UP में एक बार फिर OBC आरक्षण घोटाला, लेखपाल के बाद पशुचिकित्सा अधिकारी के OBC के 110 पदों की चोरीI पशुधन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा पशुचिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) के कुल 404 पदों पर भर्ती 27% आरक्षण के हिसाब से OBC को कुल 110 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन दिए गए 0।
लेखपाल ने बाद अब UPPSC में OBC आरक्षण घोटाला SC आरक्षण घोटाला
आज UPPSC ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी(HEO) के कुल 221 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है जिसमें OBC वर्ग को मात्र 20 पद दिए गए हैं जो कुल पदों का मात्र 9 प्रतिशत है जबकि EWS को 10 प्रतिशत के हिसाब से 22 पद दिए गए है।
जबकि 221 का 27 प्रतिशत 59.67 है यानि पिछड़ों लगभग 60 पद होने चाहिए
221 की दलित वर्ग के लिए 21 प्रतिशत 46.41 होता है यानि SC की 47 सीट होनी चाहिए
क्या कारण कि दलितों पिछड़ों आदिवासियों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है ?
कुल 221 पदों का वर्गवार विवरण निम्न है👇
UR - 143
OBC- 20
EWS - 22
SC-21
ST - 15
HEO के कुल 221 पदों के सापेक्ष 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से OBC को लगभग 60 पद मिलने थे लेकिन मिला मात्र 20 पद जो कुल पदों का मात्र 9 प्रतिशत है।
इस तरह एक बार फिर से योगी सरकार ने पिछड़ों(OBC) के 40 पदों पर डाका डाल दिया।
आखिर योगी सरकार बार बार बहुजनों(OBC) के पदों पर ही डाका क्यों डाल रही है???
लेखपाल ने बाद अब UPPSC में OBC आरक्षण घोटाला🔥
आज UPPSC ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी(HEO) के कुल 221 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है जिसमें OBC वर्ग को मात्र 20 पद दिए गए हैं जो कुल पदों का मात्र 9 प्रतिशत है जबकि EWS को 10 प्रतिशत के हिसाब से 22 पद दिए गए है।
कुल 221 पदों का वर्गवार विवरण निम्न है👇
UR - 143
OBC- 20
EWS - 22
SC-21
ST - 15
HEO के कुल 221 पदों के सापेक्ष 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से OBC को लगभग 60 पद मिलने थे लेकिन मिला मात्र 20 पद जो कुल पदों का मात्र 9 प्रतिशत है।
इस तरह एक बार फिर से योगी सरकार ने पिछड़ों(OBC) के 40 पदों पर डाका डाल दिया।
आखिर योगी सरकार बार बार बहुजनों(OBC) के पदों पर ही डाका क्यों डाल रही है???
मेरी मरी माँ को भाजपा प्रवक्ता ने TV पर गाली दी थी, आजतक मोदी जी उसपर चुप हैं !
प्रधानमंत्री जी क्या मेरी माँ अलग हैं ?
: सुरेंद्र राजपूत, कांग्रेस प्रवक्ता
एक महिला पत्रकार (जिनसे मेरी असहमति रही है) के निजी जीवन के बारे में जिस किस्म की घटिया टिप्पणियां सोशल मीडिया पर चल रही हैं, वो शर्मनाक हैं। किसी पत्रकार की प्रोफेशनल आलोचना अपनी जगह है, आजकल कई बार नीयत पर भी सवाल उठाने पड़ते हैं। लेकिन अगर वो महिला हो तो यह आलोचना उसके व्यक्तिगत जीवन पर छींटाकशी का रूप क्यों लेती है? क्या यह हिंदुस्तानी मर्द की बीमार मानसिकता का नमूना नहीं है? क्या ऐसे लांछन लगाकर हम उन्ही संवैधानिक मूल्यों का हनन नहीं करते जिनकी रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं?
कृपया इस कीचक्रीड़ा को बंद करें!
अच्छा एक बात समझ नहीं आई। कोई मुख्यमंत्री तीस दिन जेल में रहेगा तो कुर्सी छोड़नी पड़ेगी और कोई चुनाव आयुक्त वोट चोरी करवाता पकड़ा गया तो उसे राज्यपाल या राष्ट्रपति बना दिया जाएगा ?