प्रश्न यह है कि जब संसाधनों से सुसज्जित संघ, जो केशव कुंज बनवा सकता है, वह उनके परिजनों को वही गीत सुना सकता है?
ठीक है, आपके पास पैसे नहीं होंगे। केशव कुंज दान से बना है। आप यही कह देते कि यह व्यवस्था अजीत भारती ही बनाने का प्रयत्न करें, संघ ऐसा नहीं करता। मैं तब भी मान लेता। आपने सीधा अटैक किया क्योंकि आपको भी दायित्व का बोध है पर सार्वजनिक रूप से आप स्वीकार नहीं पाते क्योंकि मेरे पास ऐसे दर्जन भर मृतक स्वयंसेवक परिवार के इंटरव्यू हैं।
मैं हर भाजपा समर्थक को, जो मुझे दिखाने के लिए मोहन जी का ‘हिन्दुओं को ठेका देने की आदत है’ वाला वीडियो चला रहे हैं, तार्किकता से शांत कर सकता हूँ। मुझे उसके लिए ‘संघ को जानने’ की आवश्यकता नहीं है।
मोहन भागवत संघ नहीं हैं। संगठन को दिशा देना उनका कार्य है। संघ में दर्जनों भागवत जी आएँगे, जाएँगे। जिस दिन संघ सुधार करना त्याग देगा, नेता के शब्दों को ब्रह्मवाक्य मान कर डिफेंड कराने के लिए कुतर्क गढ़ेगा, वह समाप्त हो जाएगा।
स्वयंसेवकों के साथ आपके अनुभव केवल अच्छे ही हो सकते हैं। क्या मैं ऐसे स्वयंसेवकों को नहीं जानता जो अच्छे हैं? बिलकुल हैं, कई बार लिखा-बोला भी है। बुरे भी हुए हैं। अब इसका क्या उत्तर देगा संघ कि द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित स्वयंसेवक को केशव कुंज में घुसने नहीं दिया गया?
जब-जब उनके कथन राजनैतिक होंगे, अनुचित लगेंगे, आलोचना होगी। यदि इस पद पर बैठा व्यक्ति आलोचना हैंडल नहीं कर सकता, तो दुर्भाग्य है। मोहन जी के वकील आप लोग क्यों बन रहे हैं? उन्होंने आपको बोला बचाव करने?
मैं अपनी औकात जानता हूँ: चैनल बंद करा दोगे, घर तुड़वा दोगे, केस लगा कर प्रताड़ित करोगे, जेल में डाल दोगे, चरित्र हनन कराओगे… या मरवा दोगे।
उससे होगा क्या? क्या दुनिया में ऐसा पहले नहीं हुआ? तंत्र ने जान नहीं ली क्या? बिलकुल ली है। एक और नाम जुड़ जाएगा। मैं स्वयं को इन्सिग्निफिकेंट मानता हूँ। औकात पता है इसलिए ही निश्चिंत रहता हूँ।
बाकी, मोहन जी ने मेरा खेत तो जोता नहीं, वैयक्तिक झगड़ा नहीं है। बंगाल के मृत स्वयंसेवक मेरे अपने नहीं थे, वो हिन्दू थे। हिन्दू होने के कारण, और अनभिज्ञता, अज्ञानता में संघ से आशा रखने के कारण, मैंने मोहन जी से वह पूछा। उत्तर दो कौड़ी का, अहंकार से भरा हुआ था। अनुचित था, कोई भी लॉजिक लगा लो।
UGC पर मोदी जी, उनका पूरा कैबिनेट, कार्यालय, सूचना-प्रौद्योगिकी सेल लगभग चुप रहा। चौदह दिन तक चूँ-चाँ नहीं। टीवी पर प्रवक्ता नहीं भेजे, कोई खंडन वाला मुख्यालयी प्रेस वार्ता नहीं। केवल चुप्पी।
आज एप्सटीन फाइल में नाम आया, कॉन्ग्रेस ने दो कौड़ी की बात का बतंगड़ किया, सीधे विदेश मंत्रालय द्वारा स्टेटमेंट लिखित में जेपेग फाइल के साथ आया। ट्विटर पर शेयर हुआ, हर प्रवक्ता बता रहा है कि कॉन्ग्रेस ***पा कर रही है।
सामान्य वर्ग के नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा कुढ़ रहा था, गरिया रहा था, उत्तर माँग रहा था… मोदी ने एक बार भी पूरे तंत्र के किसी भी हिस्से से कोई सहानुभूति नहीं दिखाई। केवल चुप्पी कि तुम साले थक कर बैठ जाओगे, तुम्हारी यही औकात है।
नरेन्द्र मोदी आपदा प्रबंधन दल यह जानता है कि नीतिगत विषयों से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत छवि है क्योंकि उसे बचाएँगे तब ही आगे की नीति बन पाएगी। तब ही बिहार की रैली में कुर्मी, कानू, मल्लाह, दुसाध, डोम, मुसहर, रविदास, बढ़ई, माली का नाम ले कर उसके परिजन होने की बात हो पाएगी।
सामान्य वर्ग, इनके स्कीम ऑफ थिंग्स में केवल टैक्सदाता है। टैक्सपेयर जब ‘टैक्सदाता’ हो जाता है तो उसमें एक देवत्व का भाव आ जाता है। मोदी जी ने ‘दाता’ लगा कर बहुत काटा है, यह हर दूसरे दिन स्पष्ट हो रहा है।
संभवतः, यह नीति देश के लिए बढ़िया हो, समाज के हर वर्ग (मायनस जेनरल) का सरकारी उत्थान हो रहा हो, मोदी क्लास अपार्ट और लेजेंडरी नेता हों, पर ‘दाता’ का धैर्य किसी दिन तो टूटेगा!
सामान्य वर्ग के दो तिहाई बच्चे शिक्षा लोन ले कर पढ़ाई कर रहे हैं, ये @narendramodi को नहीं दिखा। फीस में कोई छूट नहीं, बढ़ता ब्याज और सरकारी उपेक्षा में पिसता सामान्य वर्ग का बैल, देश की गाड़ी ढो रहा है। उसकी कमाई का दशांश भी यदि उसके भाई को मिल रहा है तो उसे मोदी की किसी निजी संपत्ति का हिस्सा मान कर ढोल पीटा जा रहा है।
अन्य वर्ग (अल्पसंख्यक सहित) के लोग शिक्षा लोन ले कर डिफॉल्ट कर दें, न चुकाएँ, कुछ विशेष नहीं होता, सामान्य वर्ग की कुर्की-जब्ती होती है। आगे वह कभी लोन लेने लायक नहीं रहता।
हर उद्यमी योजना, हॉस्टल, निःशुल्क कोचिंग, विशेष स्कूल-कॉलेज SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक के लिए क्यों? आरक्षण का तो समझ में आता है कि जब अवधारणा आई तो आर्थिक और जातिगत पिछड़ापन समानांतर ही था, पर अब इसे अन्य योजनाओं में जातिगत क्यों बनाया जा रहा है?
ये योजनाएँ तो संवैधानिक नहीं हैं, न कोई ऐसी बाध्यता है, फिर मोदी जी, जो विजनरी नेता हैं, उनकी सोच चुनावी संकुचन में डूबी क्यों है? यहाँ आप कोचिंग में आर्थिक मापदंड क्यों नहीं लगा पा रहे? क्योंकि जो बात ‘हिसाब चुकता’ करवाने वाले भाषण की प्रतिक्रिया से मिलने वाली किक में है, वो अन्यत्र नहीं।
नरेन्द्र मोदी की यह चुप्पी समाज को तोड़ने वाली है, हिन्दुओं को इस्लामी/वामपंथी फॉर्मूले से बाँटने वाली है। यह व्यक्ति आज भी चुप है, इसके पास सहानुभूति के शब्द नहीं हैं, इनके प्रवक्ता अभी भी सुप्रीम कोर्ट का नाम ले कर ‘जय मोदी, तय मोदी’ कह कर नाच रहे हैं।
ऐसी ‘छवि प्रबंधन’ का क्या लाभ जब समाज आपकी नीतियों से टूटने लगे?
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद महाराज शुक्रवार को अपने शिष्यों के साथ राष्ट्रवाणी के मुख्यालय आये --- उनके साथ धर्म चर्चा सुखद रही ---@rashtravaaniIND
कुछ दिन पहले @RSSorg के एक व्यक्ति ने फोन किया कि मिलना है। मैंने कारण पूछा तो बोले कि संघ के बारे में बताना है। मैंने कहा कि जितना जानना है, जानता ही हूँ, आपका वैचारिक साथी ही हूँ, इससे अधिक जान कर क्या करना?
इन्सिस्ट करने लगे कि उनका काम है मिलते-जुलते रहना। आए और संघ के बारे में, सौ वर्षों का काम आदि बताया। इससे आगे उन्होंने कुछ मैग्जीन एवम् अन्य पत्रक दिए। इसमें भविष्य की योजनाएँ लिखी हुई थीं कि कैसे समाज को जोड़े चलना है। जातियों में विभाजन न हो, सब हिन्दू हैं आदि की बातें उस पत्रक में हैं।
आज UGC प्रकरण पर, न तो संघ बोल रहा है, न भाजपा के मुँह से कुछ निकल रहा है। इनके विद्यार्थी परिषद ने तो जो विष्ठा की है, वह अलग स्तर की है।
यही कारण है कि इन सबकी बातों से विश्वास उठता जा रहा है। जिन सवर्णों ने स्वतंत्रता के बाद से बारम्बार चाहे भूदान करना हो, आरक्षण का भार लेना हो, सब सहा है, उन्हें अब राजनैतिक रोटियाँ सेंकने के लिए घोषित अपराधी बताया जा रहा है।
सवर्णों ने ‘विकसित भारत’ का सपना देखा, उसको साकार करने के लिए विदेश से भारत आए, कई लोग ‘इंडिया स्टोरी’ में स्वयं को देख रहे हैं, इस नए भारत के निर्माण में वो कैसे सहयोग दें, सोच रहे थे, पर अब दिख रहा है कि @narendramodi की यह बात केवल और केवल शाब्दिक हैं, जिसके लिए इनके पास कोई वास्तविक योजना नहीं है।
सत्तालोलुपता ने इन्हें अंधी चालें चलने को विवश किया है। ये टेस्टिंग करते-करते बहुत आगे चले गए। भले ही यह आंदोलन समाप्त हो जाए, पर सवर्णों का टूटा विश्वास वापस नहीं आएगा। कई लोग बस इस प्रतीक्षा में हैं कि मोदी कुछ तो कर दे, पर हम सब जानते हैं कि अम्बेडकर को बाप बना कर चलने वाली पार्टी जो भी करेगी, टट्टी ही करेगी।
ओह! भाजपा लगी हुई है कि संसद सत्र के आरंभ का वीडियो सोशल मीडिया पर चल जाए, पर हो नहीं पा रहा।
जो तुम्हारे लिए निःस्वार्थ भाव से लिखते-बोलते थे, तुमने उसका उपहास किया, ताने कसे, बिका हुआ कहा, कॉन्ग्रेसी और डीप स्टेट एजेंट कहा, तो अब कौन लिखेगा तुम्हारे लिए?
तुम्हारे किस नेता/प्रवक्ता की (अपवादों को छोड़ कर) रत्ती भर की भी ऑर्गेनिक रीच है? जीवन मोदी जी के रीपोस्ट, वीडियो क्लिप्स के पोस्ट, पुष्पगुच्छ के आदान-प्रदान के फोटो लगाने में बीत रहा है, अब तुम्हें भ्रम है कि लोग तुम्हारे साथ हो लें?
‘वंदे मातरम्’ का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है, हम विपक्ष को पेलेंगे, पर आज नहीं। आज हमारे बच्चों के भविष्य की लड़ाई है जो तुम पतितों ने हमारे ऊपर लाद दी है। तुम चला लो नैरेटिव टुटपुँजिए औसत बुद्धि आइटी सेल के सहारे।
KGMU में जो हुआ वह केवल एक आपवादिक स्थानीय समस्या नहीं है बल्कि एक मजहबी सड़ाँध हैं जिसकी जड़ में काफिरों को हेय देखने की बात है। एक ऐसी यूनिवर्सिटी में #LoveJihad, राजनैतिक भ्रष्टाचार और आतंकवाद की पटकथा पर क्रियान्वयन होता दिख रहा है।
आरंभ तो एक मुसलमान डॉक्टर द्वारा हिन्दू स्त्रियों के साथ किए जा रहे दुष्कृत्य के बाहर आने से हुआ, पर परतें उतरने लगीं तो एक अभिजात्य मुस्लिम वर्ग द्वारा हॉस्पिटल और अपने हाय स्टेटस के प्रयोग से पूरे राष्ट्र में आतंकी हमलों की रूपरेखा सामने आने लगी।
योगी आदित्यनाथ ने प्रत्यक्ष संज्ञान लेते हुए डॉ रमीजुद्दीन के द्वारा पीड़ित महिला से बात की और शोषण, ब्लैकमेल, मतांतरण जैसे विषयों की गहन जाँच का आश्वासन दिया। STF अब #KGMU के प्रकरण पर विस्तार से, हर कोण से दृष्टि रखते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाएगी।
हम हर दिन इस तरह के घटिया लोगों के बीच जीवन जीने को विवश हैं। हर सार्वजनिक प्रयोग की संस्था या स्थान दूषित किए जा चुके हैं। इसका निराकरण आवश्यक है।