किसी भी आंदोलन को लाल फीता शाही की दम पर दमन करने से वह और उग्र हो जाता है।समस्या का निस्तारण आपसी संवाद से ही निकलता है।कही ये अफसर शाही भाजपा का ज्यादा नुकसान न करा दे 2027 का चुनाव नजदीक है #संसद_मार्च#Proteste#cjp
ये जीतू मुंडा हैं. इनके कंधे पर इनकी बहन कालरा मुंडा का कंकाल है.
दरअसल, जीतू की बहन कालरा की 2 महीने पहले मौत हो गई.
कालरा जीतू को बता गईं कि उनके बैंक खाते में 19,300 रुपए हैं, जिसे जीतू निकाल लें.
जीतू ओडिशा ग्रामीण बैंक पहुंचे. बैंक के कर्मचारियों न कहा- जिसका खाता है उसे लाओ या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस होने का प्रमाण दो.
सर्टिफिकेट बनवाना गरीब जीतू के लिए पहाड़ चढ़ने सा था, उन्होंने आसान रास्ता चुना.
जीतू ने बहन की कब्र खोदी, कंकाल को बोरी में भरा और कंधे पर कंकाल को लादकर बैंक पहुंच गए. इस दौरान जीतू 5 किलोमीटर ऐसे ही चलते रहे. रास्ते में जिसने भी ये देखा, वो स्तब्ध रह गया.
सोचिए.. अपने देश में ये है गरीबी का हाल, 19,300 रुपए के लिए लोग ऐसा खौफनाक कदम उठा रहे हैं.
फिर आएंगे न्यूज एंकर जो चिल्लाएंगे कि हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं... सॉरी, अब तो छठवीं अर्थव्यवस्था हो गए हैं.
ये है असल भारत
हाल ही में अभिनव सिंह जी को कर्णी सेना से बाहर किया जाना और चंद्रशेखर की रैली को लेकर उठा विवाद कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
हम अक्सर “सवर्ण एकता” की बात करते हैं, लेकिन जब वास्तविक मुद्दों पर मजबूती से खड़े होने का समय आता है, तब अपने ही लोग पीछे हटते नजर आते हैं। यह सच में आत्ममंथन का विषय है।
एक ओर, हमारे द्वारा आयोजित वैधानिक और शांतिपूर्ण कार्यक्रम—खासकर UGC से जुड़े मुद्दों पर—बार-बार अनुमति मिलने के बावजूद रद्द कर दिए जाते हैं। दूसरी ओर, कुछ संगठनों को बिना किसी बाधा के रैली और कार्यक्रम करने की खुली छूट मिल जाती है।
यह दोहरा मापदंड क्यों?
क्या कानून और प्रशासन सभी के लिए समान नहीं होना चाहिए?
क्या लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार केवल कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित है?
इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। #Justice #Equality #Democracy
आरक्षण का आधार जाति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति और वास्तविक आवश्यकता होना चाहिए।
कब तक समाज को जातियों में बाँटकर राजनीति की जाएगी?
हमें विभाजन नहीं — अधिकार चाहिए।
देश की प्रगति तभी संभव है जब हर युवा को उसकी योग्यता और परिस्थितियों के आधार पर न्याय मिले।
शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता हो,
युवाओं के भविष्य के साथ कोई समझौता न हो।
UGC जैसी नीतियों पर पुनर्विचार हो — उन्हें हटाया जाए।
साथ ही, कानूनों की भी निष्पक्ष समीक्षा हो।
किसी भी कानून का उद्देश्य न्याय होना चाहिए, न कि निर्दोष लोगों के जीवन को कठिन बनाना।
जहाँ दुरुपयोग की आशंका हों, वहाँ सुधार और संतुलन आवश्यक है।
हम अपने आने वाले कल को कमजोर नहीं होने देंगे।
अब समय है नीतियों पर गंभीर पुनर्विचार का —
संवाद हो, संतुलित सुधार हो, और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो।
✊ न्याय सबके लिए —
ना पक्षपात, ना अन्याय।
#rollbackugc #scst_kala_kanoon
रीवा के मानस भवन में सामान्य वर्ग का शक्ति प्रदर्शन।
UGC और तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ एकजुट हुंकार।
जातिगत राजनीति पर सीधा हमला, अधिकारों और समान अवसर की मांग बुलंद।
रीवा से साफ संदेश — अब चुप नहीं बैठेंगे।
#AnilMishra_Adv#ऑपरेशन_बगावत#UGC_RollBack#UGC#SCSTActMisuse#Rewa #BreakingNews
अन्यायपूर्ण एवं सर्वण विरोधी गतिविधियों की अति हो चुकी है ,अब बहुत हो चुका अब सिर्फ़ लिखने से काम नहीं चलेगा — अब समय है आंख बंद करके अपनी एकता दिखाने का ।
💢यह लड़ाई सिर्फ कोर्ट में नहीं, यह लड़ाई हमारे अस्तित्व, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। इसलिए इस लड़ाई को न्यायालय के साथ साथ रोड़ों पर भी आकर लड़ना होगा ।
💢अगर आज हम नहीं जागे, तो कल हमें शिकायत करने का भी हक़ नहीं होगा । अब समय है — जाति नहीं, सवर्ण एकता की बात हो। डर नहीं , संगठित शक्ति दिखाओ ।
💢काला क़ानून नहीं सहेगा हिंदुस्तान — वापस लो UGC नामक नया सर्वण हत्या कानून ।
#SavarnEkta #SavarnSamaj #UGCBill #SupremeCourt #GeneralCategory
UGC Act ने एक अनजाने में ही बड़ा काम कर दिया —
देश के सवर्ण समाज को एक मंच पर ला दिया।
YES 4 अब केवल संगठन नहीं,
बल्कि अधिकार, सम्मान और शिक्षा की लड़ाई का संकल्प है।
जब साज़िशें बेनकाब होती हैं,
तो समाज टूटता नहीं — और मज़बूत होता है।
अब यह आवाज़ दबेगी नहीं।
सवर्ण समाज जाग चुका है।
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#RightsOfStudents
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कानपुर
बिना परमीशन सैकड़ों नवयुवक हर गाड़ी पर तीन सवारी बिना हेलमेट ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हुए, न प्रशासन का भय, हुड़दंग काटते हुए रोड पर घूम रहे है राहगीरों को परेशानी हो रही वो अलग जिम्मेदार कार्यवाही करें वीडियो गोविंदनगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है @kanpurtraffic
कानपुर
संदिग्ध परिस्थितियों में महिला की हुई मौत
रात को जागरण देखने गई महिला की सुबह मिली लाश
पुलिस पर कई घंटों तक घटनास्थल पर न पहुंचने का आरोप
थाना सेन पश्चिम पारा की आजाद नगर चौकी का मामला @kanpurnagarpol@dcpskanpur@dgpup#kanpur#crime
ब्राह्मण गरीब है, वो पलायन कर मजदूरी कर रहा है, बच्चों की पढ़ाई के लिए, घर चलाने के लिए, 2 वक्त की रोटी के लिए, चौकीदारी का काम करने पर मजबूर है। ये ख़ुद बड़े बड़े BJP नेता दावा कर रहे हैं—-
लेकिन फिर भी सामान्य वर्ग के ग़रीब छात्रों को कोई स्कालरशिप नहीं? कोई संवैधानिक आयोग नहीं?
आज झूठ की हार हुई, न्याय की जीत।
आज माननीय उच्च न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखकर
एक निर्दोष व्यक्ति श्री गिर्राज सिंह जिसंके द्वारा मनुस्म्रति जलाए जाने पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी, को झूठे और मनगढ़ंत आरोपों से जमानत दिलाई गई।
यह लड़ाई सिर्फ एक केस की नहीं थी—
यह लड़ाई थी क़ानून के नाम पर हो रहे अन्याय के ख़िलाफ़।
हम साफ़ कहना चाहते हैं— SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम का दुरुपयोग निश्चित रूप से समाज के लिए काला सच बन चुका है।
जो झूठ के सहारे ताक़त दिखाते हैं, उनसे अदालत में ही जवाब लिया जाएगा।
न डरेंगे, न झुकेंगे —
हर निर्दोष के लिए लड़ते रहेंगे।
अगर आज आरक्षण के खिलाफ खड़े होकर हमारे साथ लड़ाई नहीं लड़ोगे तो आने वाला भविष्य तुमको कायर कहेगा जब तुम्हारे बच्चे नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे होंगे सरकारी नौकरियों से उन्हें वंचित कर दिया जाएगा यहां तक कि प्राइवेट कंपनियों से भी वंचित कर दिया जाएगा और जो लोग कहते हैं कि हमारे ऊपर 5000 वर्ष तक राज किया है आप लोगों ने वह लोग हमसे गुलामी करवाएंगे समय है जाग जाओ मैं अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं लड़ रहा हूं मैं आप लोगों के लिए लड़ रहा हूं अपने समाज और भारत माता के लिए लड़ रहा हूं।