यारों के यार , दोस्तों के दोस्त , जनता के चहेते , घमंडरहित नेता उमाशंकर सिंह जी को बलिया ने दी अंतिम विदाई , शानदार पारी खेलकर पंचतत्व में विलीन हुए उमाशंकर सिंह , शत शत नमन 🙏
अमेरिका में मेरिट से काम चल जाता है। भारत में मेरिट को व्यवस्था के साथ ही चमचई, चापलूसी, चालाकी, कुटिलता, बेईमानी, सिफारिश, भेदभाव, भाई-भतीजावाद वगैरह से भी टक्कर लेनी पड़ती है।
पापा ,आज आपको गोलोकवासी हुए 1 साल हो गया । आपके बिना यह जीवन अधूरा सा लगता है । एक पिता का साया बहुत बड़ा सहारा होता है आप भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं , लेकिन आपकी यादें , आपका प्यार ,आपका आशीर्वाद और आपके दिये गए संस्कार हमेशा हमारे साथ हैं।💐😭🙏
83 हजार शाखाएँ, 60 लाख स्वयंसेवक, एक लाख 77 हजार सेवा कार्य, और न जाने कितनी संस्थाएँ - सभी एक दिशा में कार्य करते हैं। यह अभूतपूर्व है। आज़ादी से पहले से लेकर देश में हुए भूकंप, सुनामी और न जाने कितनी चुनौतियों के समय आरएसएस सदैव देश और समाज के साथ खड़ा रहा है। - श्री कुमार मंगलम बिरला जी
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कुछ ऐसे स्वास्थ्य तथ्य जो सचमुच चौंकाने वाले हैं और वैज्ञानिक रूप से सही भी हैं:
1. आपकी कमर का आकार कई बार आपके वजन से ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है। सामान्य वजन वाला व्यक्ति भी पेट के अंदर जमा चर्बी (Visceral Fat) के कारण मधुमेह और हृदय रोग का शिकार हो सकता है।
2. रात में 6 घंटे से कम सोना कई देशों में धूम्रपान जितना बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम माना जाता है। लगातार कम नींद लेने से हृदय रोग, मोटापा और याददाश्त की समस्याएँ बढ़ती हैं।
3. दाँतों और मसूड़ों की बीमारी का संबंध केवल मुँह से नहीं है। मसूड़ों की गंभीर सूजन हृदय रोग, स्ट्रोक और मधुमेह के खराब नियंत्रण से जुड़ी पाई गई है।
4. लिवर 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है, जिनमें विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करना, पित्त बनाना और ऊर्जा का भंडारण शामिल है।
5. मांसपेशियाँ केवल ताकत के लिए नहीं होतीं। वे शरीर की “मेटाबॉलिक बैंक” हैं, जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और उम्र बढ़ने की गति को धीमा करने में मदद करती हैं।
6. 30 मिनट की तेज़ चाल से की गई सैर कई दवाओं जितना प्रभावशाली न सही, लेकिन दीर्घकाल में अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है।
7. प्यास लगना इस बात का संकेत है कि शरीर पहले से ही थोड़ा निर्जलित (Dehydrated) हो चुका है।
8. उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वर्षों तक कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन अंदर ही अंदर हृदय, मस्तिष्क और गुर्दों को नुकसान पहुँचता रहता है।
9. जिगर (Liver) शरीर का एकमात्र बड़ा अंग है जो स्वयं को काफी हद तक पुनर्जीवित (Regenerate) कर सकता है।
10. अत्यधिक बैठना एक स्वतंत्र स्वास्थ्य जोखिम है। यदि कोई व्यक्ति रोज़ व्यायाम करता है लेकिन बाकी दिन लगातार बैठा रहता है, तब भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
11. हँसने से तनाव हार्मोन कम होते हैं और रक्त वाहिकाएँ कुछ समय के लिए फैल जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह बेहतर हो सकता है।
12. आपका मस्तिष्क शरीर के कुल वजन का लगभग 2% है, लेकिन आराम की अवस्था में भी शरीर की लगभग 20% ऊर्जा खर्च करता है।
13. भारत में विटामिन D की कमी धूप वाले क्षेत्रों में भी बहुत आम है। केवल धूप उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं; जीवनशैली, कपड़े और बाहर बिताया गया समय भी महत्वपूर्ण हैं।
14. बहुत से लोगों को पहला हार्ट अटैक आने से पहले कोई चेतावनी लक्षण नहीं मिलता। इसलिए नियमित जाँचें महत्वपूर्ण हैं।
15. उम्र बढ़ने का सबसे बड़ा कारण केवल समय नहीं, बल्कि कोशिकाओं में होने वाला लगातार सूक्ष्म नुकसान (cellular damage) है, जिस पर खान-पान, व्यायाम, नींद और धूम्रपान का बड़ा प्रभाव पड़ता है।
और एक रोचक तथ्य:
आपका शरीर हर सेकंड लगभग 20–25 लाख नई लाल रक्त कोशिकाएँ बनाता है। यानी जिस समय आपने यह वाक्य पढ़ा, तब तक लाखों नई रक्त कोशिकाएँ बन चुकी थीं।
क्या अपर्णा… तुमसे रोया भी ना गया !
अपर्णा यादव अपना चेहरा अपने दिवंगत पति से 90 डिग्री पूर्व की ओर रखकर...18 के डेसिबल पर चीखी होतीं...2 मिनट 53 सेकेंड तक आंखो से 5 मिलीलीटर आंसू निकाले होते...तो शायद वो आदर्श पत्नी होती।
या क्या पता इससे भी कुछ और नपा तुला तय है जो उन्हें करना चाहिए और वो नहीं कर पाई इसलिए वो आदर्श पत्नी नहीं रह गईं।
मुझे डर है उन पर सवाल उठाने वाले कहीं अपने घरों में परिजनों की मृत्यु की मॉक ड्रिल्स ना करवाते हों...ताकि सब उनके तय हिसाब से हो। पर ईश्वर के तय हिसाब का आज तक कौन हिसाब लगा पाया है।
और आपके घर की मृत्यु पर आपके परिजन आपके हिसाब से रोएंगे ना। अपर्णा यादव आपके फूफा की मृत्यु के हिसाब से कैसे आपकी भूमिका निभा सकती हैं? उनसे ये अपेक्षा क्यों?
कई लोग सवाल उठा रहे हैं जब पति बीमार थे तो वो असम क्यों गई…यहां क्यों गई… वहां क्यों गई? बड़ी साधारण सी बात है कि वो पत्नी और मां होने के साथ ही महिला आयोग की अध्यक्ष भी हैं, बीजेपी की नेता भी हैं...वो असम इसीलिए गईं क्योंकि उन्हें ये दायित्व भी निभाना था।
गिद्ध की तरह स्क्रूटनी पर बैठे समाज की जींस कभी मंदिरा बेदी की जींस से मैच नहीं खाती इसलिए वो कहता है कि उन्हें अपने पति के अंतिम संस्कार पर जींस नहीं पहननी चाहिए थी।
अपर्णा यादव महिला आयोग की अध्यक्ष हैं। जब उनके शोक पर सवाल उठ रहे हैं तो वो समझ सकती हैं उन्हें कैसे समाज से महिलाओं की रक्षा के लिए...उनके कल्याण के लिए... अपनी आवाज उठानी है।
दरअसल पति के जाने पर छाती पीटती औरतें इस समाज के लिए एक सुकून होती हैं...आश्वासन होती हैं। घूंघट के पीछे गश खाती रिरियाती औरतें समाज को उसके प्रति बेचारगी से भर देती हैं।
लेकिन बड़ा डराती है समाज को फिर से उठ खड़ी होती...उसके खांचे को मानने से इनकार करने वाली, उसकी बेड़ियों में ना बंधने वाली औरतें।
याद है आपको...
पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी की 29 साल की पत्नी ऐशान्या को कहना पड़ा...बस मैं ये चाहती हूं कि अब मैं कभी हंसू तो लोग ये ना कहें कि बताओ इसके पति की तो हत्या हो गई थी और ये हंस रही है।
बड़ी साधारण बात है। दुख दुख होता है। कोई छाती पीट के रो लेता है कोई पथराई आंखो के पीछे सब सोख लेता है। निजी दुख पर किसी के लिए परफार्म नहीं करना होता और कैमरे के लिए तो हरगिज नहीं।
उसे रोने दीजिए , समझने दीजिए , संभलने दीजिए, संभालने दीजिए, दोबारा चलने दीजिए.. पुरुष के साथ भी तो आप ऐसा ही करते हैं ना..
पत्नी की मृत्यु पर अगर पति विधुर होता है तो पत्नी भी पति की मृत्यु पर विधवा ही होती है अपाहिज नहीं।
संवेदना की स्थिति में पुरूष को भी कंधा चाहिए होता है स्त्री को भी कंधा ही चाहिए होता है गोद नहीं।
जब आप एक स्त्री को ऐसे हालात से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें तो नीयत इतनी साफ रखे कि वो आगे बढ़े तो आगे आकर खुद ही ना खड़े हो जाएं।
बाकी हाय हाय बेचारी की उपमा वाली स्त्री आत्मनिर्भर होने के बाद कहलाती तो बड़ी तेज ही है।
इसलिए स्त्री का तेज सहने की क्षमता रखने वाला समाज बनिए। राजा राम मोहन राय और ईश्वर चंद विद्या सागर की आत्मा को भी शांति मिलेगी।
@aparnabisht7
पहली बार गृहमंत्री अमित शाह की आंखों में आंसू!
"हमारे 321 देवतुल्य कार्यकर्ताओं ने भाजपा के लिए अपनी जान गंवाई है।
2016 में हम 3 थे, 2021 में 77 थे और 2026 में हमारा मुख्यमंत्री बनने जा रहा है।
उन सभी 321 कार्यकर्ताओं को और उनके परिजनों को मैं आज नमन करता हूं।"
"ऋणं याञ्च्या च वृद्धत्वं जारचोर दरिद्रता।
रोगाश्च भुक्तशेषश्चाप्यष्ट कष्टाः प्रकीर्तिताः॥"
अर्थात - "ऋणी होना, भिखारी होना, बुढ़ापा, किसी विवाहिता स्त्री का प्रेमी होना, चोर होना, दरिद्र होना, रोगी होना तथा उच्छिष्ट भोजन पर निर्भर रहना, ये आठ परिस्थितियां कष्टकर कही जाती हैं ।"
#MondayThoughts
स्मार्ट लोग जिन 5 नियमों पर चलते हैं
1. मर्फी नियम - जिससे डरते हो, वही होने लगता है।
2. किडलिन नियम - समस्या लिखो, आधी हल हो जाती है।
3. गिल्बर्ट नियम - काम लिया है तो सही तरीका ढूंढना आपकी जिम्मेदारी है।
4. विल्सन नियम - ज्ञान पर ध्यान दो, पैसा खुद आएगा।
5. फॉकलैंड नियम - जरूरी न हो, तो निर्णय मत लो।
अपने शरीर के ज़रिए अपनी भावनाओं को कैसे नियंत्रित करें
1. तनाव में हों = दौड़ने जाएँ
2. दुखी हों = पुश-अप्स करें
3. ज़्यादा सोच रहे हों = कुछ लिखें
4. आलस आ रहा हो = अपना फ़ोन बंद कर दें
5. घबराए हुए हों = ध्यान करें
6. थके हुए हों = ठंडे पानी से नहाएँ
7. पूरी तरह थक चुके हों = टहलने जाएँ
8. गुस्सा आ रहा हो = वज़न उठाएँ
9. उदास महसूस कर रहे हों = किसी हरी-भरी जगह पर जाएँ
10. विचारों से घिरे हुए हों = पेंटिंग करें
11. बेचैन हों = कोई आध्यात्मिक अभ्यास करें
12. ध्यान न लग रहा हो = आराम करें
हर पुरुष को ये 12 फ़िज़िकल टेस्ट ज़रूर करने चाहिए:
1. 1.5 km की दौड़ 8–9 मिनट से कम समय में पूरी करें।
अगर आप इसमें फेल हो जाते हैं, तो आपको अपनी फ़िटनेस पर काम करने की ज़रूरत है।
2. 25 सही पुश-अप्स।
छाती ज़मीन को छूनी चाहिए—कोई चीटिंग नहीं।
3. 8–10 पुल-अप्स।
कंट्रोल्ड मूवमेंट, शरीर हिलना नहीं चाहिए।
4. ज़मीन पर बैठें और बिना हाथों का इस्तेमाल किए वापस खड़े हो जाएँ।
यह आपको अपनी असलियत दिखाता है—ज़्यादातर लोग ऐसा नहीं कर पाते।
5. 90 सेकंड का प्लैंक।
कोर स्थिर रहना चाहिए; शरीर काँपना नहीं चाहिए।
6. 30 डीप स्क्वैट्स (सिर्फ़ अपने शरीर के वज़न के साथ)।
पूरी रेंज ऑफ़ मोशन, कंट्रोल्ड तरीके से।
7. अपने पैरों के पंजों को छुएँ और 10 सेकंड तक उसी पोज़िशन में रहें।
यह आपकी मोबिलिटी और कंट्रोल को टेस्ट करता है।
8. पुल-अप बार पर 45–60 सेकंड तक लटके रहें।
यह आपकी पकड़ और कंधों की ताक़त को टेस्ट करता है।
9. बिना थके 10,000 कदम चलें।
फ़िटनेस के लिए यह कम से कम ज़रूरी पैमाना है।
10. बिना रुके 20 बर्पीज़ करें।
यह आपकी सहनशक्ति का असली टेस्ट है।
11. वज़न उठाएँ (हर हाथ में 15–20 kg) और 30 सेकंड तक उसे पकड़े रहें।
यह आपकी असली फ़ंक्शनल ताक़त को दिखाता है।
12. आँखें बंद करके एक पैर पर 30 सेकंड तक संतुलन बनाए रखें। यह आपकी स्थिरता और कंट्रोल को टेस्ट करता है।
SSC CGL 2025 में सफलता का परचम लहराने वाले सभी CHAMPIONS को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ, आपकी इस शानदार मेहनत ने सच में कमाल कर दिया है!
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