आरक्षण की कुछ प्रमुख नकारात्मक बातें:मेरिट का नुकसान: आरक्षण की वजह से कई बार कम अंक वाले उम्मीदवार चयनित हो जाते हैं, जबकि ज्यादा योग्य जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार छूट जाते हैं। इससे शिक्षा और नौकरियों में गुणवत्ता प्रभावित होती है।
रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन: जनरल कैटेगरी के छात्रों/उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ बहुत ऊँची होती है। एक ही परीक्षा में आरक्षित वर्ग के लिए कम अंक में सीट मिल जाती है, जबकि जनरल वाले ऊँचे अंक पर भी बाहर हो जाते हैं। यह बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ लगता है।
जातिवाद को बढ़ावा: आरक्षण जाति के आधार पर बाँटता है, जिससे समाज में जाति की भावना और मजबूत होती है। योग्यता और आर्थिक स्थिति के बजाय जाति प्राथमिकता बन जाती है।
असली गरीबों तक मदद नहीं पहुँचना: आरक्षित वर्ग के अंदर भी क्रीमी लेयर वाले लोग फायदा उठा लेते हैं, जबकि वास्तव में गरीब और पिछड़े लोग वंचित रह जाते हैं। कई बार आरक्षण का फायदा उन्हीं परिवारों को बार-बार मिलता है।
दक्षता और प्रदर्शन पर असर: कुछ क्षेत्रों में आरक्षण की वजह से कार्यकुशलता कम होने की शिकायतें आती हैं, क्योंकि चयन पूरी तरह मेरिट पर आधारित नहीं होता।
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@PrimalParmar@shuklajimp Kitne bhi bol le faltu ka sachchai nhi chhipne wali
Ek gaw me ek basti thi
Wha randiya sasti thi
Jaha bhi dalo hasti thi
Tu bhi bahut has rha tu bhi usi gaw se lg rha hai areee sorry sorry bhul hi gya hu av to upr bola tha 4 baap hai tere to obvious hai ki usi gaw ka hai
Arakshan walo, ek baat samajh lo —
Mere post se Tumhari “gand” isliye jalti hai kyunki tumhein pata hai ki merit ke maidan mein tum haar jaate ho. Isliye quota, relaxation, free seat, free job, free promotion… sab maangte ho.
General + OBC wale khush isliye hote hain kyunki unhein roz dikhta hai:
90% marks laane wale general/OBC ko seat nahi milti
40-50% laane wale ko reserved seat mil jaati hai
UPSC, NEET, JEE, SSC, Bank, Judiciary… har jagah same scene
Phir bhi “equality” ka raag alaapte ho
Sach yeh hai:
Arakshan ab “upliftment” nahi, political vote bank aur permanent crutches ban gaya hai.
Jo 75 saal se crutches pe chal raha hai, usko ab crutches hatao toh giraan lagta hai — isliye “gand jalne” ka drama.
General + OBC log khush isliye hain kyunki unhein pata hai:
Desh merit se chalta hai, quota se nahi.
Agar kal se pure merit se selection hone lage toh dekho kaun kitna “capable” reh jaata hai.
Jo log sach mein padh-likh ke aage badh rahe hain (chahe kisi bhi category ke hon), unka respect.
Jo sirf caste card dikha ke seat-job maang rahe hain, unki gand jalna hi chahiye.
#WeStandWithDelhiPolice
#Fold8InANewShape
#1daytogo
पप्पू यादव
#GalaxyF70ProLaunch3Aug
#Newtons3rdLaw #DelhiRiots #BoxOffice
आरक्षण की वजह से मेरिट का नुकसान होता है। कई बार कम अंक वाले उम्मीदवार चुन लिए जाते हैं जबकि ज्यादा योग्य जनरल और ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवार भी प्रभावित होते हैं। जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए कट-ऑफ बहुत ऊँची रहती है और वे बिना किसी कोटे के पूरी मेरिट के आधार पर मुकाबला करते हैं, वहीं ओबीसी में भी क्रीमी लेयर वाले लोग बाहर हो जाते हैं लेकिन असली जरूरतमंदों तक फायदा पहुँचाने की व्यवस्था बनी रहती है। एक ही परीक्षा में आरक्षित वर्ग के लिए कम अंक पर सीट मिल जाती है, जबकि जनरल वाले ऊँचे अंक लाने के बावजूद छूट जाते हैं और ओबीसी के गरीब वर्ग को आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
आरक्षण जाति के आधार पर बाँटता है जिससे समाज में जाति की भावना और मजबूत होती है। योग्यता और आर्थिक स्थिति के बजाय जाति प्राथमिकता बन जाती है। जनरल कैटेगरी के गरीब या मध्यम वर्ग के युवा जाति के आधार पर कोई राहत नहीं पाते, जबकि ओबीसी आरक्षण ने कई परिवारों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आगे बढ़ने का मौका दिया है। आरक्षित वर्ग के अंदर भी कई बार उन्हीं परिवारों को बार-बार फायदा मिलता रहता है, वहीं ओबीसी में क्रीमी लेयर का प्रावधान होने से अपेक्षाकृत सम्पन्न लोग बाहर रहते हैं।
ईडब्ल्यूएस जैसी व्यवस्था जनरल कैटेगरी को थोड़ी मदद करती है लेकिन वह भी सीमित है। ओबीसी समाज में आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने में आरक्षण मददगार साबित हुआ है, लेकिन इसे समय-समय पर समीक्षा के साथ रखना चाहिए। मेरिट, आर्थिक स्थिति और वास्तविक पिछड़ेपन को ज्यादा महत्व देना चाहिए बजाय सिर्फ जाति के।
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