कल से मैं देख रहा हूं, हमारी पार्टी के निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में आ रही प्रतिक्रियाएं....उत्साहवर्धक भी, आलोचनात्मक भी..! आलोचनाएं स्वस्थ भी हैं, कुछ दूषित और पूर्वाग्रह से ग्रसित भी।
स्वस्थ आलोचनाओं का मैं हृदय से सम्मान करता हूं। ऐसी आलोचनाएं हमें बहुत कुछ सिखाती हैं, संभालती हैं। क्योंकि ऐसे आलोचकों का मकसद पवित्र होता है।
दूषित आलोचनाएं सिर्फ आलोचकों की नियत का चित्रण करती हैं। दोनों प्रकार के आलोचकों से कुछ कहना चाहता हूं।
पहले स्वस्थ आलोचकों से:- आपने मेरे उपर परिवारवाद का आरोप लगाया है।
मेरा पक्ष है कि अगर आपने हमारे निर्णय को परिवारवाद की श्रेणी में रखा है, तो जरा समझिए मेरी विवशता को। पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम जरुरी ही नहीं अपरिहार्य था। मैं तमाम कारणों का सार्वजनिक विश्लेषण नहीं कर सकता, लेकिन आप सभी जानते हैं कि पूर्व में पार्टी के विलय जैसा भी अलोकप्रिय और एक तरह से लगभग आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा था। जिसकी तीखी आलोचना बिहार भर में हुई। उस वक्त भी बड़े संघर्ष के बाद आप सभी के आशीर्वाद से पार्टी ने सांसद, विधायक सब बनाए। लोग जीते और निकल लिए। झोली खाली की खाली रही। शुन्य पर पहूंच गए। पुनः ऐसी स्थिति न आए, सोचना ज़रूरी था।
सवाल उठाइए, लेकिन जानिए। आज के हमारे निर्णय की जितनी आलोचना हो, लेकिन इसके बिना फिलहाल कोई दूसरा विकल्प फिर से शुन्य तक पहुंचा सकता था। भविष्य में जनता का आशीर्वाद कितना मिलेगा, मालूम नहीं। परन्तु खुद के स्टेप से शुन्य तक पहुंचने का विकल्प खोलना उचित नहीं था। इतिहास की घटनाओं से यही मैंने सबक ली है। समुद्र मंथन से अमृत और ज़हर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को तो ज़हर पीना ही पड़ता है। वर्तमान के निर्णय से परिवारवाद का आरोप मेरे उपर लगेगा। यह जानते/समझते हुए भी निर्णय लेना पड़ा, जो मेरे लिए ज़हर पीने के बराबर था। फिर भी मैंने ऐसा निर्णय लिया। पार्टी को बनाए/बचाए रखने की जिद्द को मैंने प्राथमिकता दी। अपनी लोकप्रियता को कई बार जोखिम में डाले बिना कड़ा/बड़ा निर्णय लेना संभव नहीं होता। सो मैंने लिया।
पूर्वाग्रह से ग्रसित आलोचकों के लिए बस इतना ही:-
"सवाल ज़हर का नहीं था, वो तो मैं पी गया ।
तकलीफ़ उन्हें तो बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया ।।"
अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए - विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने। इंतजार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे। अपने को साबित करने का। करके दिखाएगा। अवश्य दिखाएगा। आपकी उम्मीदों और भरोसा पर खरा उतरेगा।
वैसे भी किसी भी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या उसके परिवार से नहीं, उसकी काबिलियत और योग्यता से होना चाहिए।
आप सबों का आभार 🙏
कल से मैं देख रहा हूं, हमारी पार्टी के निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में आ रही प्रतिक्रियाएं....उत्साहवर्धक भी, आलोचनात्मक भी..! आलोचनाएं स्वस्थ भी हैं, कुछ दूषित और पूर्वाग्रह से ग्रसित भी।
स्वस्थ आलोचनाओं का मैं हृदय से सम्मान करता हूं। ऐसी आलोचनाएं हमें बहुत कुछ सिखाती हैं, संभालती हैं। क्योंकि ऐसे आलोचकों का मकसद पवित्र होता है।
दूषित आलोचनाएं सिर्फ आलोचकों की नियत का चित्रण करती हैं। दोनों प्रकार के आलोचकों से कुछ कहना चाहता हूं।
पहले स्वस्थ आलोचकों से:- आपने मेरे उपर परिवारवाद का आरोप लगाया है।
मेरा पक्ष है कि अगर आपने हमारे निर्णय को परिवारवाद की श्रेणी में रखा है, तो जरा समझिए मेरी विवशता को। पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम जरुरी ही नहीं अपरिहार्य था। मैं तमाम कारणों का सार्वजनिक विश्लेषण नहीं कर सकता, लेकिन आप सभी जानते हैं कि पूर्व में पार्टी के विलय जैसा भी अलोकप्रिय और एक तरह से लगभग आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा था। जिसकी तीखी आलोचना बिहार भर में हुई। उस वक्त भी बड़े संघर्ष के बाद आप सभी के आशीर्वाद से पार्टी ने सांसद, विधायक सब बनाए। लोग जीते और निकल लिए। झोली खाली की खाली रही। शुन्य पर पहूंच गए। पुनः ऐसी स्थिति न आए, सोचना ज़रूरी था।
सवाल उठाइए, लेकिन जानिए। आज के हमारे निर्णय की जितनी आलोचना हो, लेकिन इसके बिना फिलहाल कोई दूसरा विकल्प फिर से शुन्य तक पहुंचा सकता था। भविष्य में जनता का आशीर्वाद कितना मिलेगा, मालूम नहीं। परन्तु खुद के स्टेप से शुन्य तक पहुंचने का विकल्प खोलना उचित नहीं था। इतिहास की घटनाओं से यही मैंने सबक ली है। समुद्र मंथन से अमृत और ज़हर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को तो ज़हर पीना ही पड़ता है। वर्तमान के निर्णय से परिवारवाद का आरोप मेरे उपर लगेगा। यह जानते/समझते हुए भी निर्णय लेना पड़ा, जो मेरे लिए ज़हर पीने के बराबर था। फिर भी मैंने ऐसा निर्णय लिया। पार्टी को बनाए/बचाए रखने की जिद्द को मैंने प्राथमिकता दी। अपनी लोकप्रियता को कई बार जोखिम में डाले बिना कड़ा/बड़ा निर्णय लेना संभव नहीं होता। सो मैंने लिया।
पूर्वाग्रह से ग्रसित आलोचकों के लिए बस इतना ही:-
"सवाल ज़हर का नहीं था, वो तो मैं पी गया ।
तकलीफ़ उन्हें तो बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया ।।"
अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए - विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने। इंतजार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे। अपने को साबित करने का। करके दिखाएगा। अवश्य दिखाएगा। आपकी उम्मीदों और भरोसा पर खरा उतरेगा।
वैसे भी किसी भी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या उसके परिवार से नहीं, उसकी काबिलियत और योग्यता से होना चाहिए।
आप सबों का आभार 🙏
पैग़म्बर मोहम्मद साहब ने पूरे विश्व को शांति और भाईचारे का संदेश दिया।
उन्होंने कभी नहीं कहा कि धर्म को सड़कों पर लाकर विवाद पैदा किया जाए।
लेकिन उनके नाम, पर लोग साफ शब्द में गुंडागर्दी कर रहे थे जो की ये कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं था
@jitanrmanjhi पैग़म्बर मोहम्मद साहब ने पूरे विश्व को शांति और भाईचारे का संदेश दिया।
उन्होंने कभी नहीं कहा कि धर्म को सड़कों पर लाकर विवाद पैदा किया जाए।
लेकिन उनके नाम, पर लोग साफ शब्द में गुंडागर्दी कर रहे थे जो की ये कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं था
@nitin_gadkari ये है #Bihar जहानाबाद के टोल है यहाँ आये दिन इसीतरह के प्रति दिन कर्मियों के द्वारा होता है बेबजह यात्रियों को परेशान किया जाता है @jahanabad
कल मेरे दिन को खुशियों से भरने के लिए शुक्रिया! उन सभी लोगों को, जिन्होंने मुझे शुभकामनाएँ देने के लिए एक पल निकाला – शुक्रिया! आपने मुझे बहुत खास महसूस कराया। धन्यवाद
अनिकेत सिंह.....
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को उनके जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
ईश्वर से आपकी लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
#MYogiAdityanath
बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई।
ईश्वर से आपकी लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
आरक्षण केवल 4 श्रेणीयों को ही मिलना चाहिए
(1)..हर दिव्यांग को
(2)हर अनाथ को
(3)देश के लिए शहीद होने वालो, शहीदों को बच्चों को
(4) आर्थिक आधार पे हर गरीब को, चाहे वो किसी भी धर्म या किसी भी जाती से हो
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता आदरणीय श्री @rajnathsingh जी को मोदी सरकार 3.0 में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
Congratulations👏👏
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की इंटरमीडिएट (12वीं) बोर्ड परीक्षा में सफल सभी विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
जिन परीक्षार्थियों के रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं आये हैं, वे निराश न हों,
#BiharBoardResult
आप सभी को मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि आप जैसे दोस्त हैं जिन्होंने मेरे जन्मदिन को याद रखा, आपकी जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। ❤️
Aniket singh Rajput
#Bihar#india#बिहार#gaya#happybirthdayHappy