Dalit voice from London. ✊🏽🙏
A UK-based Ambedkarite group from SOAS University united to raise its voice for justice over institutional murder of Sahil Wakode.
The entire diaspora should raise this issue with international human rights forums.
भारत बुद्ध का देश है।
कश्मीर हो या केरल, या देश का कोई अन्य हिस्सा, कहीं भी खोदिए, बुद्ध ही मिलेंगे। क्योंकि बुद्ध ही भारत का सत्य हैं, बाकी सब झूठ है। दुनिया में भारत को लोग बुद्ध से जानते हैं।
उत्तर प्रदेश में:
अगर सपा सत्ता में आती है, तो एक यादव मुख्यमंत्री बनेगा।
अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो एक ठाकुर मुख्यमंत्री बनेगा।
सभी महत्वपूर्ण पदों पर ब्राह्मणों, मुसलमानों और दलितों का प्रतिनिधित्व लगभग शून्य है।
पारंपरिक रुझानों की तुलना में विधायकों की संख्या भी कम हो रही है।
वे अपने वोट बांट देते हैं और छोटी जातियां उन पर शासन करती हैं।
उन्हें छोटे-छोटे पदों के लिए भी जाकर भीख मांगनी पड़ती है।
मैं समझ नहीं पाता कि जब आप जानते हैं कि बिना एकजुट हुए वास्तविक सत्ता नहीं मिल सकती, तो फिर यह हिचकिचाहट क्यों...
आरक्षण एक संवैधानिक मुद्दा है और विभिन्न समूहों को इसे अदालतों पर छोड़ देना चाहिए।
ब्राह्मणों, दलितों और मुसलमानों को उत्तर प्रदेश में एक साथ आना चाहिए और अपने भविष्य का निर्धारण करना चाहिए ताकि उनकी आने वाली पीढ़ियों को इससे लाभ मिल सके।
विचारधाराओं में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन मतभेदों के कारण अन्य छोटी जातियों को आप पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
सोचिए... मैं आपका भाई हूं जो आपको उत्तर प्रदेश की राजनीति के असली अंतर का एहसास कराने की कोशिश कर रहा हूं।
यह सीजेपी धरना और ये सब बातें बकवास हैं और इनका कोई मूल्य नहीं है।
एक साथ आएं और वास्तविक सत्ता में हिस्सेदारी प्राप्त करें।
उत्तर प्रदेश के चार स्पेशल मेडिकल कॉलेजों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में लिख दिया कि अगर @myogiadityanath सरकार इस मामले में सीरियस होती तो अब 2006 के आरक्षण अधिनियम में संशोधन करके इस विवाद का समापन कर देती।
पिछले एक साल से हम सब यही माँग कर रहे हैं
रेलवे के कर्मचारियों को वर्तमान में बोनस 78 दिन के बेसिक सैलरी मिलता है
और उसका कैलकुलेशन 6वें वेतन आयोग के हिसाब से होता है l
7000 मिनिमम सैलरी यानी कि एक दिन का 230.14x 78= 17951 रुपया बोनस बनता है l
अब रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि बोनस का कैलकुलेशन 7वे वेतन आयोग के हिसाब से होना चाहिए यानी
18000 को बेस मानकर होना चाहिए चाहिए इस हिसाब से 46,159 रुपया होता है l
रेलवे कर्मचारियों के सपोर्ट में..1/2
Perhaps @elonmusk doesn’t know that children’s education is a forgotten priority in India. Millions of children study in schools without internet access or devices to connect to it. Will he offer schools in India a free trial of @Starlink if it is permitted to operate in India?
मान्यवर साहब कांशीराम जी को नमन।।
आज "Pay back to Society" के अंतर्गत काफी कार्यक्रम है। जिनमे मान्यवर साहब के सन्देश, वर्तमान की चुनौतीया व उनसे निपटने के लिए क्या क्या कार्य किए जाने चाहिए इनपर संगोष्ठीयो का आयोजन किया जाएगा।
हमारा हमेशा सन्देश रहता है कि चुनाव परिणाम किसी भी प्रकार से रहे, उनसे निराश होकर सामाजिक कार्यक्रम से बेरुखी मत दिखाना क्योंकि यह फिर से आपको खिंचकर वापस ले जाएगा।
भारत मे केवल दो ही विचारधारा ने जन्म लिया है।
1.आरएसएस विचारधारा ने
2.बहुजन विचारधारा ने
बाकी समाजवादी, कम्युनिज्म वग़ैरह विदेश से आयातित हुई और उसमे मिलावट करके उसके मुख्य कॉन्सेप्ट को ही खत्म कर दिया गया। इसलिए भारत मे यह केवल नांममात्र की विचारधाराए है। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के 99.99% लोगो को "समाजवाद" का अर्थ परिभाषा तक नही पता है। उसी प्रकार भारतीय कम्युनिज़्म एक फर्जी शाखा बनकर रह गयी, जिसमे उन्ही वर्गों का कब्जा हो गया जिनके खिलाफ क्रांति होनी थी।
आरएसएस को डायरेक्ट सत्ता मिलने में करीब 75 साल लगे, बहुजन आंदोलन ने एकाएक मात्र 20 सालो में सत्ता तक का सफर तय कर लिया था। जब तक राजनैतिक सत्ता नही मिली तब तक सामाजिक तौर लर संगठन को मजबूत करते रहे। दादा ने शुरू किया, पोते के समय सत्ता मिली। इन दोनों के मध्य आरएसएस के लोगो ने संघर्ष किया है।
इसलिए बहुजन आंदोलन हो या कोई अन्य वो सफल होने में समय लेता है। बहुजन आंदोलन की यह ही सफलता है कि;..
1.कॉंग्रेस को बाबा साहब, बहुजन, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी की चर्चा करनी पड़ रही है। जिसकी जनसँख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी जो कि मान्यवर साहब का नारा था उसे परिवर्तन करके बोलना पड़ रहा है।
2.आरएसएस ने तो "गाँव चलो" अभियान मान्यवर कांशीराम के "कैडर कैम्प" से प्रेरणा लेकर ही शुरू किया जिससे लोगो से कनेक्ट हो सके।
3."बहुजन" का नाम "पीडीए" करके सपा-कोंग्रेस को चुनाव लड़ना पड़ा।
इसलिए मान्यवर साहब कांशीराम भारत के एक ऐसे महापुरुष है जिन्होंने भारत की राजनीति बदल दी, जो राजनीति केन्द्रीयकृत थी और कोंग्रेस के इर्द गिर्द घूमती थी उसका विकेंद्रीकरण करके गरीब, मजदूर जनता को महत्वपूर्ण बनाकर उसके पास तक ला दी। मान्यवर कांशीराम साहब ने ऐसी विचारधारा का मिश्रण भारतीय राजनीति में कर दिया है जो सीधा अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक को महत्वपूर्ण बनाता है।
इसलिए बहुजन आंदोलन चलते रहना चाहिए। जड़ो तक पहुचा जाए। "Pay back to society" को ध्यान में रखा जाए। यह ही एकमात्र हथियार है जिससे अगली पीढियां तक लाभ ले सकती है।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP
BSP में वापस लिए जाने और नेशनल कन्वीनर बनाए जाने पर @AnandAkash_BSP ने बहनजी @Mayawati का आभार व्यक्त किया है।
साथ ही लिखा है-आपने मुझे बहुत कुछ सिखाया है और सबसे बड़ी सीख यही है कि मूवमेंट किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ा है। बाबा साहब और मान्यवर कांशीराम ने जो रास्ता दिखाया उसपर आपने पूरा जीवन लगा दिया और अब उसी रास्ते पर चलना मेरा सौभाग्य है।
आपने मुझपर भरोसा किया है तो अब अपने काम के जरिए इस भरोसे को सही साबित करना मेरी जिम्मेदारी है।
आदरणीय और 'बुआ मां' साथ में लिखकर आकाश ने सम्मान के साथ अपनापन दिखाया था। बहनजी ने आशीर्वाद देकर जवाबी स्नेह दिखाया। मगर दोनों लोगों ने एक ही बात रिपीट की है कि बाबा साहब का मिशन किसी भी व्यक्ति से बड़ा है।
ये म्यूचुअल मैच्योरिटी है, बेहतरीन समझदारी है।
प्राइवेट सेक्टर कंपनियों में आरक्षण का मतलब सिर्फ नौकरियां हासिल करना नहीं है, बल्कि प्राइवेट सेक्टर में फैले भयंकर जातिवाद को जड़ से खत्म करना है। ऐसा करते वक़्त पूरा प्राइवेट सेक्टर खत्म हो जाए तो चलेगा लेकिन जातिवाद का कोई अंशमात्र तक नहीं बचाना चाहिए। बिना नौकरियों के भी बहुजन समाज जी सकता है। नौकरियां मिलना मकसद नहीं है। जातिवाद खत्म करना असली मकसद है।
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
बिना आरक्षण की 158 साल पुरानी TATA कंपनी 9 साल पुरानी कंपनी TikTok, 29 साल पुरानी कंपनी Netflix से छोटी कंपनी है और 23 साल पुरानी कंपनी Tesla से TATA 5 गुना छोटी कंपनी है। TATA कंपनी a to z, सारे बिज़नेस करती है और TikTok, Netflix मनोरंजन के बिज़नेस में है। Tesla सिर्फ़ कार बनाती है।
TATA कंपनी में 158 साल से आरक्षण नहीं है, a to z धंधे करती है, लेकिन 9 साल पुरानी TikTok कंपनी से छोटी कंपनी है। इसे ही भारत में मेरिट कहते है।
TATA कंपनी में शायद ही SC, ST, OBC लोग उच्च पदों पर मिलेंगे लेकिन देश के पिछड़े होने का सारा दोष आरक्षण और SC, ST, OBC मढ़ दिया जाता है। यही हाल देश की दूसरी कंपनियों का है।
मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी आइसक्रीम की कंपनी खोल रही है। आगे जाकर वह हाउस कीपिंग की कंपनी खोल सकती है।
कमजोर पैरवी
इच्छाशक्ति का न होना।
ऊपर से साथ मे दिखना, अंदर से विरोध में
इन सभी राज्य सरकार के गुणों कर कारण बहनजी द्वारा बनाये गए 4 मेडिकल कॉलेज के हाईकोर्ट के निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने जांरी रख दिया है।।
एससी को 200 शीट का नुकसान अनुसुचित जातीयो को मुबारक हो क्योंकि उनके टारगेट पर केवल;
बसपा हाय हाय
बहनजी हाय हाय
रहता है। जिससे बसपा सत्ता से दूर रहे।
उन्हें;
जीरो फीस पर एडमिशन
स्कॉलरशिप सही समय पर आना
सरकारी ठेकों में एससी आरक्षण
जैसी लाभकारी योजनाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण "मायावती हाय हाय, बसपा हाय हाय" मुद्दा है।
एससी आरक्षण ही नही बल्कि कुछ मिली सुविधाएं तक हमेशा निशाने पर रही है। जिसमे एक बड़ा हथियार "वर्गीकरण स्कीम" है। जो अंतिम रूप से आरक्षण खत्म करेगी क्योंकि जब डंडों की गठरी खोलकर एलग अलग कर दी जाएगी फिर मजबूती खत्म हो जाएगी। सरकारों कर सामने दवाबकारी समूह नही रहँगे तो सरकारें क्यो सुनेगी?
वैसे;
"वर्गीकरण वाले किसमे वर्गीकरण करेंगे? क्योंकि उन्होंने 200 शीट ही खत्म करवा दी"
जब 200 शीट ही खत्म हो गयी तो इसमे कैसे वर्गीकरण होगा"
देखा जाए तो भाजपा व कोंग्रेस सरकारे एससी की अधिकतर जातीयो में यह एससी की अलग अलग जातीयो में अफवाह फैलाकर की "दुसाध/पासी//महार/चमार हिस्सा खा गए" और इसमे उलझाकर इसी तरह उनशीट को खत्म करते रहे जिन पर वर्गीकरण की मांग की जाती है हो । एससी की एक सैकड़ो जातीयो में से केवल एक या दो जातिया जो जनसँख्या में भी काफी कम है, उनका सहारा लेकर वर्गीकरण करो, वर्गीकरण करो का राग करवाते रहते है।
आरक्षण शायद ही अब लम्बा चल सके। सुब्रह्मण्यम स्वामी का कहना बिल्कुल ठीक था कि;
"हम आरक्षण नाम खत्म नही कर सकते लेकिन इसे उस स्तर पर ले जाएंगे जँहा इसका होना या न होना बराबर होगा"
जबकिं इस समय एससी/एसर्टी/ओबीसी जातीयो को "प्राइवेट सेक्टर" में आरक्षण के लिए लड़ना चाहिए था।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati
Bhai how can they drag the case like this.
Arrest to karo bhai..
You can clearly see how biased the police is in this case.
A prominent MP is insulted and abused.
The Dalit MP files an FIR
But still no further action.
Can we expect a free and fair chargesheet from such police force is the question ???
Police in India has been used to suppress the voice of Dalits.
A few days back a Dalit boy did some small mistake in Tamilnadu.
But after they came to know that he was a dalit, the police tortured him so much in custody that the boy died in custody.
A dalit will get a disproportionate punishment even for a small offence. You can also see the Sahil’s case in IIT Mumbai.
A Brahmin or other upper caste will be saved or pardoned even if they commit grave offences.
Now tell me is this
Rule by Constitution or
Rule by Manusmriti..,,